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Amroha News: खादर क्षेत्र में खेतों में घुसा बाढ़ का पानी... सहमे लोग
Thu, 09 Jul 2026 02:33 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 09 Jul 2026 02:33 AM IST
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अमरोहा। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के खतरे की जद में आ गए हैं। कई स्थानों पर नदी का पानी खेतों में पहुंच चुका है। फसलें खराब होने के डर से लोग सहमे हुए हैं। प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य, राजस्व और राहत विभागों को अलर्ट मोड पर रखा है।
संभावित बाढ़ के साथ संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर के निर्देश पर प्रभावित क्षेत्रों के लिए 13 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों को गांव-गांव जाकर लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी, बीमारों का उपचार और जरूरत पड़ने पर तत्काल दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी घर-घर सर्वे करने, बुखार, खांसी, जुकाम, दस्त या अन्य संक्रमण के लक्षण मिलने पर तुरंत सूचना देने और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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11 बाढ़ चौकियां चौबीसों घंटे कर रहीं निगरानी
प्रशासन ने हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र में 11 अस्थायी बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी हैं। इन चौकियों पर तीन-तीन शिफ्टों में कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो चौबीसों घंटे जलस्तर और ग्रामीणों की सुरक्षा पर नजर रख रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें और राजस्व कर्मी भी इन चौकियों पर मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
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पिछले सालों की बाढ़ अभी भी लोगों के जेहन में
गंगा किनारे बसे ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्षों आई बाढ़ की भयावह तस्वीरें अभी भी उनकी यादों में ताजा हैं। उस समय कई गांवों में पानी भर गया था और लोगों को अपने परिवारों के साथ-साथ मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा था। इसी कारण इस बार गंगा का बढ़ता जलस्तर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। ग्रामीण लगातार प्रशासन से तटबंधों की निगरानी और समय रहते राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
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खादर क्षेत्र में बढ़ी चिंता, अधूरा तटबंध बना परेशानी
मंडी धनौरा। लगातार हो रही बारिश ने खादर क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ा दी है। पपसरी खादर, देवीपुरा, सीपिया फार्म, मुकारमपुर, रसूलपुर भांवर, रमपुरा खादर, शाहजहांपुर, पहाड़पुर, दांडी, इब्राहीमपुर, चांदरा फार्म, शेरपुर, जैथल, शीशोवाली, ढाकोवाली और विशावली सहित कई गांवों के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं।
बुधवार को गंगा का पानी मुकारमपुर और नाववाला के बीच में पहुंच गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष गंगा का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले खादर क्षेत्र प्रभावित होता है। हालांकि अभी पानी आबादी से दूर है, लेकिन खेतों तक पहुंचने लगा है। यदि बैराज से और पानी छोड़ा गया तो हालात गंभीर हो सकते हैं। किसानों का कहना है कि तटबंध निर्माण का कार्य अब भी अधूरा पड़ा है। कई बार मांग करने के बावजूद इसे पूरा नहीं कराया गया, जिससे लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले वर्ष बाढ़ से धान, गन्ना, चारा और अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। इस बार भी यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसलों पर खतरा मंडराने लगा है।
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गंगानगर में खेतों तक पहुंचा पानी, किसान परेशान
हसनपुर। गंगा का बढ़ता जलस्तर गंगानगर गांव के किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। नदी का पानी खेतों में घुसने से सैकड़ों बीघा फसल और पशुओं के चारे पर संकट खड़ा हो गया है। खेतों में जलभराव होने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी है। ग्रामीण पंकज कुमार ने बताया कि गंगा किनारे स्थित कई खेतों में पानी भर चुका है। इससे हरे चारे की फसल प्रभावित हुई है और पशुओं के लिए चारा लाना मुश्किल हो गया है। यदि अगले कुछ दिनों तक जलस्तर बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बड़ी उम्मीदों के साथ खरीफ की फसल तैयार की थी, लेकिन अब बाढ़ का खतरा उनकी मेहनत पर पानी फेरता नजर आ रहा है। पशुपालकों के सामने भी चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।
