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Auraiya News: किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद

संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Thu, 30 Apr 2026 12:08 AM IST
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Life imprisonment for man convicted of raping teenager
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औरैया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी ओमकार जोशी को दोषी करार दिया। दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बाद में उसे इटावा जेल भेज दिया गया।
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बेला थाना क्षेत्र के एक गांव में 13 सितंबर 2019 को 16 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। पीड़िता के परिजन की तहरीर पर पुलिस ने दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की। बाद में पुलिस ने ओमकार जोशी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
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बुधवार को विशेष न्यायाधीश अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया। उसे सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को सहायता के तौर पर दी जाए।
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किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी दोषमुक्त

औरैया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र की अदालत ने किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म के एक मामले में फैसला सुनाया। न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव और मुख्य गवाहों के अपने बयानों से पलट जाने के कारण आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है।



एक गांव निवासी वादी ने थाना अछल्दा में शिकायत करते हुए बताया था कि तीन सितंबर 2019 को उनकी 17 वर्षीय बेटी स्कूल गई थी लेकिन वापस नहीं लौटी। आरोप था कि आरोपी पीड़िता की मौसी का बेटा है, वही किशोरी को ले गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। बाद में जांच के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया।

सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके पिता वादी ने अदालत में अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। पीड़िता ने अदालत को बताया कि वह अपनी मर्जी से अपनी मौसी के घर गई थी और आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया। यहां तक कि पीड़िता ने चिकित्सकीय परीक्षण कराने से भी इन्कार कर दिया था। 18 अप्रैल को कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की गई।
न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा है। मुख्य गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने के कारण मामला पूरी तरह से संदिग्ध हो गया।



अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन कथानक की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद नहीं है। इसके आधार पर न्यायाधीश ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश दिया।
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