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Amroha News: पैंटून पुल जुड़ेगी गढ़-तिगरी मेले की सांस्कृतिक विरासत
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अमरोहा। तिगरी-गढ़ मेले की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के बीच पैंटून पुल बनाने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। सोमवार को डीएम अमरोहा डॉ. नितिन गौड़ और हापुड़ की डीएम कविता मीणा ने संयुक्त रूप से तिगरी में बैठक कर मेले की तैयारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान दोनों जिलों के बीच बेहतर समन्वय, मेले के संयुक्त आयोजन और श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
तिगरी-गढ़ मेला कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर करीब 15 दिनों तक चलता है। इसमें हर वर्ष करीब 35 से 40 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी को देखते हुए तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के बीच पैंटून पुल की तकनीकी व्यवहार्यता को लेकर अधीक्षण अभियंता सिंचाई मेरठ, लोक निर्माण विभाग मेरठ और मुरादाबाद समेत संबंधित तकनीकी अधिकारियों के साथ मंथन किया गया।
डीएम डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि तिगरी की ओर एंकरिंग प्वाइंट उपलब्ध हैं, जबकि गढ़मुक्तेश्वर की ओर इसकी संभावना तलाशनी होगी। तकनीकी टीम को पुल की संभावना का विस्तृत अध्ययन कर सेफ्टी रिपोर्ट और एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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डीएम ने कहा कि श्रद्धालुओं की मांग को पूरा करने के लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास करेगा, लेकिन सुरक्षा और संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। शासन से बजट आवंटित होने के बाद तकनीकी अधिकारियों के अनुसार पैंटून पुल का निर्माण करीब डेढ़ माह में पूरा किया जा सकता है।
बैठक में गंगा की ड्रेजिंग, तटबंध निर्माण, स्थायी घाटों और स्नान स्थलों के विकास पर भी चर्चा हुई। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए शौचालय, चेंजिंग रूम, सुरक्षित स्नान क्षेत्र, पेयजल, विश्राम स्थल और प्रकाश व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। यातायात, पार्किंग, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, विद्युत, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और सौंदर्यीकरण के स्थायी समाधान पर भी मंथन हुआ। बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व गरिमा सिंह, एडीएम हापुड़, एसडीएम धनौरा तथा सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, वन विभाग और जिला पंचायत के अधिकारी मौजूद रहे।
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तिगरी मेले में 7.20 करोड़ से संवरेगा मेला क्षेत्र
अमरोहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध राजकीय तिगरी गंगा मेले की तैयारियों का आगाज हो गया है। 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से मेले का शुभारंभ होगा, जबकि 24 नवंबर की सुबह कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान होगा। मेले की व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन ने 7.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। पिछले वर्ष करीब 36 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई थी। इस बार भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात पर विशेष जोर रहेगा। मेला क्षेत्र सीसीटीवी और ड्रोन की निगरानी में रहेगा। मोबाइल नेटवर्क के लिए एक स्थायी और तीन अस्थायी टावर लगाए जाएंगे। एंबुलेंस, गोताखोर, जनरेटर, ट्रांसफार्मर और पार्किंग की व्यवस्था भी की जाएगी। संवाद
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वर्ष 1945 तक गंगा पर नावों और पीपों के सहारे अस्थायी पुल बनाया जाता
अमरोहा। करीब 80 वर्ष बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के बीच गंगा पर अस्थायी पैंटून पुल बनने की कवायद शुरू हो गई है। पुल बनने से दोनों जिलों के प्रसिद्ध तिगरी और गढ़ गंगा मेले सीधे जुड़ जाएंगे। इससे लाखों श्रद्धालुओं को आवागमन में राहत मिलने के साथ दोनों क्षेत्रों की धार्मिक, पर्यटन, सामाजिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। बताया जाता है कि वर्ष 1945 तक गंगा पर नावों और पीपों के सहारे अस्थायी पुल बनाया जाता था। कार्तिक पूर्णिमा के दौरान श्रद्धालु इसी रास्ते से तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के मेलों में आते-जाते थे। बाद में मेले के दौरान हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद सुरक्षा कारणों से पुल हटा दिया गया था। तब से दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा संपर्क टूट गया। अब गंगा के बीच बने टापुओं को हटाकर धारा को एक करने के बाद पुल बनाने की तैयारी है। इससे तिगरी से गढ़मुक्तेश्वर जाने के लिए लगने वाला लंबा चक्कर खत्म होगा। पुल बनने से 600 से अधिक गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और यात्रा समय व परिवहन लागत कम होगी। संवाद
