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स्टिंग: 10 हजार में बन रहे दिव्यांग प्रमाण पत्र, फंसेंगे तो कह देंगे- इलाज से ठीक हो गया; खुलेआम होती है वसूली

Sun, 12 Jul 2026 11:16 AM IST
Aman Vishwakarma शैलेश कुमार सिंह/आरबी सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
शैलेश कुमार सिंह/आरबी सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 12 Jul 2026 11:16 AM IST
सार

Azamgarh News: आजमगढ़ जिला अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर दलालों के सक्रिय सिंडिकेट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 10 से 12 हजार रुपये लेकर 45 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र तक बनवाने का दावा किया जा रहा है। वहीं वास्तविक दिव्यांग वर्षों से प्रमाण पत्र के लिए चक्कर काट रहे हैं। मामले ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Sting Disability certificates being made 10000 caught excuse will be cured by treatment extortion happens open
सीएमओ कार्यालय के इंस्पेक्टर, लिपिक के साथ दिव्यांग भवन का बाबू। - फोटो : संवाद

विस्तार

UP News: अगर आप दिव्यांग हैं तो आपको अपनी दिव्यांगता साबित करने के लिए नाको चने चबाने पड़ेंगे। क्योंकि जिला अस्पताल परिसर स्थित दिव्यांग भवन में मोटी रकम लेकर सवांग को भी दिव्यांग बनाने का सिंडिकेट धड़ल्ले से चल रहा है। यहां 10 से 12 हजार रुपये में पूरी तरह से शारीरिक रूप से फिट व्यक्ति का 45 प्रतिशत का प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है।

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जिले में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। जिला अस्पताल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से जुड़े तंत्र के आसपास सक्रिय दलाल मोटी रकम लेकर ऐसे लोगों का भी 45 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं जो वास्तव में दिव्यांग नहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर वास्तविक दिव्यांगजन वर्षों से प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। 

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जिला अस्पताल परिसर में कथित दलाल खुलेआम 10 से 12 हजार रुपये लेकर 45 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने की बात करते हैं। उनका दावा है कि पूरी प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी करा दी जाएगी। इसके लिए न तो कोई दिव्यांगता का टेस्ट होगा और नहीं किसी मेडिकल टीम से पास कराना पड़ेगा। 

केवल आधार कार्ड के आधार पर रजिस्ट्रेशन होगा और दो सप्ताह में 45 प्रतिशत का दिव्यांग प्रमाण पत्र आपके पास होगा। दलालों का कहना है कि पूरी रकम का आधा हिस्सा चिकित्सक से लेकर कर्मियों में बंट जाता है। 

बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने जिला अस्पताल में बने दिव्यांग भवन का स्टिंग किया तो कई चौकाने वाले मामने सामने आए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के एक विभाग में इंस्पेक्टर पद पर तैनात अधिकारी, ब्लड बैंक का लिपिक, दिव्यांग भवन के लिपिक से लेकर दलालों से की गई बात में जिले में बनाए जा रहे दिव्यांग प्रमाण पत्र की कलई खुली।

परिसर बना दलालों का बसेरा, जाल में ऐसे फंसाते हैं ग्राहकों को
बृहस्पतिवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने का दिन निर्धारित है। यहां पहुंचकर टीम ने जब प्रमाण पत्र बनवाने की इच्छा एक व्यक्ति से बताई। अभी वह व्यक्ति वहां से हटा ही था और एक व्यक्ति आकर हमसे बात करने लगा। उसने पूछा कि कैसे दिव्यांग हैं जिनका प्रमाण पत्र बनवाना है। इसके बाद उसने पूरी प्रक्रिया बता दी। जब हमने कहा कि जिस व्यक्ति का प्रमाण पत्र वह 25 से 30 प्रतिशत दिव्यांग है तो उसने कहा कि पांच हजार रुपये लगेंगे 40 से 45 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र बन जाएगा।

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आंख से 40 तो हड्डी से बनती है 45 प्रतिशत की दिव्यांगता
सीएमओ कार्यालय परिसर में हमसे एक विभाग में इंस्पेक्टर पद पर तैनात और ब्लड बैंक का एक कर्मी मिला। यह दोनों लोग एक बाइक से कहीं जा रहे थे। जब हमने उनसे बात की बताया कि बच्चे का एडमिशन कराना है, इसके लिए प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। इस पर उन्होंने बताया कि इस समय आंख की दिव्यांगता दिखाकर केवल 40 प्रतिशत का प्रमाण पत्र ही बन रहा है। उन्होंने बकायदे समझाया कि 40 प्रतिशत की दिव्यांगता का उन्हें बहुत लाभ नहीं मिलेगा। 

