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Ambedkar Nagar News: सील नर्सिंग होम में प्रसूता की बिगड़ी हालत, मेडिकल काॅलेज में मौत

संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Sun, 15 Mar 2026 10:46 PM IST
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Pregnant woman's condition deteriorates at Seal Nursing Home, dies at Medical College
जहांगीरगंज में रविवार को प्रसूता की हालत बिगड़ने व मौत के बाद न​र्सिंगहोम को सील करती स्वास्थ्य
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जहांगीरगंज/अंबेडकरनगर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे अवैध अस्पतालों का मौत का खेल बदस्तूर जारी है। ताजा मामला जहांगीरगंज बाजार का है, जहां दो साल से कागजों में सील चल रहे एक नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान बरती गई लापरवाही ने एक महिला की जान ले ली। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान प्रसूता की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मचा है।
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राजेसुल्तानपुर के केदरुपुर निवासी संदीप की 35 वर्षीय पत्नी राजकला को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर जहांगीरगंज स्थित दिव्यांशु हेल्थ केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था। सुबह करीब 10:40 बजे महिला ने बेटी को जन्म दिया, लेकिन दोपहर एक बजे अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होते देख अस्पताल संचालिका प्रियवंदा ने हाथ खड़े कर दिए और परिजनों को आनन-फानन में बाहर ले जाने को कहा। परिजन प्रसूता को लेकर मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर पहुंचे, लेकिन वहां इलाज शुरू होते ही राजकला ने दम तोड़ दिया।
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जुलाई 2024 में भी हुआ था सील
हैरानी की बात यह है कि जिस दिव्यांशु हेल्थ केयर सेंटर में यह हादसा हुआ, उसे जुलाई 2024 में तत्कालीन अधीक्षक ने निरीक्षण के दौरान अवैध पाते हुए सील किया था। संचालिका संचालन के कोई भी वैध दस्तावेज नहीं दिखा सकी थी। बावजूद इसके, विभाग की मिलीभगत या लापरवाही के चलते अस्पताल दोबारा खुल गया और बेखौफ होकर मरीजों की जान से खेलता रहा।

आशा बहू से संचालिका बनने का सफर
अस्पताल संचालिका प्रियवंदा मूल रूप से हथिनाराज गांव की रहने वाली है और पहले वहां आशा बहू के पद पर तैनात थी। स्वास्थ्य विभाग की पिछली कार्रवाई के दौरान उसकी संविदा खत्म कर दी गई थी, जिसके बाद उसने पूर्ण रूप से अवैध नर्सिंग होम का संचालन शुरू कर दिया।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस मामले पर सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही संबंधित अधीक्षक को तत्काल अस्पताल सील करने और दोषी संचालिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।

बॉक्स सूचना:
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
जिले में यह पहली घटना नहीं है। बार-बार सील होने के बावजूद ये मौत के केंद्र दोबारा कैसे खुल जाते हैं? क्या विभाग की कार्रवाई महज खानापूर्ति है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध अस्पतालों पर लगाम कसने में विभाग पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
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