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Amroha News: कहने को शहरी पर सुविधाएं गांवों से भी बदतर
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अमरोहा। जिले भर के कांशीराम आवास में रहने वाले लोग सालों से नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। कॉलोनियों की इमारतें जर्जर होने लगी हैं। जिन कमरों में लोग रह रहे हैं, वहां की दीवारों से प्लास्टर उखड़कर या टूटकर गिर रहे हैं। कॉलोनी में पानी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। अधिकांश सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं तो कुछ बदबूदार पानी उगल रहे हैं।
कॉलोनी के रास्तों पर गंदगी के अंबार हैं। पार्कों में खड़ी झाड़ियों के देखकर लगता है जैसे जंगल हो। यह काॅलोनियां भले ही शहरी हिस्सा हैं, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के हालात ग्रामीणों से भी बदतर है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से बसपा सरकार में यह कॉलोनियां बनवाई गई थी।
आवंटन के बाद लोग यहां बस गए। जब तक बसपा सरकार रहीं कॉलोनियों की देखभाल और व्यवस्था विभागों की प्राथमिकता में रही। लेकिन सरकार बदलते ही वह इनकी ओर जैसे देखना ही भूल गए। लोगों का यही कहना है कि जाएं तो जाएं कहां। नालियां चोक हैं, कूड़े के ढेर लगे रहते हैं और जलभराव से दुर्गंध और बीमारियाँ फैल रही हैं। इमारतों का प्लास्टर टूट रहा है, रंगाई-पुताई नहीं हुई है, जिससे इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। अमरोहा कांशीराम कॉलोनी में कुल 18 हैंडपंप हैं, इनमें से 12 खराब हैं। छह हैंडपंपों के सहारे करीब एक हजार लोग हैं। इनमें से भी दो हैंडपंप बदबूदार पानी उगल रहे हैं।
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कॉलोनी के रास्तों पर गंदगी के अंबार हैं। पार्कों में खड़ी झाड़ियों के देखकर लगता है जैसे जंगल हो। यह काॅलोनियां भले ही शहरी हिस्सा हैं, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के हालात ग्रामीणों से भी बदतर है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से बसपा सरकार में यह कॉलोनियां बनवाई गई थी।
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आवंटन के बाद लोग यहां बस गए। जब तक बसपा सरकार रहीं कॉलोनियों की देखभाल और व्यवस्था विभागों की प्राथमिकता में रही। लेकिन सरकार बदलते ही वह इनकी ओर जैसे देखना ही भूल गए। लोगों का यही कहना है कि जाएं तो जाएं कहां। नालियां चोक हैं, कूड़े के ढेर लगे रहते हैं और जलभराव से दुर्गंध और बीमारियाँ फैल रही हैं। इमारतों का प्लास्टर टूट रहा है, रंगाई-पुताई नहीं हुई है, जिससे इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। अमरोहा कांशीराम कॉलोनी में कुल 18 हैंडपंप हैं, इनमें से 12 खराब हैं। छह हैंडपंपों के सहारे करीब एक हजार लोग हैं। इनमें से भी दो हैंडपंप बदबूदार पानी उगल रहे हैं।