इसके लिए हड्डी की दिव्यांगता दिखाकर 45 प्रतिशत का प्रमाण पत्र बन सकता है। इसके लिए 10 हजार से अधिक रुपये देने होंगे। यहां इंस्पेक्टर व स्वास्थ्य कर्मी ने बकायदे दिव्यांग भवन के लिपिक को फोन किया और पूरी जानकारी ली और बताया कि हड्डी की दिव्यांगता दिखाकर ही 45 प्रतिशत का प्रमाण पत्र बनेगा। इसी बीच दिव्यांग भवन का लिपिक भी सीएमओ कार्यालय पहुंच गए। यहां तीनों स्वास्थ्यकर्मियों ने आपस में बातचीत की और बताया कि हो जाएगा।

मामला फंसा तो कह देंगे दवा इलाज से हो गया ठीक
स्वास्थ्य विभाग में ही इंस्पेक्टर पर तैनात कर्मी ने कहा कि प्रमाण पत्र पूरी तरह से सही होगा। अगर कभी मामला फंसता है तो हम कह देंगे जिस समय जांच हुई उस समय वह दिव्यांग था बाद में इलाज कराकर स्वस्थ्य हो गया। तभी बाइक चला रहे ब्लड बैंक कर्मी ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं हम खुद कई वर्षों से दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे आवागमन कर रहे हैं। उसने हमें खुद का दिव्यांग प्रमाण पत्र भी दिखाया।

दो साल से प्रमाण पत्र बनवाने को दौड़ रहे दंपती
जिला अस्पताल परिसर स्थित दिव्यांग भवन में मिले जिले के भीमापुर निवासी गुड्डू ने बताया कि वह दो वर्ष से दिव्यांग प्रमाण के लिए दौड़ रहा है पर आज तक उनका प्रमाण पत्र नहीं बना। वहीं, गांव के ही जवाहिर और उनकी पत्नी अद्रिता दोनों जन्मजात मूकबधिर और गूंगता के शिकार हैं। दिसंबर 2024 में दोनों ने दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। 

जिला अस्पताल में जांच की व्यवस्था न होने के कारण विशेषज्ञ चिकित्सक ने पति-पत्नी दोनों को मेडिकल के लिए 100 शैय्या अस्पताल अतरौलिया रेफर कर दिया। यहां जाने पर उनके परिजनों को बताया गया कि यहां बहरापन और गूंगापन के जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। फिर उन्हें बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया। बीएचयू में भी उनकी जांच नहीं हुई। डेढ़ वर्ष से दिव्यांग पति-पत्नी वाराणसी से लगायत जिला अस्पताल की दौड़ लगा रहे हैं पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

चार साल से दौड़ रहा ऋषभ
जिले के पुरंदरपुर निवासी ऋषभ राय ने बताया कि वे मई 2022 में दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। तबसे वह आज तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से लगायत जिला अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं पर आज तक प्रमाण पत्र नहीं बना। बताया कि यहां आंखों की दिव्यांगता जांचने की कोई व्यवस्था नहीं है, इसके लिए बीएचयू रेफर किया जाता है। वहां जाने पर भी जांच नहीं हो पाई। 

कहा कि जो दिव्यांग हैं उन्हें वर्षों दौड़ना पड़ रहा है, जबकि अन्य लोग पैसे का लेनदेन कर प्रमाण पत्र बनवा ले रहे हैं। बताया कि एक बार आधार कार्ड से आवेदन कर दिए जाने के बाद फिर आवेदन भी नहीं कर सकते। क्योंकि वह आवेदन हुआ दिखाता रहेगा। दिव्यांग भवन में मिले ऋषभ ने बताया कि आंख में दिक्कत है पर आज तक उसका प्रमाण पत्र नहीं बनाया गया।

दलाल नंबर एक : जिला अस्पताल के दिव्यांग भवन के सामने पराग डेयरी पर मिले एक दलाल से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बात की गई। दलाल ने सीधे बताया कि अगर आप दिव्यांग नहीं है तो पैसा थोड़ा अधिक लगेगा। पूछने पर बताया कि 10 हजार से अधिक लगेगा। आपको केवल आधार कार्ड की फोटो कापी और एक फोटो देना होगा। एक सप्ताह बाद प्रमाण पत्र मिल जाएगा।

दलाल नंबर दो: सीएमओ कार्यालय परिसर में मिले एक विभाग के इंस्पेक्टर और ब्लड बैंक के लिपिक से प्रमाण पत्र बनवाने की बात की गई। पहले तो इंस्पेक्टर ने बताया कि आंख में दिक्कत दिखाने पर अब 45 प्रतिशत का प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है। पहले आप पता कर लीजिए कि क्या 40 प्रतिशत पर विद्यालय में एडमिशन हो जाएगा तो बनवा दिया जाएगा। तभी लिपिक ने दिव्यांग भवन के बाबू से बात की और बताया कि हड्डी में दिव्यांगता दिखाकर 45 प्रतिशत का बन जाएगा। 45 प्रतिशत के प्रमाण पत्र पर सभी लाभ मिलते हैं।

