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Azamgarh News: ठंड में उभरे दर्द पर फिजियोथेरेपी लगा रही मरहम
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सर्दी के मौसम में घुटनों, पीठ, कंधे और रीढ़ की हड्डी से जुड़े दर्द की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अब पारंपरिक दर्द निवारक दवाओं के बजाय फिजियोथेरेपी को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। यह उपचार पद्धति न केवल सुरक्षित है, बल्कि लंबे समय तक राहत भी प्रदान करती है। मंडलीय जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में इन दिनों प्रतिदिन करीब 18 से 20 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. शैलेश कुमार ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में लोगों में फिजियोथेरेपी के प्रति जागरूकता काफी बढ़ी है। पहले लोग दर्द या चोट लगने पर केवल दवाइयों पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब वे समझ चुके हैं कि फिजियोथेरेपी से बिना सर्जरी के कई समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है। खासकर जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, घुटने की समस्या, स्ट्रोक के बाद की रिकवरी, खेल चोटें और पोस्ट-ऑपरेटिव रिहैबिलिटेशन के लिए मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी यूनिट में आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता के कारण मरीजों का भरोसा बढ़ा है। डॉ. कुमार ने आगे बताया कि विभाग में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी संचालित होती है और मरीजों को व्यक्तिगत व्यायाम योजना, थेरेपी सेशन और घरेलू व्यायाम सलाह भी दी जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के मांसपेशी, जोड़ या नसों से संबंधित दर्द होने पर समय रहते फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लें, ताकि समस्या बढ़ने से पहले ही नियंत्रण में आ सके।
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इन बातों का रखें ध्यान
बैठते या खड़े होते समय कंधों को सीधा रखें।
कंधा जाम होने पर गर्म पानी या आइस थैली से 15 मिनट तक सिकाई करें।
चिकित्सक की सलाह पर ही दर्द की दवाएं लें।
प्रभावित हाथ से अधिक वजन का सामान न उठाएं।
दर्द या जकड़न बढ़ने पर चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।
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फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. शैलेश कुमार ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में लोगों में फिजियोथेरेपी के प्रति जागरूकता काफी बढ़ी है। पहले लोग दर्द या चोट लगने पर केवल दवाइयों पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब वे समझ चुके हैं कि फिजियोथेरेपी से बिना सर्जरी के कई समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है। खासकर जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, घुटने की समस्या, स्ट्रोक के बाद की रिकवरी, खेल चोटें और पोस्ट-ऑपरेटिव रिहैबिलिटेशन के लिए मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
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जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी यूनिट में आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता के कारण मरीजों का भरोसा बढ़ा है। डॉ. कुमार ने आगे बताया कि विभाग में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी संचालित होती है और मरीजों को व्यक्तिगत व्यायाम योजना, थेरेपी सेशन और घरेलू व्यायाम सलाह भी दी जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के मांसपेशी, जोड़ या नसों से संबंधित दर्द होने पर समय रहते फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लें, ताकि समस्या बढ़ने से पहले ही नियंत्रण में आ सके।
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इन बातों का रखें ध्यान
बैठते या खड़े होते समय कंधों को सीधा रखें।
कंधा जाम होने पर गर्म पानी या आइस थैली से 15 मिनट तक सिकाई करें।
चिकित्सक की सलाह पर ही दर्द की दवाएं लें।
प्रभावित हाथ से अधिक वजन का सामान न उठाएं।
दर्द या जकड़न बढ़ने पर चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।
