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Auraiya News: भट्टी सा तपता टिनशेड, धूप में खौलता नांद का पानी... गोशालाओं में ही गोवंश बेहाल
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फोटो-30-हिनापुर की गोशाला में तेज धूप की बीच टिनशेड में खड़े गोवंश। संवाद
- फोटो : टूंडला के राजा का ताल में जन आक्रोश रैली निकालते भाजपाइ्र संगठन
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औरैया। सड़कों से पकड़कर छुट्टा गोवंशों को गोशालाओं में संरक्षित किया जा रहा है लेकिन ये सहारा उनकी जान पर भारी पड़ रहा है। इन दिनों तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
इतने तापमान में गोशालाओं में टिन शेड के नीचे गोवंशों को रखा गया है। सूरज के तीखे तेवरों से तपते टिन शेड का तापमान खुले आसमान से दो-चार डिग्री ज्यादा ही रहता है। भट्टी जैसे तपते शेड के आसपास न तो तिरपाल लगाए गए और न ही छाया के अन्य कोई इंतजाम किए गए।
इनके नीचे गोवंश झुलस रहे हैं। खुले में बने हौद (टंकी) में भरा पानी भी दोपहर में खौल उठता है जिसे पीना तो दूर छुआ भी नहीं जा सकता। दो दिन पहले डीएम बृजेश कुमार ने सिखरना गोशाला का निरीक्षण किया था, यहां भी उन्हें हालात ठीक नहीं मिले थे। कुदरकोट, बिधूना और रुरुगंज की गोशालाओं में चहारदीवारी के बीच तपती दोपहर में कई जगह गोवंश झुलसते दिख रहे हैं।
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हिनापुर : आठ फीट ऊंचे टिनशेड से बरस रही आग
कुदरकोट। विकास खंड एरवाकटरा के गांव हिनापुर स्थित गोशाला में गोवंशों को गर्मी से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। हाल ये है कि आठ फीट ऊंचे टिनशेड में पूरी दोपहर गोवंश तपिश झेलते रहते हैं। धूप तेज आने पर टिनशेड के भीतर भी बमुश्किल एक मीटर ही जगह बचती है। कमजोर गोवंशों को दूसरे गोवंश अंदर बैठने भी नहीं देते हैं। इससे वे 44 डिग्री तापमान के बीच धूप में ही खड़े होने के लिए मजबूर रहते हैं।
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वसई : एक शेड में 116 गोवंश, अधिकांश धूप में
बिधूना। विकास खंड क्षेत्र के गांव वसई स्थित गोशाला में 116 गोवंश संरक्षित हैं। इनके लिए बस एक छोटा शेड बना है। धूप चढ़ते ही गोवंशों के लिए जान बचाने की जंग शुरू होती है। बलिष्ठ गोवंश कमजोर गोवंशों को टिनशेड से बाहर कर देते हैं। वैसे यह शेड 116 गोवंशों के लिए पर्याप्त भी नहीं है। मंगलवार दोपहर 40 से अधिक गोवंश धूप में बैठे हांफ रहे थे। (संवाद)
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रुरुगंज : तपता सूरज और खाने को सूखा भूसा
रुरुगंज। विकास खंड बिधूना के रुरुगंज स्थित गोशाला में गोवंशों के लिए तपिश के साथ पेट भरने का भी संकट है। एक तरफ गर्मी उन्हें बेहाल कर रही है तो दूसरी तरफ खाने के लिए सूखा भूसा दिया जा रहा है। यहां संरक्षित 92 गोवंश में से अधिकांश कमजोर हैं। बीते वर्ष यहां टिनशेड में पंखे लगे थे जो खराब होने का हवाला देते हुए उतार लिए गए और दोबारा नहीं लग सके। (संवाद)
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डोडापुर : बीमार गोवंशों को देखने ही नहीं पहुंचे चिकित्सक
बिधूना। ग्राम पंचायत डोडापुर में संचालित गोशाला में 43 गोवंश संरक्षित हैं। यहां भी गोवंशों को गर्मी से बचाने के लिए कोई इंतजाम नजर नहीं आए। इतना ही नहीं बीमार दो गोवंश जो कमजोर हैं वह धूप में ही बैठे थे। केयर टेकर शिवा ने बताया कि बीमार गोवंशों के उपचार के लिए तीन दिन से डॉक्टर नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में बदहाली का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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बीडीओ बोले-50 रुपये में गोवंशों के लिए कूलर-एसी लगवा दें
विकास खंड बिधूना के बीडीओ रामदुलार से जब गोशाला में तपते टिनशेड व बदहाली पर बात की गई तो उन्होंने चौंकाने वाला और संवेदनाओं से परे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 50 रुपये में क्या गोवंशों के लिए कूलर और एसी लगवा दें। दूसरी ओर, ग्रामीणों का कहना है कि अगर अफसर ध्यान दें तो गोवंशों की ये बदहाली दूर हो सकती है।
