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Amethi News: सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:31 AM IST
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आईटीआई गौरीगंज में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला के दौरान विद्यार्थियों
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अमेठी सिटी। राजकीय आईटीआई गौरीगंज में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रभारी निरीक्षक गौरीगंज अखिलेश वर्मा ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य विवेक वर्मा, प्राचार्य तिलोई संजय कुमार, आरसेटी निदेशक पूजा लाल आदि मौजूद रहे।
साइबर सुरक्षा के लिए बरतें ये सावधानियां
किसी के साथ ओटीपी, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
अनजान लिंक, ई-मेल और मैसेज पर क्लिक करने से बचें।
सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सार्वजनिक न करें।
मोबाइल और कंप्यूटर में नियमित रूप से सुरक्षा अपडेट करें।
ऑनलाइन लेनदेन के लिए केवल विश्वसनीय वेबसाइट और एप का उपयोग करें।
साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत करें।
सवाल-जवाब
सवाल : यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर फोन पर ओटीपी या खाते की जानकारी मांगे तो क्या करना चाहिए। अंशिका
उत्तर : किसी भी स्थिति में ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
सवाल : साइबर ठगी के शिकार होने पर शिकायत कहां करें। नेहा मौर्य
उत्तर : तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
सवाल : डिजिटल अरेस्ट क्या होता है। दिव्यांशी
उत्तर : यह ठगों द्वारा सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराने और पैसे ऐंठने का तरीका है।
सवाल : सोशल मीडिया अकाउंट को सुरक्षित कैसे रखा जाए। पूजा वर्मा
उत्तर : मजबूत पासवर्ड रखें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
सवाल : फर्जी लिंक की पहचान कैसे करें। चित्रांशी
उत्तर : संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और वेबसाइट का पता जांच लें।
सवाल : साइबर अपराध से बचने का सबसे आसान उपाय क्या है। आरती विश्वकर्मा
उत्तर : किसी भी सूचना या ऑफर की पहले पुष्टि करें, फिर उस पर भरोसा करें।
साइबर सुरक्षा के लिए बरतें ये सावधानियां
किसी के साथ ओटीपी, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
अनजान लिंक, ई-मेल और मैसेज पर क्लिक करने से बचें।
सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सार्वजनिक न करें।
मोबाइल और कंप्यूटर में नियमित रूप से सुरक्षा अपडेट करें।
ऑनलाइन लेनदेन के लिए केवल विश्वसनीय वेबसाइट और एप का उपयोग करें।
साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत करें।
सवाल-जवाब
सवाल : यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर फोन पर ओटीपी या खाते की जानकारी मांगे तो क्या करना चाहिए। अंशिका
उत्तर : किसी भी स्थिति में ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
सवाल : साइबर ठगी के शिकार होने पर शिकायत कहां करें। नेहा मौर्य
उत्तर : तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
सवाल : डिजिटल अरेस्ट क्या होता है। दिव्यांशी
उत्तर : यह ठगों द्वारा सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराने और पैसे ऐंठने का तरीका है।
सवाल : सोशल मीडिया अकाउंट को सुरक्षित कैसे रखा जाए। पूजा वर्मा
उत्तर : मजबूत पासवर्ड रखें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
सवाल : फर्जी लिंक की पहचान कैसे करें। चित्रांशी
उत्तर : संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और वेबसाइट का पता जांच लें।
सवाल : साइबर अपराध से बचने का सबसे आसान उपाय क्या है। आरती विश्वकर्मा
उत्तर : किसी भी सूचना या ऑफर की पहले पुष्टि करें, फिर उस पर भरोसा करें।