{"_id":"6a7f5119dde65805a30a0a83","slug":"the-abortion-deal-was-fixed-for-20-thousand-rupees-ambedkar-nagar-news-c-91-1-brp1007-162919-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: 20 हजार रुपये में तय हुआ था गर्भपात का सौदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: 20 हजार रुपये में तय हुआ था गर्भपात का सौदा
विज्ञापन
सम्मनपुर के इसी मेडिकल स्टोर में युवती का कराया गया जा रहा था गर्भपात। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सद्दरपुर/हजपुरा। जिले में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सम्मनपुर क्षेत्र में मेडिकल स्टोर में करीब पांच साल से संचालित क्लीनिक में युवती का गर्भपात कराने का सौदा करीब 20 हजार रुपये में तय हुआ था। मेडिकल स्टोर संचालक इंद्रजीत की पत्नी रेखा भी इस खेल में बराबर की हिस्सेदार थी और खेल जारी रखने के लिए हाल ही में जेएनएम की डिग्री लेने की भी चर्चा है। घटना के बाद से महिला रेखा गायब है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बाजार में संचालित रितिका मेडिकल सेंटर बाहर से तो सामान्य मेडिकल स्टोर नजर आता था, लेकिन इसके निचले हिस्से में मरीजों को भर्ती करने और उपचार की व्यवस्था की गई थी। यहां चार से पांच कमरे बने हुए हैं, जिनमें तखत पर गद्दे लगाकर मरीज भर्ती किए जाते थे। ऊपर संचालक का परिवार रहता था। आसपास के लोगों कहना है कि यहां लंबे समय से सामान्य मरीजों के साथ महिलाओं से संबंधित उपचार भी कराया जाता था।
मेडिकल स्टोर से पहले सम्मनपुर के अलमापुर में करीब 10 वर्षों तक दंपती ने किराये के मकान में भी अस्पताल का संचालन किया था। कुछ माह पहले भी यहां प्रसव के दौरान महिला की मौत हुई थी, लेकिन तब लेनदेन के जरिये मामले को दबा दिया गया था। अब इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल स्टोर व क्लीनिक सील कर मामले की जांच शुरू की है।
विज्ञापन
युवती की शादी तय होने की भी चर्चा
गर्भपात के दौरान हुई युवती की मौत के मामले परिजन कोई भी जानकारी देने से बच रहे हैं। मृतका के पिता का पांच साल पहले निधन हो चुका है। घर पर मां, तीन बहनें व एक भाई हैं। मृतका सबसे बड़ी थी। बताया जा रहा है कि युवती की शादी भी तय हो चुकी थी, लेकिन उसके गर्भवती होने की जानकारी से परिजन सदमे में थे। मां व अन्य परिजन युवक प्रमोद के बारे में पहले से जानती थे।
उठते रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में कथित रूप से क्लीनिक चलने की जानकारी क्षेत्र में आम थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यहां वर्षों से मरीजों की आवाजाही और भर्ती की व्यवस्था थी तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी टीमों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या विभाग के पास जिले में संचालित क्लीनिक और मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है? या फिर शिकायत और किसी घटना के सामने आने के बाद ही विभाग को ऐसे प्रतिष्ठानों की याद आती है? घटना के बाद जागा विभाग, पहले क्यों नहीं हुई जांच?
