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Amethi News: भावनात्मक रिश्तों की डोर से संबंधों को सहेज रहे राहुल गांधी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 18 May 2026 12:35 AM IST
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अमेठी सिटी। अमेठी और गांधी परिवार का रिश्ता केवल चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं रहा। यह संबंध दशकों से भरोसे, अपनत्व और भावनाओं की डोर से जुड़ा है। यही वजह है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे ने जिले की राजनीतिक सरगर्मियां फिर तेज कर दी हैं।
अमेठी में गांधी परिवार की राजनीतिक कहानी वर्ष 1980 में संजय गांधी की जीत के साथ शुरू हुई थी। संजय गांधी ने अमेठी को राष्ट्रीय राजनीति में अलग पहचान दिलाई। उनके निधन के बाद राजीव गांधी ने यहां की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में सड़क, दूरसंचार और शिक्षा से जुड़ी कई योजनाओं ने अमेठी की तस्वीर बदलने का काम किया। समय बदला, राजनीतिक परिस्थितियां भी बदलीं, लेकिन अमेठी से गांधी परिवार का जुड़ाव बना रहा।
सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार यहां आते रहे। गांवों में आज भी बुजुर्ग उस दौर को याद करते हैं, जब गांधी परिवार के सदस्य लोगों के सुख-दुख में शामिल होते थे। राहुल गांधी ने वर्ष 2004 में पहली बार अमेठी से चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी। लगातार तीन बार सांसद रहने के बाद वर्ष 2019 में उन्हें भाजपा प्रत्याशी स्मृति इरानी से हार का सामना करना पड़ा।
यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था, लेकिन हार के बाद भी राहुल का अमेठी आना-जाना नहीं रुका। यही बात कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राहुल गांधी के करीबी किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारा। राहुल और प्रियंका ने प्रचार के दौरान रिश्तों और भरोसे की बात दोहराई। इसका असर चुनाव परिणाम में भी दिखा और कांग्रेस ने जीत दर्ज की।
अब राहुल गांधी का प्रस्तावित दौरा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पुराने रिश्तों को फिर से ताजा करने की कोशिश माना जा रहा है। कार्यकर्ता सम्मेलन, योगेंद्र मिश्र के परिवार से मुलाकात और मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल में नई स्वास्थ्य सुविधाओं के लोकार्पण को लेकर उत्साह का माहौल है। (संवाद)
अमेठी में गांधी परिवार की राजनीतिक कहानी वर्ष 1980 में संजय गांधी की जीत के साथ शुरू हुई थी। संजय गांधी ने अमेठी को राष्ट्रीय राजनीति में अलग पहचान दिलाई। उनके निधन के बाद राजीव गांधी ने यहां की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में सड़क, दूरसंचार और शिक्षा से जुड़ी कई योजनाओं ने अमेठी की तस्वीर बदलने का काम किया। समय बदला, राजनीतिक परिस्थितियां भी बदलीं, लेकिन अमेठी से गांधी परिवार का जुड़ाव बना रहा।
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सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार यहां आते रहे। गांवों में आज भी बुजुर्ग उस दौर को याद करते हैं, जब गांधी परिवार के सदस्य लोगों के सुख-दुख में शामिल होते थे। राहुल गांधी ने वर्ष 2004 में पहली बार अमेठी से चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी। लगातार तीन बार सांसद रहने के बाद वर्ष 2019 में उन्हें भाजपा प्रत्याशी स्मृति इरानी से हार का सामना करना पड़ा।
यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था, लेकिन हार के बाद भी राहुल का अमेठी आना-जाना नहीं रुका। यही बात कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राहुल गांधी के करीबी किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारा। राहुल और प्रियंका ने प्रचार के दौरान रिश्तों और भरोसे की बात दोहराई। इसका असर चुनाव परिणाम में भी दिखा और कांग्रेस ने जीत दर्ज की।
अब राहुल गांधी का प्रस्तावित दौरा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पुराने रिश्तों को फिर से ताजा करने की कोशिश माना जा रहा है। कार्यकर्ता सम्मेलन, योगेंद्र मिश्र के परिवार से मुलाकात और मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल में नई स्वास्थ्य सुविधाओं के लोकार्पण को लेकर उत्साह का माहौल है। (संवाद)