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Amethi News: एक-दूसरे को सशक्त बनाएं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 19 Apr 2026 01:01 AM IST
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गौरीगंज स्थित बीएसए कार्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान म
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अमेठी सिटी। बेसिक शिक्षा कार्यालय सभागार में शनिवार को आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। वक्ताओं ने कहा कि आपसी ईर्ष्या छोड़कर एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की सोच अपनानी होगी, तभी समाज मजबूत बनेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं अमिता मिश्रा ने कहा कि नारी सम्मान से ही परिवार और समाज में सकारात्मक वातावरण बनता है। बच्चों में अच्छे संस्कार देना सबसे अहम जिम्मेदारी है। शालिनी सिंह ने बताया कि आज भी कई जगह महिलाओं के साथ भेदभाव दिखता है, इसलिए बेटा और बेटी दोनों को समान शिक्षा और अवसर मिलना जरूरी है।
अंजली उपाध्याय ने कहा कि बराबरी की बात तो होती है, मगर व्यवहार में महिलाओं पर जिम्मेदारियों का बोझ अधिक रहता है। घर और नौकरी दोनों का संतुलन महिलाएं ही संभालती हैं। प्रिया ने बेटा-बेटी को लेकर समाज की सोच बदलने की जरूरत बताई।
प्रतिभा गुप्ता ने कहा कि नई पीढ़ी की महिलाओं को पुरानी परंपराओं से आगे बढ़कर बच्चों को समान शिक्षा देनी चाहिए। ऋतु यादव ने सोच में बदलाव को जरूरी बताया। अंकिता श्रीवास्तव ने कहा कि नौकरी के बाद घर की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर ही आ जाती है, इसमें पुरुषों की भागीदारी बढ़नी चाहिए।
पल्लवी ओझा ने विद्यालय स्तर से ही सम्मानजनक व्यवहार सिखाने पर जोर दिया। मीना ने विभिन्न ड्यूटी में महिलाओं को राहत देने की बात कही। गरिमा यादव ने कहा कि महिलाओं को एक-दूसरे का सहयोग कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करना चाहिए। अर्चना सिंह ने कहा कि पहले स्वयं में बदलाव लाना जरूरी है, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
कार्यक्रम में कई शिक्षिकाओं ने प्रशिक्षण और ड्यूटी से जुड़ी समस्याएं भी रखीं। बीईओ अर्जुन सिंह ने सभी मुद्दों को सुनकर समाधान का भरोसा दिया। कार्यक्रम में लता शर्मा, नीलू वर्मा, वंदना, पूर्णिमा तिवारी, संगीता, दीप्ति, रोली, पूजा सहित 40 महिलाएं मौजूद रहीं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं अमिता मिश्रा ने कहा कि नारी सम्मान से ही परिवार और समाज में सकारात्मक वातावरण बनता है। बच्चों में अच्छे संस्कार देना सबसे अहम जिम्मेदारी है। शालिनी सिंह ने बताया कि आज भी कई जगह महिलाओं के साथ भेदभाव दिखता है, इसलिए बेटा और बेटी दोनों को समान शिक्षा और अवसर मिलना जरूरी है।
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अंजली उपाध्याय ने कहा कि बराबरी की बात तो होती है, मगर व्यवहार में महिलाओं पर जिम्मेदारियों का बोझ अधिक रहता है। घर और नौकरी दोनों का संतुलन महिलाएं ही संभालती हैं। प्रिया ने बेटा-बेटी को लेकर समाज की सोच बदलने की जरूरत बताई।
प्रतिभा गुप्ता ने कहा कि नई पीढ़ी की महिलाओं को पुरानी परंपराओं से आगे बढ़कर बच्चों को समान शिक्षा देनी चाहिए। ऋतु यादव ने सोच में बदलाव को जरूरी बताया। अंकिता श्रीवास्तव ने कहा कि नौकरी के बाद घर की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर ही आ जाती है, इसमें पुरुषों की भागीदारी बढ़नी चाहिए।
पल्लवी ओझा ने विद्यालय स्तर से ही सम्मानजनक व्यवहार सिखाने पर जोर दिया। मीना ने विभिन्न ड्यूटी में महिलाओं को राहत देने की बात कही। गरिमा यादव ने कहा कि महिलाओं को एक-दूसरे का सहयोग कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करना चाहिए। अर्चना सिंह ने कहा कि पहले स्वयं में बदलाव लाना जरूरी है, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
कार्यक्रम में कई शिक्षिकाओं ने प्रशिक्षण और ड्यूटी से जुड़ी समस्याएं भी रखीं। बीईओ अर्जुन सिंह ने सभी मुद्दों को सुनकर समाधान का भरोसा दिया। कार्यक्रम में लता शर्मा, नीलू वर्मा, वंदना, पूर्णिमा तिवारी, संगीता, दीप्ति, रोली, पूजा सहित 40 महिलाएं मौजूद रहीं।

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