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UP: सऊदी में फंसे अंबेडकरनगर के मजदूर...161 भारतीय मजदूरों ने वीडियो जारी कर मांगी मदद; भूखे-प्यासे तड़प रहे

अमर उजाला नेटवर्क, अंबेडकरनगर Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 31 Jan 2026 09:18 AM IST
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सार

सऊदी अरब के अबहा शहर में अंबेडकरनगर समेत यूपी, बिहार और राजस्थान के 161 भारतीय मजदूर गंभीर संकट में फंसे हैं। तीन महीने से वेतन व भोजन न मिलने से हालात बदतर हैं। मजदूरों ने वीडियो जारी कर भारत सरकार से सुरक्षित स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है।

UP: Workers from Ambedkarnagar stranded in Saudi Arabia...161 Indian laborers release video appealing for help
मजदूरों ने जारी किया वीडियो - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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सऊदी अरब के अबहा शहर में उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के 161 मजदूर गंभीर संकट में फंसे हुए हैं। इनमें अंबेडकरनगर जिले के भी नौ मजदूर शामिल हैं। पिछले तीन महीनों से इन मजदूरों को न तो वेतन दिया गया है और न ही पर्याप्त भोजन। दाने-दाने को तरस रहे इन मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर भारत सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई है।

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इन मजदूरों में बसखारी ब्लॉक के अमिया वामनपुर गांव के संतोष कुमार, हृदेश कुमार के अलावा फूलबदन निवासी नैपुरा आलापुर, अजय चौहान निवासी जैती जहांगीरगंज, वीरेंद्र कुमार निवासी औरंगाबाद इल्तिफातगंज, विजयपाल निवासी दुर्गापुर करमपुर, विजय बहादुर निवासी खुज्जीपुर जहांगीरगंज, सुरेश निवासी सहिजना हमजापुर आलापुर, सूरजभान निवासी बनगांव आंशिक अकबरपुर शामिल हैं।
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अमिया वामनपुर निवासी हृदेश के भतीजे सोनू राजभर ने बताया कि मजदूरों का वीजा छह माह पहले ही समाप्त हो चुका है, लेकिन कंपनी उन्हें वापस नहीं भेज रही है। कंपनी उनसे जबरन पेंटिंग का काम ले रही है। स्थिति इतनी दयनीय है कि भारत में रह रहे गरीब परिजन खुद तंगी में होने के बावजूद वहां फंसे अपनों को खाने-पीने के लिए पैसे भेज रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद कई समाजसेवी संगठनों ने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क साधा है। अंबेडकरनगर के अलावा गोरखपुर, संतकबीरनगर, लखनऊ, लखीमपुर, आजमगढ़ और बस्ती के मजदूर भी इस समूह में शामिल हैं। परिजनों और मजदूरों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर सभी भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जाए।

मजदूरों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

सऊदी अरब में आजीविका कमाने गए मजदूरों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहां फंसे मजदूर और यहां उनके परिजन, दोनों ही सुरक्षित घर वापसी के लिए सरकार की ओर ताक रहे हैं। जब तक उनकी वापसी सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक इन परिवारों के लिए चैन की रोटी नसीब होना मुश्किल लग रहा है।

अकबरपुर जिला मुख्यालय से करीब 19 किलोमीटर दूर स्थित अमिया बामनपुर गांव के हृदेश कुमार वहां गंभीर संकट में हैं। उनके पिता राममिलन ने बताया कि हृदेश घर लौटना चाहते हैं, लेकिन कंपनी ने उनका पासपोर्ट अपने पास जमा कर रखा है। इसी गांव के संतोष की स्थिति भी चिंताजनक है।

परिजनों के अनुसार, शुरुआत के एक-दो महीने तो सब ठीक रहा और उन्होंने पैसे भी भेजे, लेकिन धीरे-धीरे हालात बिगड़ते गए। आज स्थिति यह है कि मजदूरों के पास भोजन तक के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचे हैं। परिजनों की करुण पुकार है कि जब वहां कमाई ही नहीं हो रही, तो उन्हें हर हाल में वापस लाया जाए। हृदेश कुमार के घर में बुजुर्ग माता-पिता के अलावा पत्नी और दो छोटे बच्चे (12 और 8 वर्ष) उनकी राह देख रहे हैं। वहीं संतोष के परिवार में माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चे हैं, जिनका भरण-पोषण संतोष के भरोसे ही था।

सामाजिक कार्यकर्ता आबिद हुसैन (बजरंगी भाईजान) ने सऊदी अरब में फंसे मजदूरों से फोन पर सीधे बातचीत की। मजदूरों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए उनसे मदद की अपील की है। आबिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और जेद्दा (सऊदी अरब) स्थित भारतीय दूतावास को प्रेषित कर दी है।







 

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