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Amethi News: 11 माह से प्रोत्साहन राशि को तरस रहीं प्रसूताएं
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 18 May 2026 12:40 AM IST
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अमेठी सिटी। मातृत्व से जुड़ी सरकारी योजनाओं की रफ्तार बजट संकट और तकनीकी खामियों में उलझ गई है। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली 16 हजार प्रसूताएं पिछले 11 माह से जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि का इंतजार कर रही हैं। वहीं गर्भवतियों की मुफ्त अल्ट्रासाउंड जांच भी जुलाई से ठप है, जिससे महिलाओं को निजी जांच केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उन्हें परेशानी हो रही है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये दिए जाते हैं। संस्थागत प्रसव कराने पर आशा कार्यकर्ताओं को भी 600 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है, लेकिन भुगतान अटकने से आशाओं में भी नाराजगी बढ़ रही है।
जिले में गर्भवतियों की निशुल्क जांच के लिए 15 निजी जांच केंद्र संबद्ध हैं। प्रत्येक जांच पर 425 रुपये का ई-वाउचर जारी होना होता है, लेकिन जुलाई से स्पर्श पोर्टल में अपडेट के चलते वाउचर नहीं बन पा रहे हैं।
भुगतान बंद होने पर कई केंद्र संचालकों ने मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवा रोक दी है। इसका असर जिले की करीब 70 हजार गर्भवतियों पर पड़ रहा है। गर्भवतियों को जांच के लिए निजी अस्पतालों में पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं को बार-बार लौटना पड़ रहा है। इस बारे सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि समस्या उच्च स्तर की है। मरीजों को राहत देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
जननी सुरक्षा योजना के तहत शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये दिए जाते हैं। संस्थागत प्रसव कराने पर आशा कार्यकर्ताओं को भी 600 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है, लेकिन भुगतान अटकने से आशाओं में भी नाराजगी बढ़ रही है।
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जिले में गर्भवतियों की निशुल्क जांच के लिए 15 निजी जांच केंद्र संबद्ध हैं। प्रत्येक जांच पर 425 रुपये का ई-वाउचर जारी होना होता है, लेकिन जुलाई से स्पर्श पोर्टल में अपडेट के चलते वाउचर नहीं बन पा रहे हैं।
भुगतान बंद होने पर कई केंद्र संचालकों ने मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवा रोक दी है। इसका असर जिले की करीब 70 हजार गर्भवतियों पर पड़ रहा है। गर्भवतियों को जांच के लिए निजी अस्पतालों में पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं को बार-बार लौटना पड़ रहा है। इस बारे सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि समस्या उच्च स्तर की है। मरीजों को राहत देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।