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आंधी ने तोड़ी उम्मीद : 300 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी आम की 80 फीसदी फसल चौपट

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 01:12 AM IST
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Storm shatters hopes: 80% of mango crop spread over 300 hectares destroyed
मौसम परिवर्तन से काले पड़े आम के बौर। संवाद - फोटो : आंधी चलने से 80 फीडरों पर डेढ़ घंटे गुल रही बिजली
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आजमगढ़। मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने इस बार आम उत्पादकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फरवरी और मार्च महीने में औसत से अधिक तापमान, उसके बाद अचानक हुई बूंदाबांदी और उमस भरे मौसम ने आम के बौर को गंभीर नुकसान पहुंचाया। अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 300 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी आम की फसल 70 से 80 फीसदी तक प्रभावित होकर बर्बाद हो गई है। इससे बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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जिला उद्यान अधिकारी हरिशंकर राम ने बताया कि फरवरी में समय से पहले बढ़ी गर्मी के कारण आम के पेड़ों पर आए बौर झुलसने लगे। इसके बाद मार्च में मौसम ने अचानक करवट ली और हल्की बारिश के साथ तापमान में गिरावट आई। मौसम में आए इस बदलाव से वातावरण में नमी और उमस बढ़ गई, जिसने आम की फसल पर प्रतिकूल असर डाला। कई बागों में बौर सूख गए, जबकि कुछ स्थानों पर फल बनने की प्रक्रिया ही रुक गई।
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बागवानों का कहना है कि इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन मौसम की बेरुखी ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं। उत्पादन घटने से बाजार में आम की उपलब्धता कम होने और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु चक्र का असर फलों की खेती पर लगातार बढ़ रहा है, जिससे किसानों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
90 किमी की गति से आई थी आंधी
जिले में बुधवार को करीब 90 किमी की गति से आई आंधी ने न सिर्फ जनजीवन को प्रभावित किया, बल्कि बचे-खुचे आम को भी गिरा दिया। तापमान बढ़ने के बाद करीब 20 फीसदी आम बच गए थे। बागवान बचे आम को संभालने में जुटे थे कि आंधी-पानी ने बागवानों के अरमानों को झकझोर दिया है।

ठंड के सीजन में तापमान के अचानक बढ़ जाने और फिर बूंदाबांदी के बाद कोहरा पड़ने से हुई उमस के चलते आम के बौर झुलस गए। इससे आम की फसल प्रभावित हुई है। इसका सर्वे कराया जाएगा। -हरिशंकर राम, डीएचओ।
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