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लू से बचाव के लिए कराएंगे इंतजाम : डीएम
डीएम बृजेश कुमार ने बताया कि अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें कोटेदारों से बोरे एकत्रित कर गोशालाओं में लू से राहत के लिए तीन तरफ से पर्दे लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही गोवंशों को बेहतर उपचार देने और हरे चारे का इंतजाम कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही व्यवस्थाएं बदली नजर आएंगी। शासन की यह प्राथमिकता है इसमें लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई होगी।
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इतने तापमान में गोशालाओं में टिन शेड के नीचे गोवंशों को रखा गया है। सूरज के तीखे तेवरों से तपते टिन शेड का तापमान खुले आसमान से दो-चार डिग्री ज्यादा ही रहता है। भट्टी जैसे तपते शेड के आसपास न तो तिरपाल लगाए गए और न ही छाया के अन्य कोई इंतजाम किए गए।
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इनके नीचे गोवंश झुलस रहे हैं। खुले में बने हौद (टंकी) में भरा पानी भी दोपहर में खौल उठता है जिसे पीना तो दूर छुआ भी नहीं जा सकता। दो दिन पहले डीएम बृजेश कुमार ने सिखरना गोशाला का निरीक्षण किया था, यहां भी उन्हें हालात ठीक नहीं मिले थे। कुदरकोट, बिधूना और रुरुगंज की गोशालाओं में चहारदीवारी के बीच तपती दोपहर में कई जगह गोवंश झुलसते दिख रहे हैं।
हिनापुर : आठ फीट ऊंचे टिनशेड से बरस रही आग
कुदरकोट। विकास खंड एरवाकटरा के गांव हिनापुर स्थित गोशाला में गोवंशों को गर्मी से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। हाल ये है कि आठ फीट ऊंचे टिनशेड में पूरी दोपहर गोवंश तपिश झेलते रहते हैं। धूप तेज आने पर टिनशेड के भीतर भी बमुश्किल एक मीटर ही जगह बचती है। कमजोर गोवंशों को दूसरे गोवंश अंदर बैठने भी नहीं देते हैं। इससे वे 44 डिग्री तापमान के बीच धूप में ही खड़े होने के लिए मजबूर रहते हैं।
वसई : एक शेड में 116 गोवंश, अधिकांश धूप में
बिधूना। विकास खंड क्षेत्र के गांव वसई स्थित गोशाला में 116 गोवंश संरक्षित हैं। इनके लिए बस एक छोटा शेड बना है। धूप चढ़ते ही गोवंशों के लिए जान बचाने की जंग शुरू होती है। बलिष्ठ गोवंश कमजोर गोवंशों को टिनशेड से बाहर कर देते हैं। वैसे यह शेड 116 गोवंशों के लिए पर्याप्त भी नहीं है। मंगलवार दोपहर 40 से अधिक गोवंश धूप में बैठे हांफ रहे थे। (संवाद)
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डोडापुर : बीमार गोवंशों को देखने ही नहीं पहुंचे चिकित्सक
बिधूना। ग्राम पंचायत डोडापुर में संचालित गोशाला में 43 गोवंश संरक्षित हैं। यहां भी गोवंशों को गर्मी से बचाने के लिए कोई इंतजाम नजर नहीं आए। इतना ही नहीं बीमार दो गोवंश जो कमजोर हैं वह धूप में ही बैठे थे। केयर टेकर शिवा ने बताया कि बीमार गोवंशों के उपचार के लिए तीन दिन से डॉक्टर नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में बदहाली का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बीडीओ बोले-50 रुपये में गोवंशों के लिए कूलर-एसी लगवा दें
विकास खंड बिधूना के बीडीओ रामदुलार से जब गोशाला में तपते टिनशेड व बदहाली पर बात की गई तो उन्होंने चौंकाने वाला और संवेदनाओं से परे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 50 रुपये में क्या गोवंशों के लिए कूलर और एसी लगवा दें। दूसरी ओर, ग्रामीणों का कहना है कि अगर अफसर ध्यान दें तो गोवंशों की ये बदहाली दूर हो सकती है।
लू से बचाव के लिए कराएंगे इंतजाम : डीएम
डीएम बृजेश कुमार ने बताया कि अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें कोटेदारों से बोरे एकत्रित कर गोशालाओं में लू से राहत के लिए तीन तरफ से पर्दे लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही गोवंशों को बेहतर उपचार देने और हरे चारे का इंतजाम कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही व्यवस्थाएं बदली नजर आएंगी। शासन की यह प्राथमिकता है इसमें लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई होगी।

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