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Ambedkar Nagar News: परिस्थितियों और धन से ऊपर होती है सच्ची मित्रता

संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Tue, 17 Mar 2026 12:43 AM IST
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True friendship transcends circumstances and wealth.
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आलापुर। शहाबुद्दीनपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर आचार्य आशुतोष शुक्ल ने सुदामा चरित्र के माध्यम से मित्रता की अनूठी परिभाषा गढ़ी। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता किसी भौतिक सुख या धन की मोहताज नहीं होती, यह केवल अटूट विश्वास और प्रेम पर टिकी है।
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आचार्य ने 16107 कन्याओं के उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान कृष्ण ने नरकासुर के चंगुल से मुक्त कराकर उन्हें समाज में सम्मान दिलाने के लिए स्वीकार किया, जो करुणा का सर्वोत्तम उदाहरण है। इस दौरान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं और स्यमंतक मणि के प्रसंगों ने भी भक्तों को मंत्रमुग्ध किया। आचार्य ने बताया कि भगवान ने उन्हें मुक्त कराया और समाज में सम्मान दिलाने के लिए उनसे विवाह किया। इस प्रसंग को धर्म की रक्षा और करुणा का उदाहरण बताया गया। इस दौरान राधेश्याम, डॉ. श्रीराम दुलार त्रिपाठी, रमेश, राकेश, डॉ. केपी त्रिपाठी, मुकुल, मोहित, विनय, विभोर व अन्य उपस्थित रहे।
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सामूहिक आयोजनों से बढ़ता है सामाजिक सद्भाव
फोटो - 8
आलापुर। आमादरवेशपुर न्योरी में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन प्रवाचक राकेश तिवारी ने आध्यात्मिक ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति और सदाचार केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये मनुष्य के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। कथा में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद भाजपा अयोध्या जिला प्रभारी डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी और जिपं अध्यक्ष साधु वर्मा ने भी व्यास पीठ का आशीर्वाद लिया। वक्ता ने जोर देकर कहा कि जीवन में संयम और सत्य का मार्ग ही मनुष्य को वास्तविक सफलता की ओर ले जाता है। भाजपा अयोध्या जिला प्रभारी डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी, जिपं अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा उर्फ साधु वर्मा व अन्य उपस्थित रहे।संवाद


संयम और सदाचार ही जीवन के वास्तविक आभूषण
अंबेडकरनगर। अकबरपुर के समसपुर दोयम में जारी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बालमुकुंद शास्त्री ने नैतिक मूल्यों की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि हमारे धार्मिक ग्रंथ केवल कथाएं नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान और संयम को उतार ले, तो उसके विचार और व्यवहार स्वतः ही संतुलित हो जाते हैं। सामूहिक आयोजनों को उन्होंने समाज की एकता और आपसी जुड़ाव का सबसे बड़ा केंद्र बताया। संवाद

सच्ची भक्ति के लिए विश्वास और समर्पण है अनिवार्य
जमुनीपुर। मुस्तफाबाद में आयोजित कथा के चौथे दिन गणेश महाराज ने रासलीला के दिव्य प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान और भक्त के बीच का संबंध केवल समर्पण से ही गहरा होता है। अन्याय और छल की उम्र छोटी होती है, अंततः जीत सत्य और धर्म की ही होती है। कठिन परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति धर्म का मार्ग नहीं छोड़ता, ईश्वर सदैव उसके साथ रहते हैं। धार्मिक आयोजनों से समाज में एकजुटता और आपसी सहयोग की भावना मजबूत होती है। संवाद

सच्ची निष्ठा ही बनाती है महान
जमुनीपुर। रतनपुर स्थित मैरिज लॉन में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया गया। प्रवाचक लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि अपार शक्ति होने के बाद भी सेवा भाव और विनम्रता कैसे बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि साहस और संयम के साथ काम करने पर बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है। हनुमान जी का प्रभु राम के प्रति समर्पण आज के युग में हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। कैलाश नाथ, संदीप कुमार शर्मा, नरेंद्र व अन्य उपस्थित रहे। संवाद
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