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Azamgarh News: जिंक एलम वाले ओवरहेड टैंकों की जांच के बाद ही होगी जलापूर्ति
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पल्हनी ब्लॉक के सरायसादी में बना जिंक एलम टैंक। संवाद
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आजमगढ़। बरेली में बीते सोमवार को ओवरहेड टैंक के गिरने की घटना के बाद अब जिले में जिंक एलम से बने ओवरहेड टैंकों का सर्वे कर जांच किया जाएगा। जहां कमियां मिलेगी उसे दूर करने के बाद ही पानी की आपूर्ति शुरू की जाएगी।
हर घर नल से जल योजना के तहत जिले में 1464 ओवरहेड टैंंक बनाए जाने हैं। इसमें से 834 ओवरहेड टैंकों के निर्माण पूरा हो चुका है। इसमें कम क्षमता के 250 ओएचटी जिंक एलम से बने हैं जबकि अन्य ओएचटी कास्ट टू साइट (कंक्रीट) से बने हैं। बरेली में ओवरहेड टैंक फटकर गिरने के बाद अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने जल निगम के अधिकारियों को वीसी के माध्यम से निर्देश दिया। कहा कि सभी जिंक एलम वाले टैंकों के नट बोल्ट कस लिए जाय और विधिवत जांच के बाद ही उससे जलापूर्ति शुरू की जाय।
कहीं भी लिकेज और किसी प्रकार की कमी की शिकायत नहीं होनी चाहिए। निगम के सहायक अभियंता सत्येंद्र कुमार ने बताया कि यहां बने सभी ओवरहेड टैंकों की जांच पहले ही हो चुकी है लेकिन अपर मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सभी कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को फिर से ओवरहेड टैंकों का सर्वे कर आईआईटी या इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसरों से जांच कराने का निर्देश दिया गया है। इस पर काम भी शुरू हो चुका है।
तब नहीं मिली थी कोई कमी-सहायक अभियंता ने बताया कि जिले में लगभग 20 ओवरहेड टैंकों की जांच आईआईटी बीएचयू ने दो साल पहले की थी। जांच में सब कुछ सही मिला था, कहीं कोई कमी नहीं पाई गई थी। वर्तमान समय में 3818 राजस्व गांवों में से 1800 राजस्व गांवों में नियमित जलापूर्ति की जा रही है।
अपर मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सभी कार्यदायी संस्थाओं को ओवरहेड टैंकों का सर्वे कर आईआईटी या इंजीनियरिंग कॉलेज से जांच कराने का निर्देश दे दिया गया है। इस दौरान अगर कहीं कोई कमी मिलती है तो उसे भी दूर कराया जाएगा। - सत्येंद्र कुमार, एई जल निगम ग्रामीण
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हर घर नल से जल योजना के तहत जिले में 1464 ओवरहेड टैंंक बनाए जाने हैं। इसमें से 834 ओवरहेड टैंकों के निर्माण पूरा हो चुका है। इसमें कम क्षमता के 250 ओएचटी जिंक एलम से बने हैं जबकि अन्य ओएचटी कास्ट टू साइट (कंक्रीट) से बने हैं। बरेली में ओवरहेड टैंक फटकर गिरने के बाद अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने जल निगम के अधिकारियों को वीसी के माध्यम से निर्देश दिया। कहा कि सभी जिंक एलम वाले टैंकों के नट बोल्ट कस लिए जाय और विधिवत जांच के बाद ही उससे जलापूर्ति शुरू की जाय।
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कहीं भी लिकेज और किसी प्रकार की कमी की शिकायत नहीं होनी चाहिए। निगम के सहायक अभियंता सत्येंद्र कुमार ने बताया कि यहां बने सभी ओवरहेड टैंकों की जांच पहले ही हो चुकी है लेकिन अपर मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सभी कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को फिर से ओवरहेड टैंकों का सर्वे कर आईआईटी या इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसरों से जांच कराने का निर्देश दिया गया है। इस पर काम भी शुरू हो चुका है।
तब नहीं मिली थी कोई कमी-सहायक अभियंता ने बताया कि जिले में लगभग 20 ओवरहेड टैंकों की जांच आईआईटी बीएचयू ने दो साल पहले की थी। जांच में सब कुछ सही मिला था, कहीं कोई कमी नहीं पाई गई थी। वर्तमान समय में 3818 राजस्व गांवों में से 1800 राजस्व गांवों में नियमित जलापूर्ति की जा रही है।
अपर मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सभी कार्यदायी संस्थाओं को ओवरहेड टैंकों का सर्वे कर आईआईटी या इंजीनियरिंग कॉलेज से जांच कराने का निर्देश दे दिया गया है। इस दौरान अगर कहीं कोई कमी मिलती है तो उसे भी दूर कराया जाएगा। - सत्येंद्र कुमार, एई जल निगम ग्रामीण