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Amethi News: धैर्य व दृढ़ संकल्प से मिलता है लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 06 Feb 2026 12:39 AM IST
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.संग्रामपुर के तिवारीपुर करनाईपुर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत-आयोजक
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अमेठी सिटी। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को मोह-माया से दूर रखते हुए सत्कर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती है। मानव हृदय संसार रूपी सागर के समान है, जिसमें उठने वाले अच्छे और बुरे विचार देवता और दानव के मंथन जैसे होते हैं। यह विचार तिवारीपुर करनाईपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवाचक आचार्य संतोष त्रिपाठी ने व्यक्त किए।
प्रवाचक ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि ध्रुव ने पिता की गोद में बैठने की इच्छा पूर्ण करने के लिए कठिन तपस्या की और भगवान की कृपा प्राप्त की। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों को अवसर मानकर आगे बढ़ना चाहिए। धैर्य और दृढ़ संकल्प से लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
भक्त प्रह्लाद और नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अत्याचार और अहंकार का अंत निश्चित होता है, जबकि सच्ची भक्ति सदैव विजयी रहती है। हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बीच प्रह्लाद की अटूट आस्था भगवान को नरसिंह रूप में प्रकट होने के लिए प्रेरित करती है। यह प्रसंग भक्ति की शक्ति को स्पष्ट करता है।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य से भूल होना स्वाभाविक है, लेकिन आत्मचिंतन और सुधार आवश्यक है। कथा श्रवण के लिए श्रद्धा और जिज्ञासा का होना जरूरी बताया। इस मौके पर ओम प्रकाश तिवारी, कमलेश तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, जय प्रकाश, लालूद्ध, प्रेम तिवारी, परमानंद तिवारी, संदीप तिवारी, मयंक तिवारी आदि मौजूद रहें।
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प्रवाचक ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि ध्रुव ने पिता की गोद में बैठने की इच्छा पूर्ण करने के लिए कठिन तपस्या की और भगवान की कृपा प्राप्त की। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों को अवसर मानकर आगे बढ़ना चाहिए। धैर्य और दृढ़ संकल्प से लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
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भक्त प्रह्लाद और नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अत्याचार और अहंकार का अंत निश्चित होता है, जबकि सच्ची भक्ति सदैव विजयी रहती है। हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बीच प्रह्लाद की अटूट आस्था भगवान को नरसिंह रूप में प्रकट होने के लिए प्रेरित करती है। यह प्रसंग भक्ति की शक्ति को स्पष्ट करता है।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य से भूल होना स्वाभाविक है, लेकिन आत्मचिंतन और सुधार आवश्यक है। कथा श्रवण के लिए श्रद्धा और जिज्ञासा का होना जरूरी बताया। इस मौके पर ओम प्रकाश तिवारी, कमलेश तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, जय प्रकाश, लालूद्ध, प्रेम तिवारी, परमानंद तिवारी, संदीप तिवारी, मयंक तिवारी आदि मौजूद रहें।
