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Amethi News: संयुक्त संकल्प मंच लड़ेगा पूर्वांचल राज्य के गठन की लड़ाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 21 Jan 2026 11:58 PM IST
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अमेठी। पूर्वांचल को अलग राज्य बनाए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। बुधवार को शहर के ददन सदन में आयोजित खिचड़ी भोज व स्नेह मिलन कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने पूर्वांचल राज्य के गठन की पुरजोर वकालत करते हुए नारा दिया कि पूर्वांचल मांगे अपना प्रदेश, तभी बनेगा विकसित प्रदेश। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल राज्य के गठन की लड़ाई संयुक्त संकल्प मंच के माध्यम से लड़ी जाएगी। पूर्वांचल राज्य के गठन की बुलंद हुई आवाज ने जिले में राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी है।
डॉ. संजय सिंह ने कहा कि प्रदेश के आठ मंडलों के 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य का गठन किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में एक ही प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सुशासन संभव नहीं है। बड़े राज्यों में लोकतंत्र और प्रशासनिक प्रभावशीलता दोनों कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि पूर्वांचल के विकास के लिए अलग राज्य बनाया जाए। प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य की आबादी करीब 7.98 करोड़ होगी और यह देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य होगा।
उन्होंने बताया कि इसमें वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, अकबरपुर, सुलतानपुर, अमेठी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर जिले शामिल होंगे। उन्होंने इसके लिए संघर्ष से जुड़े सभी संगठनों व सेनानियों से एकजुट होने का आह्वान भी किया।
डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि भाषा और सांस्कृतिक दृष्टि से पूर्वांचल की अलग पहचान है। पूर्वांचल की समस्याएं अलग हैं, जिनके समाधान के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है। स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और बुनियादी ढांचे की भारी कमी विकास में बाधक है। पूर्वांचल देश का बड़ा बिजली उत्पादन केंद्र है। मिर्जापुर और सोनभद्र खनिज संपदा से समृद्ध हैं। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे आध्यात्मिक केंद्रों के साथ सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती और लुंबिनी का बौद्ध पर्यटन पूर्वांचल को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का बड़ा माध्यम बना सकता है। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि, कालिकन धाम पीठाधीश्वर श्रीमहाराज, पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश मिश्र मटियारी, एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राम प्रसाद मिश्र, उमाशंकर पांडेय, पूर्व विधायक तेजभान सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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डॉ. संजय सिंह ने कहा कि प्रदेश के आठ मंडलों के 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य का गठन किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में एक ही प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सुशासन संभव नहीं है। बड़े राज्यों में लोकतंत्र और प्रशासनिक प्रभावशीलता दोनों कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि पूर्वांचल के विकास के लिए अलग राज्य बनाया जाए। प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य की आबादी करीब 7.98 करोड़ होगी और यह देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य होगा।
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उन्होंने बताया कि इसमें वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, अकबरपुर, सुलतानपुर, अमेठी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर जिले शामिल होंगे। उन्होंने इसके लिए संघर्ष से जुड़े सभी संगठनों व सेनानियों से एकजुट होने का आह्वान भी किया।
डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि भाषा और सांस्कृतिक दृष्टि से पूर्वांचल की अलग पहचान है। पूर्वांचल की समस्याएं अलग हैं, जिनके समाधान के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है। स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और बुनियादी ढांचे की भारी कमी विकास में बाधक है। पूर्वांचल देश का बड़ा बिजली उत्पादन केंद्र है। मिर्जापुर और सोनभद्र खनिज संपदा से समृद्ध हैं। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे आध्यात्मिक केंद्रों के साथ सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती और लुंबिनी का बौद्ध पर्यटन पूर्वांचल को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का बड़ा माध्यम बना सकता है। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि, कालिकन धाम पीठाधीश्वर श्रीमहाराज, पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश मिश्र मटियारी, एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राम प्रसाद मिश्र, उमाशंकर पांडेय, पूर्व विधायक तेजभान सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
