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Amroha News: मंडी समिति की सफाई के टेंडर पर सवाल, डीएम से जांच की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 14 Jun 2026 01:57 AM IST
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अमरोहा। मंडी समिति परिसर अमरोहा में सफाई कार्य के लिए जारी ऑनलाइन निविदा विवादों में घिर गई है। सभासद यासिर अंसारी एडवोकेट ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर निविदा प्रक्रिया में शासनादेश के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने निविदा को निरस्त कर दोबारा जारी कराने की मांग की है।
सभासद ने कहा कि निविदा में सफाई कर्मियों के लिए निर्धारित मजदूरी दर श्रम विभाग द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से काफी कम रखी गई है। उनके अनुसार निविदा में प्रति श्रमिक प्रतिदिन 295 रुपये मजदूरी निर्धारित की गई है, जबकि शासनादेश के अनुसार न्यूनतम मजदूरी 411.86 रुपये प्रतिदिन होनी चाहिए। उन्होंने इसे श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए गंभीर अनियमितता करार दिया है।
उनका कहना है कि निविदा की शर्तों में स्वयं यह उल्लेख किया गया है कि सफाई कर्मियों को श्रम विभाग की निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा और लेबर एक्ट का पूर्ण पालन किया जाएगा। इसके बावजूद निविदा में निर्धारित मजदूरी दर शासनादेश के अनुरूप नहीं है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप लगाया कि निविदा में कर्मचारियों के लिए देय ईपीएफओ का 13 प्रतिशत अंशदान, ईएसआईसी का 3.25 प्रतिशत अंशदान तथा कार्य करने वाले वेंडर को मिलने वाले सेवा शुल्क को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में निविदा की शर्तें व्यावहारिक और वैधानिक मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं। सभासद ने डीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर निविदा प्रक्रिया को शासनादेश और श्रम कानूनों के अनुरूप कराने की मांग की है।
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सभासद ने कहा कि निविदा में सफाई कर्मियों के लिए निर्धारित मजदूरी दर श्रम विभाग द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से काफी कम रखी गई है। उनके अनुसार निविदा में प्रति श्रमिक प्रतिदिन 295 रुपये मजदूरी निर्धारित की गई है, जबकि शासनादेश के अनुसार न्यूनतम मजदूरी 411.86 रुपये प्रतिदिन होनी चाहिए। उन्होंने इसे श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए गंभीर अनियमितता करार दिया है।
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उनका कहना है कि निविदा की शर्तों में स्वयं यह उल्लेख किया गया है कि सफाई कर्मियों को श्रम विभाग की निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा और लेबर एक्ट का पूर्ण पालन किया जाएगा। इसके बावजूद निविदा में निर्धारित मजदूरी दर शासनादेश के अनुरूप नहीं है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप लगाया कि निविदा में कर्मचारियों के लिए देय ईपीएफओ का 13 प्रतिशत अंशदान, ईएसआईसी का 3.25 प्रतिशत अंशदान तथा कार्य करने वाले वेंडर को मिलने वाले सेवा शुल्क को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में निविदा की शर्तें व्यावहारिक और वैधानिक मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं। सभासद ने डीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर निविदा प्रक्रिया को शासनादेश और श्रम कानूनों के अनुरूप कराने की मांग की है।