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Baghpat News: किसान के दो हत्यारों को सश्रम आजीवन कारावास
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बागपत। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष एससीएसटी के न्यायाधीश विष्णु प्रसाद अग्रवाल ने सूप गांव के किसान दलबीर सिंह के दो हत्यारों मोनू और बिल्लू को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही बिल्लू पर 27 हजार रुपये और मोनू पर 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसे अदा नहीं करने पर एक-एक साल की सजा बढ़ाने के आदेश दिए।
सूप गांव निवासी नरेंद्र ने वर्ष 2014 में रमाला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि प्रधानी के चुनाव की रंजिश में उसके फुफेरे भाई रणवीर की हत्या कर दी गई थी, जिसमें कई आरोपी जेल में बंद थे। आरोपी पक्ष के लोग समझौता नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दे रहे थे। इसको लेकर आरोपी पक्ष के बिल्लू, मोनू समेत चार लोगों ने घर में घुसकर हमला कर दिया। हमलावरों ने उसके फूफा दलबीर पर चाकू से हमला कर घायल कर दिया। अपनी बुआ के साथ फूफा को बचाने गया तो हमलावरों ने फायरिंग कर दी, जिससे बाल-बाल बच गए।
घायल दलबीर की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी मोनू, बिल्लू समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसमें एक आरोपी नाबालिग होने के चलते पत्रावली अलग कर दी गई, जबकि मोनू, बिल्लू समेत तीन की पत्रावली पर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष एससीएसटी में चल रही थी। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश विष्णु प्रसाद अग्रवाल ने मोनू और बिल्लू पर दोषसिद्ध कर सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही बिल्लू पर 27 हजार रुपये और मोनू पर 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसे अदा नहीं करने पर एक-एक साल की सजा बढ़ाई जाएगी, जबकि तीसरे आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
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सूप गांव निवासी नरेंद्र ने वर्ष 2014 में रमाला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि प्रधानी के चुनाव की रंजिश में उसके फुफेरे भाई रणवीर की हत्या कर दी गई थी, जिसमें कई आरोपी जेल में बंद थे। आरोपी पक्ष के लोग समझौता नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दे रहे थे। इसको लेकर आरोपी पक्ष के बिल्लू, मोनू समेत चार लोगों ने घर में घुसकर हमला कर दिया। हमलावरों ने उसके फूफा दलबीर पर चाकू से हमला कर घायल कर दिया। अपनी बुआ के साथ फूफा को बचाने गया तो हमलावरों ने फायरिंग कर दी, जिससे बाल-बाल बच गए।
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घायल दलबीर की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी मोनू, बिल्लू समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसमें एक आरोपी नाबालिग होने के चलते पत्रावली अलग कर दी गई, जबकि मोनू, बिल्लू समेत तीन की पत्रावली पर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष एससीएसटी में चल रही थी। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश विष्णु प्रसाद अग्रवाल ने मोनू और बिल्लू पर दोषसिद्ध कर सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही बिल्लू पर 27 हजार रुपये और मोनू पर 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसे अदा नहीं करने पर एक-एक साल की सजा बढ़ाई जाएगी, जबकि तीसरे आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
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