-- -- -- -- -- -- -- -
पूर्व में हुईं घटनाएं
अवैध क्लीनिक में इंजेक्शन के बाद हुई किशोरी की मौत
अकबरपुर के बरधा भिउरा गांव की 13 वर्षीय किशोरी गरिमा को बुखार आने के बाद 27 जुलाई को गोहन्ना स्थित बीके मेडिकल स्टोर में लेकर गए थे। यहां संचालक बृजेंद्र (विजेंद्र) ने उसे इंजेक्शन लगाया तो तबीयत बिगड़ गई। परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसकी मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल स्टोर सील कर दिया, लेकिन संचालक के खिलाफ अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है।
गर्भपात के बाद गई थी युवती की जान
बसखारी के जय इंद्रा हॉस्पिटल में जहांगीरगंज क्षेत्र के मठिया महमदपुर निवासी सुमन यादव (30) गर्भपात के लिए भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप था कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और इलाज के दौरान सात जुलाई को उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में भी अस्पताल को सील किया गया था। स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की है।
जिले भर में चलेगा अभियान
घटना की जानकारी मिलने के बाद मेडिकल स्टोर व क्लीनिक सील करा दिया गया है। जांच के लिए टीम गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। पूरे जिले में अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, एसीएमओ
विज्ञापन
स्थानीय लोगों के मुताबिक बाजार में संचालित रितिका मेडिकल सेंटर बाहर से तो सामान्य मेडिकल स्टोर नजर आता था, लेकिन इसके निचले हिस्से में मरीजों को भर्ती करने और उपचार की व्यवस्था की गई थी। यहां चार से पांच कमरे बने हुए हैं, जिनमें तखत पर गद्दे लगाकर मरीज भर्ती किए जाते थे। ऊपर संचालक का परिवार रहता था। आसपास के लोगों कहना है कि यहां लंबे समय से सामान्य मरीजों के साथ महिलाओं से संबंधित उपचार भी कराया जाता था।
विज्ञापन
मेडिकल स्टोर से पहले सम्मनपुर के अलमापुर में करीब 10 वर्षों तक दंपती ने किराये के मकान में भी अस्पताल का संचालन किया था। कुछ माह पहले भी यहां प्रसव के दौरान महिला की मौत हुई थी, लेकिन तब लेनदेन के जरिये मामले को दबा दिया गया था। अब इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल स्टोर व क्लीनिक सील कर मामले की जांच शुरू की है।
विज्ञापन
युवती की शादी तय होने की भी चर्चा
गर्भपात के दौरान हुई युवती की मौत के मामले परिजन कोई भी जानकारी देने से बच रहे हैं। मृतका के पिता का पांच साल पहले निधन हो चुका है। घर पर मां, तीन बहनें व एक भाई हैं। मृतका सबसे बड़ी थी। बताया जा रहा है कि युवती की शादी भी तय हो चुकी थी, लेकिन उसके गर्भवती होने की जानकारी से परिजन सदमे में थे। मां व अन्य परिजन युवक प्रमोद के बारे में पहले से जानती थे।
उठते रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में कथित रूप से क्लीनिक चलने की जानकारी क्षेत्र में आम थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यहां वर्षों से मरीजों की आवाजाही और भर्ती की व्यवस्था थी तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी टीमों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या विभाग के पास जिले में संचालित क्लीनिक और मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है? या फिर शिकायत और किसी घटना के सामने आने के बाद ही विभाग को ऐसे प्रतिष्ठानों की याद आती है? घटना के बाद जागा विभाग, पहले क्यों नहीं हुई जांच?
पूर्व में हुईं घटनाएं
अवैध क्लीनिक में इंजेक्शन के बाद हुई किशोरी की मौत
अकबरपुर के बरधा भिउरा गांव की 13 वर्षीय किशोरी गरिमा को बुखार आने के बाद 27 जुलाई को गोहन्ना स्थित बीके मेडिकल स्टोर में लेकर गए थे। यहां संचालक बृजेंद्र (विजेंद्र) ने उसे इंजेक्शन लगाया तो तबीयत बिगड़ गई। परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसकी मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल स्टोर सील कर दिया, लेकिन संचालक के खिलाफ अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है।
गर्भपात के बाद गई थी युवती की जान
बसखारी के जय इंद्रा हॉस्पिटल में जहांगीरगंज क्षेत्र के मठिया महमदपुर निवासी सुमन यादव (30) गर्भपात के लिए भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप था कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और इलाज के दौरान सात जुलाई को उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में भी अस्पताल को सील किया गया था। स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की है।
जिले भर में चलेगा अभियान
घटना की जानकारी मिलने के बाद मेडिकल स्टोर व क्लीनिक सील करा दिया गया है। जांच के लिए टीम गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। पूरे जिले में अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, एसीएमओ