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Amroha News: 498 फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच में गूगल से मांगा आईपी एड्रेस
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अमरोहा। जोया ब्लॉक की तोफापुर ग्राम पंचायत की जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने वाली आईडी हैक कर 498 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। संभल, बलिया, प्रतापगढ़ और बुलंदशहर समेत कई जिलों के लोगों से संपर्क किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने प्रमाणपत्रों में दर्ज संबंधित व्यक्तियों के गांव में होने से इन्कार कर दिया। अब पुलिस ने आईडी के इस्तेमाल की जगह और डिवाइस का पता लगाने के लिए गूगल इंडिया से आईपी एड्रेस की जानकारी मांगी है।
विवेचक राशिद अख्तर ने बताया कि शनिवार को पंचायत सचिव अमरजीत सिंह और सहायक विकास अधिकारी पंचायत के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद यूपी पुलिस के सी प्लान एप से संपर्क नंबर निकालकर संबंधित गांवों के लोगों से बातचीत की गई। ग्रामीणों के इन्कार के बाद प्रमाणपत्रों में दर्ज विवरण की सत्यता पर सवाल उठे हैं। पुलिस को आशंका है कि प्रमाणपत्र सुनियोजित तरीके से तैयार किए गए। अब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आईडी के इस्तेमाल की जगह और डिवाइस का पता लगाया जा रहा है।
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11 जिलों समेत 19 राज्यों के लोगों के बने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, सिद्धार्थनगर, चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर, बलिया, प्रतापगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, शाहजहांपुर और जौनपुर समेत 11 जिलों के लोगों के नाम पर प्रमाणपत्र जारी होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, असम, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड, चंडीगढ़ और सिक्किम समेत अन्य राज्यों के लोगों के नाम भी प्रमाणपत्रों में दर्ज हैं।
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ये है पूरा मामला
तोफापुर ग्राम पंचायत के सचिव अमरजीत सिंह अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), ग्रामीण के रूप में भी नामित हैं। जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाली आईडी उन्हीं के जिम्मे है। सचिव का दावा है, उनकी आईडी करीब एक सप्ताह से निष्क्रिय थी और उन्होंने सीएमओ कार्यालय में इसकी शिकायत भी की थी। 12 अक्तूबर को आईडी सक्रिय हुई। 14 अक्तूबर को आईडी खोलने पर पता चला कि छह और सात अक्तूबर को 498 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। शुक्रवार देर रात जोया ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारी राजवीर सिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। अब पुलिस तकनीकी साक्ष्य जुटाने के साथ ही यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी प्रमाणपत्र किसने और किस उद्देश्य से जारी किए गए।
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प्रकरण की जांच चल रही है। इस संबंध में पत्राचार कर गूगल इंडिया और पुलिस मुख्यालय लखनऊ के माध्यम से कुछ जानकारियां मांगी गई हैं। आईडी का इस्तेमाल कहां से और किस नेटवर्किंग डिवाइस के जरिए किया गया, इसका भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
— लखन सिंह यादव, एसपी अमरोहा
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विवेचक राशिद अख्तर ने बताया कि शनिवार को पंचायत सचिव अमरजीत सिंह और सहायक विकास अधिकारी पंचायत के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद यूपी पुलिस के सी प्लान एप से संपर्क नंबर निकालकर संबंधित गांवों के लोगों से बातचीत की गई। ग्रामीणों के इन्कार के बाद प्रमाणपत्रों में दर्ज विवरण की सत्यता पर सवाल उठे हैं। पुलिस को आशंका है कि प्रमाणपत्र सुनियोजित तरीके से तैयार किए गए। अब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आईडी के इस्तेमाल की जगह और डिवाइस का पता लगाया जा रहा है।
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11 जिलों समेत 19 राज्यों के लोगों के बने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, सिद्धार्थनगर, चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर, बलिया, प्रतापगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, शाहजहांपुर और जौनपुर समेत 11 जिलों के लोगों के नाम पर प्रमाणपत्र जारी होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, असम, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड, चंडीगढ़ और सिक्किम समेत अन्य राज्यों के लोगों के नाम भी प्रमाणपत्रों में दर्ज हैं।
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ये है पूरा मामला
तोफापुर ग्राम पंचायत के सचिव अमरजीत सिंह अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), ग्रामीण के रूप में भी नामित हैं। जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाली आईडी उन्हीं के जिम्मे है। सचिव का दावा है, उनकी आईडी करीब एक सप्ताह से निष्क्रिय थी और उन्होंने सीएमओ कार्यालय में इसकी शिकायत भी की थी। 12 अक्तूबर को आईडी सक्रिय हुई। 14 अक्तूबर को आईडी खोलने पर पता चला कि छह और सात अक्तूबर को 498 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। शुक्रवार देर रात जोया ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारी राजवीर सिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। अब पुलिस तकनीकी साक्ष्य जुटाने के साथ ही यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी प्रमाणपत्र किसने और किस उद्देश्य से जारी किए गए।
प्रकरण की जांच चल रही है। इस संबंध में पत्राचार कर गूगल इंडिया और पुलिस मुख्यालय लखनऊ के माध्यम से कुछ जानकारियां मांगी गई हैं। आईडी का इस्तेमाल कहां से और किस नेटवर्किंग डिवाइस के जरिए किया गया, इसका भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
— लखन सिंह यादव, एसपी अमरोहा