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Ambedkar Nagar News: आत्ममंथन से व्यक्ति अपने आचरण में कर सकता है सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:58 PM IST
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अंबेडकरनगर। आलापुर के गिरैया बाजार के कूदरूपुर कल्याणपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। प्रवाचक राकेश तिवारी ने बताया कि जीवन में संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। कर्म के अनुसार ही व्यक्ति को फल प्राप्त होता है।
आत्ममंथन से व्यक्ति अपने आचरण में सुधार कर सकता है। श्रीमद्भागवत जीवन के व्यवहारिक पक्षों को समझाने वाला ग्रंथ है, जिसमें व्यक्ति के आचरण, कर्तव्य और सोच को सही दिशा देने की क्षमता है। मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए। भागवत के अनुसार, व्यक्ति का वर्तमान उसके पूर्व कर्मों का परिणाम होता है और भविष्य उसके वर्तमान कर्मों से निर्धारित होता है। इस विचार को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया, जिससे श्रोताओं को संदेश सहज रूप से समझ में आया। श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने वाला दर्शन है। भागवत में परिवार, समाज और शासन व्यवस्था से जुड़े विषयों का भी उल्लेख मिलता है। सत्य, संयम और करुणा जैसे गुणों के बिना समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है।
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आत्ममंथन से व्यक्ति अपने आचरण में सुधार कर सकता है। श्रीमद्भागवत जीवन के व्यवहारिक पक्षों को समझाने वाला ग्रंथ है, जिसमें व्यक्ति के आचरण, कर्तव्य और सोच को सही दिशा देने की क्षमता है। मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए। भागवत के अनुसार, व्यक्ति का वर्तमान उसके पूर्व कर्मों का परिणाम होता है और भविष्य उसके वर्तमान कर्मों से निर्धारित होता है। इस विचार को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया, जिससे श्रोताओं को संदेश सहज रूप से समझ में आया। श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने वाला दर्शन है। भागवत में परिवार, समाज और शासन व्यवस्था से जुड़े विषयों का भी उल्लेख मिलता है। सत्य, संयम और करुणा जैसे गुणों के बिना समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है।
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