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तिगरी-गढ़ मेला कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर करीब 15 दिनों तक चलता है। इसमें हर वर्ष करीब 35 से 40 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी को देखते हुए तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के बीच पैंटून पुल की तकनीकी व्यवहार्यता को लेकर अधीक्षण अभियंता सिंचाई मेरठ, लोक निर्माण विभाग मेरठ और मुरादाबाद समेत संबंधित तकनीकी अधिकारियों के साथ मंथन किया गया।
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डीएम डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि तिगरी की ओर एंकरिंग प्वाइंट उपलब्ध हैं, जबकि गढ़मुक्तेश्वर की ओर इसकी संभावना तलाशनी होगी। तकनीकी टीम को पुल की संभावना का विस्तृत अध्ययन कर सेफ्टी रिपोर्ट और एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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डीएम ने कहा कि श्रद्धालुओं की मांग को पूरा करने के लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास करेगा, लेकिन सुरक्षा और संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। शासन से बजट आवंटित होने के बाद तकनीकी अधिकारियों के अनुसार पैंटून पुल का निर्माण करीब डेढ़ माह में पूरा किया जा सकता है।
बैठक में गंगा की ड्रेजिंग, तटबंध निर्माण, स्थायी घाटों और स्नान स्थलों के विकास पर भी चर्चा हुई। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए शौचालय, चेंजिंग रूम, सुरक्षित स्नान क्षेत्र, पेयजल, विश्राम स्थल और प्रकाश व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। यातायात, पार्किंग, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, विद्युत, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और सौंदर्यीकरण के स्थायी समाधान पर भी मंथन हुआ। बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व गरिमा सिंह, एडीएम हापुड़, एसडीएम धनौरा तथा सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, वन विभाग और जिला पंचायत के अधिकारी मौजूद रहे।
तिगरी मेले में 7.20 करोड़ से संवरेगा मेला क्षेत्र
अमरोहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध राजकीय तिगरी गंगा मेले की तैयारियों का आगाज हो गया है। 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से मेले का शुभारंभ होगा, जबकि 24 नवंबर की सुबह कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान होगा। मेले की व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन ने 7.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। पिछले वर्ष करीब 36 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई थी। इस बार भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात पर विशेष जोर रहेगा। मेला क्षेत्र सीसीटीवी और ड्रोन की निगरानी में रहेगा। मोबाइल नेटवर्क के लिए एक स्थायी और तीन अस्थायी टावर लगाए जाएंगे। एंबुलेंस, गोताखोर, जनरेटर, ट्रांसफार्मर और पार्किंग की व्यवस्था भी की जाएगी। संवाद
वर्ष 1945 तक गंगा पर नावों और पीपों के सहारे अस्थायी पुल बनाया जाता
अमरोहा। करीब 80 वर्ष बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के बीच गंगा पर अस्थायी पैंटून पुल बनने की कवायद शुरू हो गई है। पुल बनने से दोनों जिलों के प्रसिद्ध तिगरी और गढ़ गंगा मेले सीधे जुड़ जाएंगे। इससे लाखों श्रद्धालुओं को आवागमन में राहत मिलने के साथ दोनों क्षेत्रों की धार्मिक, पर्यटन, सामाजिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। बताया जाता है कि वर्ष 1945 तक गंगा पर नावों और पीपों के सहारे अस्थायी पुल बनाया जाता था। कार्तिक पूर्णिमा के दौरान श्रद्धालु इसी रास्ते से तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के मेलों में आते-जाते थे। बाद में मेले के दौरान हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद सुरक्षा कारणों से पुल हटा दिया गया था। तब से दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा संपर्क टूट गया। अब गंगा के बीच बने टापुओं को हटाकर धारा को एक करने के बाद पुल बनाने की तैयारी है। इससे तिगरी से गढ़मुक्तेश्वर जाने के लिए लगने वाला लंबा चक्कर खत्म होगा। पुल बनने से 600 से अधिक गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और यात्रा समय व परिवहन लागत कम होगी। संवाद