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बाढ़ को लेकर पूरी तरह सतर्कता बरती जा रही है। बाढ़ चौकियाें पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई है। रात दिन निगरानी की जा रही है, ग्रामीणों से संपर्क किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।- डॉ. नितिन गौड़, डीएम अमरोहा
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संभावित बाढ़ के साथ संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर के निर्देश पर प्रभावित क्षेत्रों के लिए 13 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों को गांव-गांव जाकर लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी, बीमारों का उपचार और जरूरत पड़ने पर तत्काल दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी घर-घर सर्वे करने, बुखार, खांसी, जुकाम, दस्त या अन्य संक्रमण के लक्षण मिलने पर तुरंत सूचना देने और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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11 बाढ़ चौकियां चौबीसों घंटे कर रहीं निगरानी
प्रशासन ने हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र में 11 अस्थायी बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी हैं। इन चौकियों पर तीन-तीन शिफ्टों में कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो चौबीसों घंटे जलस्तर और ग्रामीणों की सुरक्षा पर नजर रख रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें और राजस्व कर्मी भी इन चौकियों पर मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
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पिछले सालों की बाढ़ अभी भी लोगों के जेहन में
गंगा किनारे बसे ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्षों आई बाढ़ की भयावह तस्वीरें अभी भी उनकी यादों में ताजा हैं। उस समय कई गांवों में पानी भर गया था और लोगों को अपने परिवारों के साथ-साथ मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा था। इसी कारण इस बार गंगा का बढ़ता जलस्तर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। ग्रामीण लगातार प्रशासन से तटबंधों की निगरानी और समय रहते राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
खादर क्षेत्र में बढ़ी चिंता, अधूरा तटबंध बना परेशानी
मंडी धनौरा। लगातार हो रही बारिश ने खादर क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ा दी है। पपसरी खादर, देवीपुरा, सीपिया फार्म, मुकारमपुर, रसूलपुर भांवर, रमपुरा खादर, शाहजहांपुर, पहाड़पुर, दांडी, इब्राहीमपुर, चांदरा फार्म, शेरपुर, जैथल, शीशोवाली, ढाकोवाली और विशावली सहित कई गांवों के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं।
बुधवार को गंगा का पानी मुकारमपुर और नाववाला के बीच में पहुंच गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष गंगा का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले खादर क्षेत्र प्रभावित होता है। हालांकि अभी पानी आबादी से दूर है, लेकिन खेतों तक पहुंचने लगा है। यदि बैराज से और पानी छोड़ा गया तो हालात गंभीर हो सकते हैं। किसानों का कहना है कि तटबंध निर्माण का कार्य अब भी अधूरा पड़ा है। कई बार मांग करने के बावजूद इसे पूरा नहीं कराया गया, जिससे लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले वर्ष बाढ़ से धान, गन्ना, चारा और अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। इस बार भी यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसलों पर खतरा मंडराने लगा है।
गंगानगर में खेतों तक पहुंचा पानी, किसान परेशान
हसनपुर। गंगा का बढ़ता जलस्तर गंगानगर गांव के किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। नदी का पानी खेतों में घुसने से सैकड़ों बीघा फसल और पशुओं के चारे पर संकट खड़ा हो गया है। खेतों में जलभराव होने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी है। ग्रामीण पंकज कुमार ने बताया कि गंगा किनारे स्थित कई खेतों में पानी भर चुका है। इससे हरे चारे की फसल प्रभावित हुई है और पशुओं के लिए चारा लाना मुश्किल हो गया है। यदि अगले कुछ दिनों तक जलस्तर बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बड़ी उम्मीदों के साथ खरीफ की फसल तैयार की थी, लेकिन अब बाढ़ का खतरा उनकी मेहनत पर पानी फेरता नजर आ रहा है। पशुपालकों के सामने भी चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।
बाढ़ को लेकर पूरी तरह सतर्कता बरती जा रही है। बाढ़ चौकियाें पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई है। रात दिन निगरानी की जा रही है, ग्रामीणों से संपर्क किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।- डॉ. नितिन गौड़, डीएम अमरोहा