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Auraiya News: हत्या के आरोप में फंसा युवक साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 30 Apr 2026 12:07 AM IST
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औरैया। शहर के चर्चित अंशुल मिश्रा हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया।
न्यायालय ने जालौन के थाना सिरसाकलां के गांव लोहाई निवासी मुख्य आरोपी राहुल तिवारी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। करीब 15 साल चले मुकदमे में अभियोजन पक्ष उसके खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा।
घटना 27 जुलाई 2011 की सुबह करीब साढ़े तीन बजे की है। वादी देवदत्त मिश्रा के अनुसार, चार नकाबपोश बदमाश घर में घुसे और पूरे परिवार को बंधक बना लिया। लूटपाट के दौरान बदमाशों ने उनकी पुत्रवधू अंशुल मिश्रा (47) की गला दबाकर हत्या कर दी और कीमती सामान लूट ले गए। पुलिस ने इस मामले में जांच के बाद राहुल तिवारी को मुख्य आरोपी बनाते हुए 20 अक्तूबर 2011 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की कहानी तब लड़खड़ा गई जब मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए। जिस कार से आरोपियों के जाने का दावा किया गया था, उसके मालिक सुरेंद्र कुमार और चालक संदीप ने कोर्ट में राहुल तिवारी को पहचानने से इन्कार कर दिया। वहीं, जिस दुकान से हत्या में इस्तेमाल रस्सी खरीदने की बात कही गई थी, उसकी मालकिन सुशीला ने भी कोर्ट में कहा कि अभियुक्त उनकी दुकान पर नहीं आया था। कोर्ट ने पाया कि पुलिस हिरासत में दिया गया इकबालिया बयान और बरामदगी की कड़ियां आपस में जुड़ नहीं पा रहीं।
वहीं, डॉ. धीरेंद्र प्रकाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के शरीर पर 11 गंभीर चोटों के निशान थे और मृत्यु का कारण दम घुटना बताया गया था। हालांकि, पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि ये चोटें अभियुक्त राहुल तिवारी ने ही पहुंचाई थीं। 27 अप्रैल को इस मामले में फैसला सुनाया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष गवाहों और साक्ष्यों को पूरा करने में असफल रहा है। संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय ने राहुल तिवारी को बरी कर दिया। आरोपी जमानत पर था। इस मामले के अन्य पांच आरोपी 2015 में दोषमुक्त किए जा चुके हैं।
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न्यायालय ने जालौन के थाना सिरसाकलां के गांव लोहाई निवासी मुख्य आरोपी राहुल तिवारी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। करीब 15 साल चले मुकदमे में अभियोजन पक्ष उसके खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा।
घटना 27 जुलाई 2011 की सुबह करीब साढ़े तीन बजे की है। वादी देवदत्त मिश्रा के अनुसार, चार नकाबपोश बदमाश घर में घुसे और पूरे परिवार को बंधक बना लिया। लूटपाट के दौरान बदमाशों ने उनकी पुत्रवधू अंशुल मिश्रा (47) की गला दबाकर हत्या कर दी और कीमती सामान लूट ले गए। पुलिस ने इस मामले में जांच के बाद राहुल तिवारी को मुख्य आरोपी बनाते हुए 20 अक्तूबर 2011 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।
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न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की कहानी तब लड़खड़ा गई जब मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए। जिस कार से आरोपियों के जाने का दावा किया गया था, उसके मालिक सुरेंद्र कुमार और चालक संदीप ने कोर्ट में राहुल तिवारी को पहचानने से इन्कार कर दिया। वहीं, जिस दुकान से हत्या में इस्तेमाल रस्सी खरीदने की बात कही गई थी, उसकी मालकिन सुशीला ने भी कोर्ट में कहा कि अभियुक्त उनकी दुकान पर नहीं आया था। कोर्ट ने पाया कि पुलिस हिरासत में दिया गया इकबालिया बयान और बरामदगी की कड़ियां आपस में जुड़ नहीं पा रहीं।
वहीं, डॉ. धीरेंद्र प्रकाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के शरीर पर 11 गंभीर चोटों के निशान थे और मृत्यु का कारण दम घुटना बताया गया था। हालांकि, पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि ये चोटें अभियुक्त राहुल तिवारी ने ही पहुंचाई थीं। 27 अप्रैल को इस मामले में फैसला सुनाया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष गवाहों और साक्ष्यों को पूरा करने में असफल रहा है। संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय ने राहुल तिवारी को बरी कर दिया। आरोपी जमानत पर था। इस मामले के अन्य पांच आरोपी 2015 में दोषमुक्त किए जा चुके हैं।
