{"_id":"697fa5b1da52bd52c6034965","slug":"the-chirping-of-birds-in-bhadouna-lake-the-arrival-of-cranes-added-to-the-charm-ambedkar-nagar-news-c-91-1-abn1007-149843-2026-02-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: भदौना झील में पक्षियों का कलरव, सारस की आमद से बढ़ी रौनक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: भदौना झील में पक्षियों का कलरव, सारस की आमद से बढ़ी रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 02 Feb 2026 12:42 AM IST
विज्ञापन
झील के पास मौजूद सारस जोड़ा।
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड के रूप में चयनित भदौना वेटलैंड, वन विभाग के संरक्षण प्रयासों से जीवंत हो उठा है। करीब 43 हेक्टेयर में फैली यह झील अब देसी-विदेशी पक्षियों का ठिकाना बन गई है, जहां एक दर्जन से अधिक प्रजातियों के पक्षी कलरव करते देखे जा सकते हैं।
इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए अभी भी कुछ महत्वपूर्ण कार्यों की आवश्यकता है, जिसमें मुख्य मार्ग से झील तक सड़क निर्माण और झील की पूर्ण सफाई शामिल है। जिला मुख्यालय अकबरपुर से लगभग 17 किलोमीटर दूर बनगांव मार्ग पर मौरापारा गांव में स्थित भदौना झील, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पक्षियों के कलरव से प्रकृति को जीवंत करती है।
यहां सारस, मोरहेन सहित कई प्रकार के पक्षी देखे जा सकते हैं। शासन द्वारा जारी 40 लाख रुपये के बजट से झील के पश्चिमी छोर पर इंटरलॉकिंग पाथवे, आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था, वाच टॉवर, प्रवेश द्वार और शौचालय का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। झील के किनारे बांस की रेलिंग भी लगाई गई है और परिसर की सफाई के लिए तीन कर्मियों को तैनात किया गया है।
जलकुंभी से निपटने की जरूरत
झील में बड़े पैमाने पर जलकुंभी उगी हुई है, जिससे इसकी सुंदरता प्रभावित हो रही है। किनारों पर भी सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। झील में मिट्टी के दो टापू बने हैं, जिनकी संख्या बढ़ाने से पक्षियों को प्रजनन के लिए बेहतर स्थान मिल सकेगा, जिससे उनकी संख्या में वृद्धि की उम्मीद है।
सारस के जोड़ों का दिखना शुभ संकेत
संरक्षण के बाद से भदौना झील में पक्षियों की आमद बढ़ी है। इन दिनों सारस के जोड़ों का यहां दिखाई देना पक्षियों की संख्या में वृद्धि का एक शुभ संकेत माना जा रहा है। पहले लोग यहां मछली पकड़ने आते थे, वहीं अब संरक्षण के कारण इस पर रोक लगा दी गई है, जिससे पक्षियों को निर्भय वातावरण मिल रहा है।
वेटलैंड तक सुगम पहुंच की दरकार
वर्तमान में भदौना झील तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग पर कोई स्पष्ट द्वार या सूचना बोर्ड नहीं है। आसपास के गांवों के लोग ही यहां तक पहुंच पाते हैं। मुख्य मार्ग से झील तक का रास्ता अभी भी कच्चा है। ऐसे में, जिला प्रशासन को ग्राम पंचायत या जिला पंचायत निधि से सड़क का निर्माण कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पर्यटक आसानी से इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें।
वन विभाग के प्रयास जारी
वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड में चयनित भदौना वेटलैंड को वन विभाग संरक्षित कर रहा है। झील को साफ करने का कार्य जारी है। पाथवे, रेस्ट एरिया, निगरानी के लिए टॉवर व शौचालय का निर्माण हो चुका है। अन्य संरक्षण के कार्य कराए जाने हैं।
- डॉ. उमेश तिवारी, डीएफओ
Trending Videos
इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए अभी भी कुछ महत्वपूर्ण कार्यों की आवश्यकता है, जिसमें मुख्य मार्ग से झील तक सड़क निर्माण और झील की पूर्ण सफाई शामिल है। जिला मुख्यालय अकबरपुर से लगभग 17 किलोमीटर दूर बनगांव मार्ग पर मौरापारा गांव में स्थित भदौना झील, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पक्षियों के कलरव से प्रकृति को जीवंत करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां सारस, मोरहेन सहित कई प्रकार के पक्षी देखे जा सकते हैं। शासन द्वारा जारी 40 लाख रुपये के बजट से झील के पश्चिमी छोर पर इंटरलॉकिंग पाथवे, आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था, वाच टॉवर, प्रवेश द्वार और शौचालय का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। झील के किनारे बांस की रेलिंग भी लगाई गई है और परिसर की सफाई के लिए तीन कर्मियों को तैनात किया गया है।
जलकुंभी से निपटने की जरूरत
झील में बड़े पैमाने पर जलकुंभी उगी हुई है, जिससे इसकी सुंदरता प्रभावित हो रही है। किनारों पर भी सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। झील में मिट्टी के दो टापू बने हैं, जिनकी संख्या बढ़ाने से पक्षियों को प्रजनन के लिए बेहतर स्थान मिल सकेगा, जिससे उनकी संख्या में वृद्धि की उम्मीद है।
सारस के जोड़ों का दिखना शुभ संकेत
संरक्षण के बाद से भदौना झील में पक्षियों की आमद बढ़ी है। इन दिनों सारस के जोड़ों का यहां दिखाई देना पक्षियों की संख्या में वृद्धि का एक शुभ संकेत माना जा रहा है। पहले लोग यहां मछली पकड़ने आते थे, वहीं अब संरक्षण के कारण इस पर रोक लगा दी गई है, जिससे पक्षियों को निर्भय वातावरण मिल रहा है।
वेटलैंड तक सुगम पहुंच की दरकार
वर्तमान में भदौना झील तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग पर कोई स्पष्ट द्वार या सूचना बोर्ड नहीं है। आसपास के गांवों के लोग ही यहां तक पहुंच पाते हैं। मुख्य मार्ग से झील तक का रास्ता अभी भी कच्चा है। ऐसे में, जिला प्रशासन को ग्राम पंचायत या जिला पंचायत निधि से सड़क का निर्माण कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पर्यटक आसानी से इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें।
वन विभाग के प्रयास जारी
वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड में चयनित भदौना वेटलैंड को वन विभाग संरक्षित कर रहा है। झील को साफ करने का कार्य जारी है। पाथवे, रेस्ट एरिया, निगरानी के लिए टॉवर व शौचालय का निर्माण हो चुका है। अन्य संरक्षण के कार्य कराए जाने हैं।
- डॉ. उमेश तिवारी, डीएफओ
