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Ayodhya News: इस्तीफे के शोर के बीच पार्षदों का यू-टर्न
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 24 Feb 2026 09:37 PM IST
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अयोध्या। नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों की बातों को अनसुना करने का आरोप लगाकर हलचल फैलाने वाले दोनों पार्षदों ने अब अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। मंगलवार को शहर भर में इस्तीफे की चर्चाओं और अटकलों के बीच दोपहर करीब 12:30 बजे दोनों पार्षदों ने निगम कार्यालय पहुंचकर कहा कि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है।
देवकाली वार्ड के भाजपा पार्षद अनुज दास ने कहा कि इस्तीफे जैसी कोई बात नहीं थी। उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी व व्यक्तिगत काम की वजह से वह जल्दी निकल गए थे। वहीं, अभिराम दास वार्ड के पार्षद सुल्तान अंसारी ने अपनी नाराजगी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बलिया में एक शादी समारोह में शामिल होना था, इसलिए बैठक बीच में छोड़कर चले गए थे।
उधर, महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने इसे निगम के घर का मामला बताते हुए कहा कि पार्षदों से बातचीत कर उनकी नाराजगी दूर कर ली गई है। सभी जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरी ओर, नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने भी मामले से पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी पार्षद की ओर से कोई लिखित इस्तीफा नहीं दिया गया है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि किसी बात को लेकर मामूली असहमति जरूर थी, जिसे दूर कर लिया गया है।
जनसुनवाई छोड़ पार्षदों को मनाने में जुटे रहे अफसर
पार्षदों की इस कथित नाराजगी को प्रशासन ने कितनी गंभीरता से लिया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को संभव जनसुनवाई कार्यक्रम को किनारे रख दिया गया। महापौर और नगर आयुक्त ने संभव कार्यक्रम को छोड़कर करीब एक घंटे तक बंद कमरे में नाराज पार्षदों के साथ वार्ता करते रहे। लंबी मान-मनौव्वल के बाद ही दोनों पार्षदों ने सामने आकर इस्तीफे की बात से साफ इन्कार कर दिया। इस घटनाक्रम ने जहां निगम की सियासत में हलचल मचा दी, वहीं विपक्षी खेमे में भी चर्चाओं का बाजार गरम रहा। फिलहाल, मान-मनौव्वल के दौर के बाद नगर निगम प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
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देवकाली वार्ड के भाजपा पार्षद अनुज दास ने कहा कि इस्तीफे जैसी कोई बात नहीं थी। उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी व व्यक्तिगत काम की वजह से वह जल्दी निकल गए थे। वहीं, अभिराम दास वार्ड के पार्षद सुल्तान अंसारी ने अपनी नाराजगी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बलिया में एक शादी समारोह में शामिल होना था, इसलिए बैठक बीच में छोड़कर चले गए थे।
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उधर, महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने इसे निगम के घर का मामला बताते हुए कहा कि पार्षदों से बातचीत कर उनकी नाराजगी दूर कर ली गई है। सभी जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरी ओर, नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने भी मामले से पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी पार्षद की ओर से कोई लिखित इस्तीफा नहीं दिया गया है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि किसी बात को लेकर मामूली असहमति जरूर थी, जिसे दूर कर लिया गया है।
जनसुनवाई छोड़ पार्षदों को मनाने में जुटे रहे अफसर
पार्षदों की इस कथित नाराजगी को प्रशासन ने कितनी गंभीरता से लिया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को संभव जनसुनवाई कार्यक्रम को किनारे रख दिया गया। महापौर और नगर आयुक्त ने संभव कार्यक्रम को छोड़कर करीब एक घंटे तक बंद कमरे में नाराज पार्षदों के साथ वार्ता करते रहे। लंबी मान-मनौव्वल के बाद ही दोनों पार्षदों ने सामने आकर इस्तीफे की बात से साफ इन्कार कर दिया। इस घटनाक्रम ने जहां निगम की सियासत में हलचल मचा दी, वहीं विपक्षी खेमे में भी चर्चाओं का बाजार गरम रहा। फिलहाल, मान-मनौव्वल के दौर के बाद नगर निगम प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