दलाल नंबर तीन: दिव्यांग भवन पर मिले एक दलाल से प्रमाण पत्र बनवाने की बात की गई तो उसने बताया कि जो दिव्यांग होते हैं, अगर उनका प्रतिशत 25 से 30 प्रतिशत है तो उनसे 4-5 हजार लेकर 45 प्रतिशत का बनवा दिया जाता है। अगर दिव्यांग नहीं हैं तो 10 से 12 हजार रुपये तक देने पड़ेंगे, इसके लिए बस ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा और बनवा दिया जाएगा। कोई मेडिकल और जांच की झंझट नहीं आएगी।

इनका बनता है दिव्यांग प्रमाण पत्र

  • अंधापन : दृष्टि का पूर्णतः अभाव।
  • अल्प दृष्टि : सामान्य से कम दृष्टि, जिसे चश्मे से पूरी तरह ठीक न किया जा सके।
  • श्रवण बाधित : सुनने में पूरी तरह असमर्थ (बधिर) या कम सुनने वाला।
  • वाणी और भाषा संबंधी दिव्यांगता : बोलने में असमर्थता या भाषा समझने व व्यक्त करने में परेशानी।
  • चलन दिव्यांगता : हड्डियों, जोड़ों या मांसपेशियों में अक्षमता, जैसे लकवा या पोलियो।
  • बौनापन : चिकित्सा कारणों से शरीर का सामान्य से बहुत कम विकास होना।
  • मस्कुलर डिस्ट्रॉफी : मांसपेशियों के कमजोर होने की आनुवंशिक बीमारी।
  • तेजाब हमला पीड़ित : तेजाब हमले के कारण चेहरे या शरीर के अंगों का प्रभावित होना।
  • बौद्धिक अक्षमता : सीखने, समझने और सामान्य जीवन जीने के कौशल में कमी।
  • विशिष्ट सीखने की अक्षमता : पढ़ने-लिखने या गणित सीखने में कठिनाई।
  • ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर : सामाजिक रूप से घुलने-मिलने, बातचीत करने और व्यवहार में दोहराव की समस्या।
  • मानसिक बीमारी : मस्तिष्क का ऐसा विकार जो व्यक्ति की सोच, मनोदशा और याददाश्त को प्रभावित करता है।
  • मल्टीपल स्केलेरोसिस : मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारी।
  • पार्किंसंस रोग : तंत्रिका तंत्र का विकार जिससे शरीर में कंपन होता है और हिलने-डुलने में परेशानी होती है।
  • हीमोफीलिया : एक आनुवंशिक विकार जिसमें चोट लगने पर खून का थक्का नहीं जमता (रक्तस्राव जारी रहता है)।
  • थैलेसीमिया : खून से जुड़ी आनुवंशिक बीमारी, जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता।
  • सिकल सेल रोग : लाल रक्त कोशिकाओं के आकार में बदलाव से जुड़ी रक्त की बीमारी।
  • क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस : तंत्रिका तंत्र से जुड़ी अन्य पुरानी और स्थायी बीमारियां।
  • कुष्ठ रोग से मुक्त : कुष्ठ रोग से ठीक होने के बाद अंगों का विकृत या सुन्न हो जाना।
  • बहु दिव्यांगता : जब कोई व्यक्ति ऊपर दी गई दो या उससे अधिक दिव्यांगताओं से एक साथ ग्रस्त हो, जैसे कि मूक-बधिर होना आदि।

दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने की यह है प्रक्रिया
दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आधिकारिक यूडीआईडी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद चिकित्सा जांच के लिए जिला अस्पताल में मेडिकल बोर्ड दिव्यांगता का प्रतिशत तय करके प्रमाण पत्र जारी करता है। आवेदन में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, दिव्यांगता का विवरण और पहचान का विवरण भरें। इसमें पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, पहचान पत्र और पते का प्रमाण अपलोड करें। 

ऑनलाइन फॉर्म जमा करने के बाद जिला अस्पताल या सीएमओ कार्यालय जाना होगा। मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी शारीरिक या मानसिक स्थिति का परीक्षण करेंगे। इसके बाद डॉक्टर यह निर्धारित करते हैं कि दिव्यांगता किस प्रकार की है और कुल कितने प्रतिशत है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ कार्यालय द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदक की मेडिकल जांच की जाती है। दिव्यांगता प्रमाणित होने पर ही प्रतिशत अनुसार प्रमाण पत्र बनाया जाता है। पैसा लेकर प्रमाण पत्र बनाने की अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। सोमवार से मैं खुद इसकी मॉनिटरिंग करुंगा, अगर किसी कर्मी सहित कोई भी ऐसा करते मिला तो प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। - डॉ. एनआर वर्मा, सीएमओ।

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