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Ambedkar Nagar News: टांडा तहसील के गांवों में कटान से खतरा
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.टांडा क्षेत्र के फूलपुर गांव के किनारे घरों तक पहुंचा सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर।वीडियोग्रैब
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सद्दरपुर/सुलेमपुर। टांडा तहसील के लंगरतीर, फूलपुर और अजमेरी बादशाहपुर में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी की तेज धार से कटान हो रही है, जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। नदी का पानी अब खेतों से आगे बढ़कर आबादी और सार्वजनिक रास्तों तक पहुंचने लगा है।
प्रशासन व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने का दावा कर रहा है। हालांकि, धरातल पर कोई विशेष इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। लंगरतीर घाट पर बने अंत्येष्टि स्थल का संपर्क मार्ग सबसे अधिक संकट में है। नदी की कटान इस रास्ते को लगातार अपनी चपेट में ले रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने पर श्मशान घाट तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। इससे अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य भी प्रभावित होंगे।
फूलपुर और अजमेरी बादशाहपुर में नदी का पानी गांव की आबादी के बेहद करीब पहुंच चुका है। नदी किनारे रहने वाले परिवार दहशत में हैं। उन्हें डर है कि कटान तेज होने पर पहले खेती, फिर घर और पूरी बस्ती खतरे में आ जाएगी। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ने के बाद ही सक्रिय होता है। संवेदनशील स्थानों पर पहले से सुरक्षा कार्य कराए जाने चाहिए।
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अंत्येष्टि स्थल जाने वाले मार्ग पर कटान
पृथ्वीपुर निवासी भीमसेन ने बताया कि लंगर तीर पर कटान रोकने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। प्रशासन की ओर से अधिकारी खतरे का सांकेतिक बोर्ड लगाकर चले जाते हैं। अंत्येष्टि स्थल जाने वाला इंटरलॉकिंग मार्ग कटान की चपेट में आ रहा है। यह अंत्येष्टि स्थल की ओर जाने वाला एकमात्र मार्ग है।
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घर तक आ जाता है पानी
फूलपुर निवासी तुलसा ने बताया कि पिछले वर्षों की अपेक्षा में अभी स्थिति ठीक है, बाढ़ नहीं आई है। बाढ़ का पानी हर वर्ष घर तक आता है। प्रशासन की ओर से कुछ इंतजाम किए गए थे, जिनमें कुछ कारगर तो कुछ विफल रहे। बाढ़ के समय शौचालय तक जाना भी मुश्किल होता है।
नदी खतरे के निशान से नीचे
बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों की लगातार निगरानी की जा रही है। अभी नदी खतरे के निशान से नीचे है। जिन स्थानों पर समस्या आ रही है, उनका निरीक्षण कराकर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी।
- संजीव सिंह, एसडीएम
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प्रशासन व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने का दावा कर रहा है। हालांकि, धरातल पर कोई विशेष इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। लंगरतीर घाट पर बने अंत्येष्टि स्थल का संपर्क मार्ग सबसे अधिक संकट में है। नदी की कटान इस रास्ते को लगातार अपनी चपेट में ले रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने पर श्मशान घाट तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। इससे अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य भी प्रभावित होंगे।
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फूलपुर और अजमेरी बादशाहपुर में नदी का पानी गांव की आबादी के बेहद करीब पहुंच चुका है। नदी किनारे रहने वाले परिवार दहशत में हैं। उन्हें डर है कि कटान तेज होने पर पहले खेती, फिर घर और पूरी बस्ती खतरे में आ जाएगी। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ने के बाद ही सक्रिय होता है। संवेदनशील स्थानों पर पहले से सुरक्षा कार्य कराए जाने चाहिए।
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अंत्येष्टि स्थल जाने वाले मार्ग पर कटान
पृथ्वीपुर निवासी भीमसेन ने बताया कि लंगर तीर पर कटान रोकने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। प्रशासन की ओर से अधिकारी खतरे का सांकेतिक बोर्ड लगाकर चले जाते हैं। अंत्येष्टि स्थल जाने वाला इंटरलॉकिंग मार्ग कटान की चपेट में आ रहा है। यह अंत्येष्टि स्थल की ओर जाने वाला एकमात्र मार्ग है।
घर तक आ जाता है पानी
फूलपुर निवासी तुलसा ने बताया कि पिछले वर्षों की अपेक्षा में अभी स्थिति ठीक है, बाढ़ नहीं आई है। बाढ़ का पानी हर वर्ष घर तक आता है। प्रशासन की ओर से कुछ इंतजाम किए गए थे, जिनमें कुछ कारगर तो कुछ विफल रहे। बाढ़ के समय शौचालय तक जाना भी मुश्किल होता है।
नदी खतरे के निशान से नीचे
बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों की लगातार निगरानी की जा रही है। अभी नदी खतरे के निशान से नीचे है। जिन स्थानों पर समस्या आ रही है, उनका निरीक्षण कराकर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी।
- संजीव सिंह, एसडीएम