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Ambedkar Nagar News: प्रेम और विश्वास ही है संबंध की आधारशिला
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 15 Mar 2026 10:39 PM IST
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आलापुर। क्षेत्र के शहाबुद्दीनपुर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण-रुक्मिणी विवाह और महारास लीला का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया गया। कथावाचक आशुतोष शुक्ल ने बताया कि भक्ति और समर्पण व्यक्ति के जीवन में धैर्य और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रेम और विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक है। महारास लीला को प्रेम और भक्ति का प्रतीक बताया गया। कथा के दौरान अक्रूर द्वारा कृष्ण और बलराम को मथुरा ले जाने, गोपियों द्वारा रथ रोकने, गोपी-उद्धव संवाद और भ्रमरगीत जैसे प्रसंगों का भी वर्णन किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश त्रिपाठी, राधेश्याम त्रिपाठी, डॉ. श्रीराम दुलार त्रिपाठी, रमेश, राकेश, डॉ. केपी त्रिपाठी, मुकुल, मोहित, विनय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
भरत चरित्र का किया भावपूर्ण वर्णन
जमुनीपुर। अकबरपुर स्थित एक निजी मैरिज लॉन में श्रीराम कथा के पांचवें दिन भरत चरित्र का मार्मिक वर्णन किया गया। कथावाचक लक्ष्मणाचार्य ने बताया कि वनवास के दौरान राम केवट से मिलने के बाद चित्रकूट में ठहरे थे। इसी दौरान अयोध्या में राजा दशरथ का राम के वियोग में निधन हो गया। इसके बाद भरत को ननिहाल से बुलाया गया और राजा दशरथ का अंतिम संस्कार करवाया गया। अयोध्या लौटने पर भरत को राजसिंहासन संभालने को कहा गया, लेकिन राम को वनवास दिए जाने की बात सुनकर उन्होंने गहरा रोष व्यक्त किया और राजगद्दी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। भरत राम को वापस लाने चित्रकूट पहुंचे, लेकिन राम ने पिता के वचन का पालन करने की बात कहते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय दोहराया। अंततः, राम के अयोध्या न लौटने पर भरत उनकी चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आए। इस प्रसंग के दौरान कैलाश नाथ श्रीवास्तव, वंदना, सुधाकर, जटाशंकर, रविकांत तिवारी सहित अन्य उपस्थित रहे।संवाद
जीवन का महत्वपूर्ण आधार है भक्ति
अंबेडकरनगरद्ध अकबरपुर के समसपुर दोयम में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर प्रकाश डाला गया। कथावाचक बालमुकुंद शास्त्री ने बताया कि भागवत कथा हमें धर्म, भक्ति और जीवन के मूल्यों से अवगत कराती है। कथा श्रवण से व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है और समाज में नैतिकता की भावना सुदृढ़ होती है। उन्होंने भक्ति को जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार बताया, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने मन को संयमित कर सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। भागवत कथा में ऐसे अनेक प्रसंग हैं जो मनुष्य को कर्तव्य, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।संवाद
कृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन
जमुनीपुर। मुस्तफाबाद में तिलहरा स्थित ब्रह्म बाबा स्थल में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कृष्ण जन्म प्रसंग का विशद वर्णन किया गया। कथावाचक गणेश ने बताया कि अन्याय और अत्याचार के समय धैर्य और सत्य के मार्ग पर डटे रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाना सीखना चाहिए। विश्वास और धैर्य के साथ किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। इस अवसर पर प्रधान शिवमूर्ति यादव, शिवशंकर, महेश शर्मा, सुनील यादव सहित अन्य उपस्थित रहे।संवाद
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उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रेम और विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक है। महारास लीला को प्रेम और भक्ति का प्रतीक बताया गया। कथा के दौरान अक्रूर द्वारा कृष्ण और बलराम को मथुरा ले जाने, गोपियों द्वारा रथ रोकने, गोपी-उद्धव संवाद और भ्रमरगीत जैसे प्रसंगों का भी वर्णन किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश त्रिपाठी, राधेश्याम त्रिपाठी, डॉ. श्रीराम दुलार त्रिपाठी, रमेश, राकेश, डॉ. केपी त्रिपाठी, मुकुल, मोहित, विनय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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भरत चरित्र का किया भावपूर्ण वर्णन
जमुनीपुर। अकबरपुर स्थित एक निजी मैरिज लॉन में श्रीराम कथा के पांचवें दिन भरत चरित्र का मार्मिक वर्णन किया गया। कथावाचक लक्ष्मणाचार्य ने बताया कि वनवास के दौरान राम केवट से मिलने के बाद चित्रकूट में ठहरे थे। इसी दौरान अयोध्या में राजा दशरथ का राम के वियोग में निधन हो गया। इसके बाद भरत को ननिहाल से बुलाया गया और राजा दशरथ का अंतिम संस्कार करवाया गया। अयोध्या लौटने पर भरत को राजसिंहासन संभालने को कहा गया, लेकिन राम को वनवास दिए जाने की बात सुनकर उन्होंने गहरा रोष व्यक्त किया और राजगद्दी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। भरत राम को वापस लाने चित्रकूट पहुंचे, लेकिन राम ने पिता के वचन का पालन करने की बात कहते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय दोहराया। अंततः, राम के अयोध्या न लौटने पर भरत उनकी चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आए। इस प्रसंग के दौरान कैलाश नाथ श्रीवास्तव, वंदना, सुधाकर, जटाशंकर, रविकांत तिवारी सहित अन्य उपस्थित रहे।संवाद
जीवन का महत्वपूर्ण आधार है भक्ति
अंबेडकरनगरद्ध अकबरपुर के समसपुर दोयम में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर प्रकाश डाला गया। कथावाचक बालमुकुंद शास्त्री ने बताया कि भागवत कथा हमें धर्म, भक्ति और जीवन के मूल्यों से अवगत कराती है। कथा श्रवण से व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है और समाज में नैतिकता की भावना सुदृढ़ होती है। उन्होंने भक्ति को जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार बताया, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने मन को संयमित कर सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। भागवत कथा में ऐसे अनेक प्रसंग हैं जो मनुष्य को कर्तव्य, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।संवाद
कृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन
जमुनीपुर। मुस्तफाबाद में तिलहरा स्थित ब्रह्म बाबा स्थल में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कृष्ण जन्म प्रसंग का विशद वर्णन किया गया। कथावाचक गणेश ने बताया कि अन्याय और अत्याचार के समय धैर्य और सत्य के मार्ग पर डटे रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाना सीखना चाहिए। विश्वास और धैर्य के साथ किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। इस अवसर पर प्रधान शिवमूर्ति यादव, शिवशंकर, महेश शर्मा, सुनील यादव सहित अन्य उपस्थित रहे।संवाद