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Amethi News: पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 29 Apr 2026 12:17 AM IST
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गौरीगंज स्थित डाक बंगले में विधायक राकेश प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपते प्रधान। स्रोत: संगठन
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अमेठी सिटी। पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति के करीब आते ही ग्राम प्रधानों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी के नेतृत्व में तमाम प्रधान कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने डाक बंगले में विधायक राकेश प्रताप सिंह को भी ज्ञापन देकर कार्यकाल बढ़ाने की मांग रखी।
ज्ञापन में प्रधानों ने कहा कि मौजूदा हालात में पंचायत चुनाव समय पर कराना संभव नहीं दिख रहा है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण अधूरा है, पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन लंबित है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में चुनाव कराने पर प्रशासनिक व कानूनी अड़चनें सामने आ सकती हैं। प्रधानों ने चेताया कि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो पंचायतों के संचालन में बाधा आएगी और विकास कार्य प्रभावित होंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहीं योजनाएं अधर में लटक सकती हैं, जिससे आम जनता को नुकसान उठाना पड़ेगा। प्रशासक व्यवस्था को लेकर भी प्रधानों ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि पूर्व में प्रशासक नियुक्ति के दौरान पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठे थे और कई स्थानों पर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। प्रधानों ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि ही जनता की जरूरतों को बेहतर समझते हैं और उनके प्रति जवाबदेह रहते हैं, जिससे विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहती है।
अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में वहां निर्वाचित प्रतिनिधियों से ही काम लिया गया। प्रधान संघ ने पंचायतों का कार्यकाल कम से कम एक वर्ष बढ़ाने की मांग दोहराई। इस दौरान ललित सिंह, तीरथ मिश्रा आदि प्रधान मौजूद रहे।
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ज्ञापन में प्रधानों ने कहा कि मौजूदा हालात में पंचायत चुनाव समय पर कराना संभव नहीं दिख रहा है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण अधूरा है, पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन लंबित है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में चुनाव कराने पर प्रशासनिक व कानूनी अड़चनें सामने आ सकती हैं। प्रधानों ने चेताया कि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो पंचायतों के संचालन में बाधा आएगी और विकास कार्य प्रभावित होंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहीं योजनाएं अधर में लटक सकती हैं, जिससे आम जनता को नुकसान उठाना पड़ेगा। प्रशासक व्यवस्था को लेकर भी प्रधानों ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि पूर्व में प्रशासक नियुक्ति के दौरान पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठे थे और कई स्थानों पर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। प्रधानों ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि ही जनता की जरूरतों को बेहतर समझते हैं और उनके प्रति जवाबदेह रहते हैं, जिससे विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहती है।
अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में वहां निर्वाचित प्रतिनिधियों से ही काम लिया गया। प्रधान संघ ने पंचायतों का कार्यकाल कम से कम एक वर्ष बढ़ाने की मांग दोहराई। इस दौरान ललित सिंह, तीरथ मिश्रा आदि प्रधान मौजूद रहे।
