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Azamgarh News: अब बाबा भंवरनाथ मंदिर के नए व्यवस्थापक होंगे तहसीलदार सदर
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बाबा भंवरनाथ मंदिर। श्रोत-लाइब्रेरी
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आजमगढ़। बाबा भंवरनाथ मंदिर के कब्जे के लिए चल रहे विवाद की सुनवाई करते हुए एसडीएम सदर कोर्ट ने शनिवार को फैसला सुनाया।
नरेंद्र गंगवार की कोर्ट ने मंदिर की संपत्ति और जमीन को अटैच करते हुए कहा कि अब मंदिर के नए व्यवस्थापक तहसीलदार सदर होंगे। कहा कि किसी अन्य कोर्ट से फैसला आने तक तहसीलदार सदर ही मंदिर की सारी व्यवस्थाओं को देखेंगे। नगर से सटे भंवरनाथ मंदिर के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा है। शिवरात्रि, प्रत्येक सोमवार और सावन के हर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है। इसके अलावा हर दिन यहां कोई न कोई कार्यक्रम होता रहता है। कोई मुंडन तो कोई शादी तो कोई भंडारा कराता है। बाबा भंवरनाथ शृंगार मंडली द्वारा 2024 तक हर सोमवार को बाबा का भव्य शृंगार किया जाता था। 2024 में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दान पेटिका से पैसे निकाले जा रहे थे। इसके बाद मंदिर की देखरेख करने वाले अमर देव सिंह पक्ष और रूपेश सिंह पक्ष आमने-सामने हो गए। अमर देव सिंह पक्ष के विरोध पर शृंगार मंडली ने शृंगार कराना बंद कर दिया।
मंदिर के कब्जे को लेकर दोनों पक्षों ने एसडीएम कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया। दो साल तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को एसडीएम सदर की कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
पहले ही निरस्त हो चुकी है समिति
बताते चलें कि अमरदेव की ओर से बाबा भंवरनाथ सेवा समिति बनाकर मंदिर की देखरेख की जाती थी। विवाद के बाद रूपेश सिंह ने चिट फंड कार्यालय में अपील दायर की कि उनके द्वारा फर्जी समिति का गठन कर मंदिर की संपत्ति पर कब्जा किया जा रहा है। सुनवाई के बाद सहायक रजिस्ट्रार ने इस समिति को निरस्त कर दिया था।
मंदिर की व्यवस्था हमारे परिवार के लोग ही देखते थे। 2013 में इन लोगों ने समिति का गठन कर मंदिर की देखरेख करनी शुरू कर दी। जब इनके द्वारा दान पेटिका आदि को तोड़ने का कार्य किया गया और लोग शिकायत करने लगे। हमें इसका विरोध करना पड़ा। एसडीएम कोर्ट को जो फैसला आया है हम उससे काफी प्रसन्न हैं। रूपेश सिंह, प्रधान देवखरी।
मंदिर को लेकर दोनों पक्षों में विवाद था। इस विवाद को सुलझाने के लिए मंदिर की संपत्ति को कुर्क करते हुए तहसीलदार सदर को वहां का प्रशासक तैनात किया गया है। अग्रिम कोई आदेश आने तक तहसीलदार ही मंदिर की सारी व्यवस्था को देखेंगे।-नरेंद्र गंगवार, एसडीएम सदर।
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नरेंद्र गंगवार की कोर्ट ने मंदिर की संपत्ति और जमीन को अटैच करते हुए कहा कि अब मंदिर के नए व्यवस्थापक तहसीलदार सदर होंगे। कहा कि किसी अन्य कोर्ट से फैसला आने तक तहसीलदार सदर ही मंदिर की सारी व्यवस्थाओं को देखेंगे। नगर से सटे भंवरनाथ मंदिर के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा है। शिवरात्रि, प्रत्येक सोमवार और सावन के हर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है। इसके अलावा हर दिन यहां कोई न कोई कार्यक्रम होता रहता है। कोई मुंडन तो कोई शादी तो कोई भंडारा कराता है। बाबा भंवरनाथ शृंगार मंडली द्वारा 2024 तक हर सोमवार को बाबा का भव्य शृंगार किया जाता था। 2024 में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दान पेटिका से पैसे निकाले जा रहे थे। इसके बाद मंदिर की देखरेख करने वाले अमर देव सिंह पक्ष और रूपेश सिंह पक्ष आमने-सामने हो गए। अमर देव सिंह पक्ष के विरोध पर शृंगार मंडली ने शृंगार कराना बंद कर दिया।
मंदिर के कब्जे को लेकर दोनों पक्षों ने एसडीएम कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया। दो साल तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को एसडीएम सदर की कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
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पहले ही निरस्त हो चुकी है समिति
बताते चलें कि अमरदेव की ओर से बाबा भंवरनाथ सेवा समिति बनाकर मंदिर की देखरेख की जाती थी। विवाद के बाद रूपेश सिंह ने चिट फंड कार्यालय में अपील दायर की कि उनके द्वारा फर्जी समिति का गठन कर मंदिर की संपत्ति पर कब्जा किया जा रहा है। सुनवाई के बाद सहायक रजिस्ट्रार ने इस समिति को निरस्त कर दिया था।
मंदिर की व्यवस्था हमारे परिवार के लोग ही देखते थे। 2013 में इन लोगों ने समिति का गठन कर मंदिर की देखरेख करनी शुरू कर दी। जब इनके द्वारा दान पेटिका आदि को तोड़ने का कार्य किया गया और लोग शिकायत करने लगे। हमें इसका विरोध करना पड़ा। एसडीएम कोर्ट को जो फैसला आया है हम उससे काफी प्रसन्न हैं। रूपेश सिंह, प्रधान देवखरी।
मंदिर को लेकर दोनों पक्षों में विवाद था। इस विवाद को सुलझाने के लिए मंदिर की संपत्ति को कुर्क करते हुए तहसीलदार सदर को वहां का प्रशासक तैनात किया गया है। अग्रिम कोई आदेश आने तक तहसीलदार ही मंदिर की सारी व्यवस्था को देखेंगे।-नरेंद्र गंगवार, एसडीएम सदर।