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Ayodhya News: हिंदू नववर्ष के पहले दिन राष्ट्रपति करेंगी श्रीराम यंत्र की स्थापना
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 10 Mar 2026 08:57 PM IST
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नितिन मिश्र
अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। सनातन मान्यता के अनुसार जिस पावन तिथि को सृष्टि की रचना का प्रारंभ माना जाता है, उसी दिन राम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना की जाएगी। हिंदू नववर्ष के पहले दिन यानी 19 मार्च को अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:55 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्री राम यंत्र की विधिवत स्थापना करेंगी।
राष्ट्रपति 11:00 राम मंदिर पहुंचेंगी। इसके बाद परिसर के सभी उप मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगी। इसके बाद राम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना करेंगी। 12:45 से 2:15 बजे तक राष्ट्रपति समेत अन्य अतिथियों का संबोधन होगा। संबोधन के बाद कार्यक्रम में शामिल सभी मेहमानों को रामलला के दर्शन कराए जाएंगे। समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अमृत नंदमयी मां (अम्मा), वीरेंद्र हेगड़े, संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले शामिल होंगे। श्रीराम यंत्र की स्थापना के लिए काशी, दक्षिण भारत व अयोध्या के कुल 51 आचार्य मौजूद रहेंगे। समारोह में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से 5000 से अधिक मेहमानों को बुलाया जा रहा है। मेहमानों की सूची को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। मेहमानों में मंदिर आंदोलन के कारसेवक भी शामिल होंगे।
इसलिए की जाती है श्रीराम यंत्र की स्थापना
- जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य बताते हैं कि श्रीराम यंत्र को भगवान श्रीराम की दिव्य शक्ति, मर्यादा और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। मंदिर में इसकी स्थापना से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। यंत्र स्थापना किसी भी मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को स्थिर और सशक्त बनाने के लिए की जाती है। यह भगवान की दिव्य ऊर्जा का सूक्ष्म स्वरूप माना जाता है। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक आध्यात्मिक शांति और दिव्यता की अनुभूति होगी। मान्यता है कि यंत्र की स्थापना से मंदिर की पवित्रता और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इससे अयोध्या धाम से धर्म, शांति और मर्यादा का संदेश और अधिक व्यापक रूप से प्रसारित होगा।
शुरू होगा हिंदू नव वर्ष, बृहस्पति होंगे राजा
- आचार्य प्रवीण शर्मा बताते हैं कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च से हिंदू नव वर्ष का भी शुभारंभ होगा। इस दिन श्री राम यंत्र की स्थापना अत्यंत फलदायी साबित होगी। इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की स्थापना की थी। इसी दिन से सतयुग का आरंभ भी माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नए संवत्सर में ग्रहों की स्थिति विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष बृहस्पति को वर्ष का राजा माना गया है, जबकि मंत्री मंगल होंगे। बृहस्पति के राजा होने से धर्म, ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के संकेत माने जाते हैं। यह समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का वर्ष होगा।
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राष्ट्रपति 11:00 राम मंदिर पहुंचेंगी। इसके बाद परिसर के सभी उप मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगी। इसके बाद राम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना करेंगी। 12:45 से 2:15 बजे तक राष्ट्रपति समेत अन्य अतिथियों का संबोधन होगा। संबोधन के बाद कार्यक्रम में शामिल सभी मेहमानों को रामलला के दर्शन कराए जाएंगे। समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अमृत नंदमयी मां (अम्मा), वीरेंद्र हेगड़े, संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले शामिल होंगे। श्रीराम यंत्र की स्थापना के लिए काशी, दक्षिण भारत व अयोध्या के कुल 51 आचार्य मौजूद रहेंगे। समारोह में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से 5000 से अधिक मेहमानों को बुलाया जा रहा है। मेहमानों की सूची को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। मेहमानों में मंदिर आंदोलन के कारसेवक भी शामिल होंगे।
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इसलिए की जाती है श्रीराम यंत्र की स्थापना
- जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य बताते हैं कि श्रीराम यंत्र को भगवान श्रीराम की दिव्य शक्ति, मर्यादा और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। मंदिर में इसकी स्थापना से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। यंत्र स्थापना किसी भी मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को स्थिर और सशक्त बनाने के लिए की जाती है। यह भगवान की दिव्य ऊर्जा का सूक्ष्म स्वरूप माना जाता है। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक आध्यात्मिक शांति और दिव्यता की अनुभूति होगी। मान्यता है कि यंत्र की स्थापना से मंदिर की पवित्रता और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इससे अयोध्या धाम से धर्म, शांति और मर्यादा का संदेश और अधिक व्यापक रूप से प्रसारित होगा।
शुरू होगा हिंदू नव वर्ष, बृहस्पति होंगे राजा
- आचार्य प्रवीण शर्मा बताते हैं कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च से हिंदू नव वर्ष का भी शुभारंभ होगा। इस दिन श्री राम यंत्र की स्थापना अत्यंत फलदायी साबित होगी। इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की स्थापना की थी। इसी दिन से सतयुग का आरंभ भी माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नए संवत्सर में ग्रहों की स्थिति विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष बृहस्पति को वर्ष का राजा माना गया है, जबकि मंत्री मंगल होंगे। बृहस्पति के राजा होने से धर्म, ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के संकेत माने जाते हैं। यह समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का वर्ष होगा।