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Ayodhya News: रामलला के गर्भगृह में लगेगी एसी, पत्थरों से बने मंदिर में तकनीकी चुनौती बनी बड़ी परीक्षा
Mon, 27 Jul 2026 10:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 27 Jul 2026 10:51 PM IST
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रामलला का विग्रह।
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में विराजमान रामलला को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए अब एयर कंडीशनर (एसी) की व्यवस्था किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए मंदिर का निर्माण कर रही संस्था एलएंडटी के इंजीनियरों ने गर्भगृह का तकनीकी सर्वे किया है। वर्तमान में गर्भगृह पूरी तरह पत्थरों से निर्मित है और यहां एसी की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में गर्मी के दिनों में न केवल रामलला के विग्रह पर तापमान का प्रभाव पड़ता है, बल्कि नियमित पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों को भी लंबे समय तक भीषण गर्मी में रहना पड़ता है।
फिलहाल गर्मी से राहत के लिए गर्भगृह में कूलर की व्यवस्था की गई है, लेकिन बढ़ते तापमान और दीर्घकालिक जरूरतों को देखते हुए अब स्थायी समाधान के रूप में एसी लगाने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
इंजीनियर इस बात पर भी मंथन कर रहे हैं कि एसी की स्थापना के दौरान श्रद्धालुओं के दर्शन और नियमित पूजा-पद्धति बाधित न हो। इसलिए ऐसी तकनीक अपनाने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें उपकरण दिखाई भी कम दें और उनकी कार्यक्षमता भी बेहतर रहे।
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इनसेट
पत्थर की संरचना बनी सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती
-इंजीनियरों के अनुसार गर्भगृह में एसी लगाना सामान्य भवन की तरह आसान नहीं है। पूरा गर्भगृह विशाल पत्थरों से निर्मित है और इसकी वास्तुकला को बिना किसी क्षति पहुंचाए शीतलन व्यवस्था विकसित करनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एसी की पाइपलाइन, डक्टिंग और विद्युत व्यवस्था इस प्रकार तैयार की जाए कि मंदिर की मूल संरचना, शिल्पकला और सौंदर्य प्रभावित न हो। इसके अलावा गर्भगृह में तापमान नियंत्रित रखने के साथ नमी (ह्यूमिडिटी) का संतुलन भी बनाए रखना होगा, ताकि पत्थरों, धातु के अलंकरणों और विग्रह पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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फिलहाल गर्मी से राहत के लिए गर्भगृह में कूलर की व्यवस्था की गई है, लेकिन बढ़ते तापमान और दीर्घकालिक जरूरतों को देखते हुए अब स्थायी समाधान के रूप में एसी लगाने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
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इंजीनियर इस बात पर भी मंथन कर रहे हैं कि एसी की स्थापना के दौरान श्रद्धालुओं के दर्शन और नियमित पूजा-पद्धति बाधित न हो। इसलिए ऐसी तकनीक अपनाने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें उपकरण दिखाई भी कम दें और उनकी कार्यक्षमता भी बेहतर रहे।
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पत्थर की संरचना बनी सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती
-इंजीनियरों के अनुसार गर्भगृह में एसी लगाना सामान्य भवन की तरह आसान नहीं है। पूरा गर्भगृह विशाल पत्थरों से निर्मित है और इसकी वास्तुकला को बिना किसी क्षति पहुंचाए शीतलन व्यवस्था विकसित करनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एसी की पाइपलाइन, डक्टिंग और विद्युत व्यवस्था इस प्रकार तैयार की जाए कि मंदिर की मूल संरचना, शिल्पकला और सौंदर्य प्रभावित न हो। इसके अलावा गर्भगृह में तापमान नियंत्रित रखने के साथ नमी (ह्यूमिडिटी) का संतुलन भी बनाए रखना होगा, ताकि पत्थरों, धातु के अलंकरणों और विग्रह पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।