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Amethi News: 15 हजार घूस लेते नलकूप विभाग का वरिष्ठ सहायक गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 20 Feb 2026 12:25 AM IST
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अमेठी सिटी। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) अयोध्या की टीम ने बृहस्पतिवार को गौरीगंज स्थित नलकूप विभाग कार्यालय में वरिष्ठ सहायक एहसान अहमद को 15 हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई सुल्तानपुर मार्ग पर चंदीचरन का पुरवा के पास किराये के भवन में संचालित कार्यालय में हुई। टीम आरोपी को मुंशीगंज थाने ले गई, जहां एसीबी के प्रभारी निरीक्षक हरिओम ने एफआईआर दर्ज कराई।
पीपरपुर निवासी नलकूप विभाग के चालक बृजेश सिंह 21 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवाकाल से जुड़े देयकों के भुगतान के लिए उन्हें कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले वरिष्ठ सहायक एहसान अहमद ने 15 हजार रुपये की मांग की। बृजेश सिंह ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की। प्रारंभिक जांच के बाद डीएम से अनुमति लेकर जाल बिछाया गया। दो विभागों के कर्मचारियों को स्वतंत्र गवाह बनाया गया और टीम सादी वर्दी में परिसर में तैनात रही।
एसीबी टीम के इशारे पर बृजेश ने एहसान अहमद को 15 हजार रुपये दिए। रुपये लेते ही टीम ने उसे पकड़ लिया। बताया गया कि पकड़े जाने पर उसने रकम फेंकने का प्रयास किया, मगर टीम ने मौके से राशि बरामद कर ली। तलाशी और कागजी कार्रवाई के बाद आरोपी को मुंशीगंज थाने लाया गया।
पूछताछ पूरी होने के बाद उसे टीम अपने साथ अयोध्या ले गई। शुक्रवार को न्यायालय में पेशी होनी है। कार्रवाई के दौरान कार्यालय में अफरातफरी का माहौल रहा। अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक टिप्पणी से परहेज किया। इंस्पेक्टर शिवाकांत त्रिपाठी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद टीम एहसान अहमद को अपने साथ ले गई है।
वर्ष 2011 से जिले में तैनात था वरिष्ठ सहायक
मूलरूप से सुल्तानपुर के कोतवाली नगर क्षेत्र के डिहवा गांव निवासी एहसान अहमद वर्ष 2011 से जिले में तैनात था। विभागीय सूत्रों के अनुसार उस पर पहले भी भुगतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को परेशान करने के आरोप लगते रहे हैं। बताया गया कि नौ और 11 फरवरी को सेवानिवृत्त चालक बृजेश सिंह ने वरिष्ठ सहायक से मिलकर देयक भुगतान का अनुरोध किया था। आरोप है कि बिना धनराशि दिए काम आगे न बढ़ाने की बात कही गई। इसके बाद बृजेश ने एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के उपरांत बृहस्पतिवार को टीम ने कार्रवाई की।
नौ दिन में दूसरी बड़ी कार्रवाई
नौ फरवरी को एंटी करप्शन ब्यूरो ने इन्हौंना थाने में तैनात उपनिरीक्षक राजेश पाल को 15 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किया था। उस प्रकरण में सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले में वादी के पक्ष में रिपोर्ट लगाने के एवज में रकम मांगने का आरोप था। बावजूद इसके घूसखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। दरोगा ने थाने की बगल की दुकान पर घूस ली थी, लेकिन एहसान अहमद ने तो सेवानिवृत्त कर्मी को कार्यालय में ही बुला लिया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रिश्वतखोरों को विभागीय अफसरों का भय नहीं है।
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पीपरपुर निवासी नलकूप विभाग के चालक बृजेश सिंह 21 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवाकाल से जुड़े देयकों के भुगतान के लिए उन्हें कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले वरिष्ठ सहायक एहसान अहमद ने 15 हजार रुपये की मांग की। बृजेश सिंह ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की। प्रारंभिक जांच के बाद डीएम से अनुमति लेकर जाल बिछाया गया। दो विभागों के कर्मचारियों को स्वतंत्र गवाह बनाया गया और टीम सादी वर्दी में परिसर में तैनात रही।
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एसीबी टीम के इशारे पर बृजेश ने एहसान अहमद को 15 हजार रुपये दिए। रुपये लेते ही टीम ने उसे पकड़ लिया। बताया गया कि पकड़े जाने पर उसने रकम फेंकने का प्रयास किया, मगर टीम ने मौके से राशि बरामद कर ली। तलाशी और कागजी कार्रवाई के बाद आरोपी को मुंशीगंज थाने लाया गया।
पूछताछ पूरी होने के बाद उसे टीम अपने साथ अयोध्या ले गई। शुक्रवार को न्यायालय में पेशी होनी है। कार्रवाई के दौरान कार्यालय में अफरातफरी का माहौल रहा। अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक टिप्पणी से परहेज किया। इंस्पेक्टर शिवाकांत त्रिपाठी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद टीम एहसान अहमद को अपने साथ ले गई है।
वर्ष 2011 से जिले में तैनात था वरिष्ठ सहायक
मूलरूप से सुल्तानपुर के कोतवाली नगर क्षेत्र के डिहवा गांव निवासी एहसान अहमद वर्ष 2011 से जिले में तैनात था। विभागीय सूत्रों के अनुसार उस पर पहले भी भुगतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को परेशान करने के आरोप लगते रहे हैं। बताया गया कि नौ और 11 फरवरी को सेवानिवृत्त चालक बृजेश सिंह ने वरिष्ठ सहायक से मिलकर देयक भुगतान का अनुरोध किया था। आरोप है कि बिना धनराशि दिए काम आगे न बढ़ाने की बात कही गई। इसके बाद बृजेश ने एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के उपरांत बृहस्पतिवार को टीम ने कार्रवाई की।
नौ दिन में दूसरी बड़ी कार्रवाई
नौ फरवरी को एंटी करप्शन ब्यूरो ने इन्हौंना थाने में तैनात उपनिरीक्षक राजेश पाल को 15 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किया था। उस प्रकरण में सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले में वादी के पक्ष में रिपोर्ट लगाने के एवज में रकम मांगने का आरोप था। बावजूद इसके घूसखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। दरोगा ने थाने की बगल की दुकान पर घूस ली थी, लेकिन एहसान अहमद ने तो सेवानिवृत्त कर्मी को कार्यालय में ही बुला लिया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रिश्वतखोरों को विभागीय अफसरों का भय नहीं है।
