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Azamgarh News: शासन के फरमान के बाद शत्रु संपत्तियों के चिह्नांकन में आई तेजी
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प्रदेश भर के साथ ही जिले में स्थित शत्रु संपत्तियों से कब्जे हटवाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने इन संपत्तियों के प्रबंधन और निस्तारण के लिए सख्त रुख अपनाते हुए वर्ष 2029 की समय सीमा तय कर दी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद प्रदेश सरकार ने इस कार्य को प्रशासनिक प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखा है। जिले में पूर्व में हुई जांच में 13 शत्रु संपत्तियां मिली थीं। एक बार फिर तहसीलों से इनका ब्यौरा तलब किया गया है।
अभी तक मात्र दो तहसीलों से चार संपत्तियों का विवरण ही जिला प्रशासन को प्राप्त हुआ है। शासन की ओर से 2029 तक शत्रु संपत्तियों को खाली कराने के निर्देश के बाद शत्रु संपत्तियों के संबंध में जानकारी के लिए जिला प्रशासन की ओर से समस्त तहसीलों को पत्र जारी कर रिपोर्ट तलब की गई है।
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जिला प्रशासन को अब तक मात्र दो तहसीलों, सदर और मार्टीनगंज, से चार संपत्तियों का ही रिकॉर्ड मिला है। शेष तहसीलों से संपत्तियों का रिकॉर्ड मिलना अभी बाकी है। जिन तहसीलों से रिकॉर्ड मिला है, उनमें सदर तहसील की दो संपत्तियां मिली हैं।
इनमें एक दामोदरपुर में मिली है, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण में चली गई है। वहीं दूसरी बेलहरा गांव में है, जो परती के रूप में मौके पर मौजूद है। वहीं मार्टीनगंज तहसील में भी दो संपत्तियां मिली हैं।
दोनों संपत्तियां बरौना गांव में हैं। दोनों ही संपत्तियां परती के रूप में मौके पर मौजूद हैं। वहीं अब बूढ़नपुर तहसील की रिपोर्ट भी आ चुकी है। यहां पर एक भी शत्रु संपत्ति नहीं मिली है।
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क्या हैं शत्रु संपत्तियां
1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था। जो लोग पाकिस्तान चले गए, वे अपना सब कुछ तो उठाकर नहीं ले गए। उनके जाने के बाद बहुत कुछ पीछे छूट गया। घर-मकान, हवेलियां-कोठियां, जमीन-जवाहरात, कंपनियां वगैरह। उनके जाने के बाद इन संपत्तियों पर सरकार का कब्जा हो गया। यानी, जिनका इन संपत्तियों पर मालिकाना हक था, वे तो चले गए दूसरे मुल्क, जबकि जायदाद यहीं रह गई। अब इस जायदाद पर सरकार का मालिकाना है।
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शासन से मिले निर्देश के बाद सभी तहसीलों से शत्रु संपत्तियों की जानकारी मांगी गई है। अभी तक मात्र दो तहसीलों से रिपोर्ट आई है। जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार किसी जमीन पर कोई कब्जा नहीं है। शेष तहसीलों से रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -गंभीर सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद प्रदेश सरकार ने इस कार्य को प्रशासनिक प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखा है। जिले में पूर्व में हुई जांच में 13 शत्रु संपत्तियां मिली थीं। एक बार फिर तहसीलों से इनका ब्यौरा तलब किया गया है।
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अभी तक मात्र दो तहसीलों से चार संपत्तियों का विवरण ही जिला प्रशासन को प्राप्त हुआ है। शासन की ओर से 2029 तक शत्रु संपत्तियों को खाली कराने के निर्देश के बाद शत्रु संपत्तियों के संबंध में जानकारी के लिए जिला प्रशासन की ओर से समस्त तहसीलों को पत्र जारी कर रिपोर्ट तलब की गई है।
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जिला प्रशासन को अब तक मात्र दो तहसीलों, सदर और मार्टीनगंज, से चार संपत्तियों का ही रिकॉर्ड मिला है। शेष तहसीलों से संपत्तियों का रिकॉर्ड मिलना अभी बाकी है। जिन तहसीलों से रिकॉर्ड मिला है, उनमें सदर तहसील की दो संपत्तियां मिली हैं।
इनमें एक दामोदरपुर में मिली है, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण में चली गई है। वहीं दूसरी बेलहरा गांव में है, जो परती के रूप में मौके पर मौजूद है। वहीं मार्टीनगंज तहसील में भी दो संपत्तियां मिली हैं।
दोनों संपत्तियां बरौना गांव में हैं। दोनों ही संपत्तियां परती के रूप में मौके पर मौजूद हैं। वहीं अब बूढ़नपुर तहसील की रिपोर्ट भी आ चुकी है। यहां पर एक भी शत्रु संपत्ति नहीं मिली है।
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क्या हैं शत्रु संपत्तियां
1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था। जो लोग पाकिस्तान चले गए, वे अपना सब कुछ तो उठाकर नहीं ले गए। उनके जाने के बाद बहुत कुछ पीछे छूट गया। घर-मकान, हवेलियां-कोठियां, जमीन-जवाहरात, कंपनियां वगैरह। उनके जाने के बाद इन संपत्तियों पर सरकार का कब्जा हो गया। यानी, जिनका इन संपत्तियों पर मालिकाना हक था, वे तो चले गए दूसरे मुल्क, जबकि जायदाद यहीं रह गई। अब इस जायदाद पर सरकार का मालिकाना है।
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शासन से मिले निर्देश के बाद सभी तहसीलों से शत्रु संपत्तियों की जानकारी मांगी गई है। अभी तक मात्र दो तहसीलों से रिपोर्ट आई है। जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार किसी जमीन पर कोई कब्जा नहीं है। शेष तहसीलों से रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -गंभीर सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व।