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Baghpat News: साधु पहले नवादा में पिटा, फिर सिंगौली तगा के डेरे से भगाया गया
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बागपत। लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर परिसर में दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद शव गड्ढे में दबाने वाला साधु नरेशनाथ की करतूत से पहले नवादा गांव के लोग परेशान हो गए, जिन्होंने एक साल पहले पिटाई करने के बाद उसे वहां से भगा दिया। इसके बाद सिंगौली तगा गांव के बाबा हरनामदास महाराज के डेरे से भगा दिया गया, जो पिछले एक माह से लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर में रहने लगा था।
लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर परिसर में दोहरे हत्याकांड के बाद आरोपी साधु नरेशनाथ की पुलिस ने कुंडली खंगालनी शुरू कर दी। बताया गया कि हत्यारोपी साधु चार साल पहले पांच माह तक पूरनपुर नवादा गांव के शिव मंदिर में भी रहा। वहां पर तंत्र क्रिया करने और साधना के नाम पर महिलाओं को अपने साथ नचवाने पर ग्रामीण विरोध में उतर गए थे। इसको लेकर ग्रामीणों ने साधु की पिटाई कर दी थी। साधु नरेशनाथ ने पुलिस से ग्रामीणों की शिकायत कर दी थी। हालांकि कुछ गणमान्य लोगों ने समझौता कराने के बाद साधु नरेशनाथ को मंदिर से भगा दिया। इसके बाद साधु गाजियाबाद जिले के गनौली गांव में अपने परिचित के यहां रहा।
दिसंबर 2025 में ग्रामीणों से सिफारिश कराकर बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर आकर रहने लगा। डेरे पर रहने वाले सुरेंद्र कुमार ने बताया कि साधु नरेशनाथ ने यहां पर भी वही करतूत शुरू कर दी। सबसे पहले डेरे की धर्मशाला में ईंट लगवाकर बंद करा दी और हवनकुंड तुड़वाकर त्रिकुंड बनवाकर तांत्रिक क्रिया शुरू कर दी। यहां पर भी रात में गांव की महिलाओं को बुलाने लगा और देर रात तक डेरे में गाने बजाने शुरू कर दिए। कुछ दिन बाद डेरे में गुप्त कमरा बनवाने का काम शुरू करा दिया और फिर बाबा हरनामदास महाराज की कोठरी से जोड़कर शौचालय का निर्माण कराने लगा। इसको लेकर ग्रामीण विरोध में आ गए। गांव के लोगों ने सहमति करके दो माह पहले साधु को डेरे से भगा दिया था।
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लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर परिसर में दोहरे हत्याकांड के बाद आरोपी साधु नरेशनाथ की पुलिस ने कुंडली खंगालनी शुरू कर दी। बताया गया कि हत्यारोपी साधु चार साल पहले पांच माह तक पूरनपुर नवादा गांव के शिव मंदिर में भी रहा। वहां पर तंत्र क्रिया करने और साधना के नाम पर महिलाओं को अपने साथ नचवाने पर ग्रामीण विरोध में उतर गए थे। इसको लेकर ग्रामीणों ने साधु की पिटाई कर दी थी। साधु नरेशनाथ ने पुलिस से ग्रामीणों की शिकायत कर दी थी। हालांकि कुछ गणमान्य लोगों ने समझौता कराने के बाद साधु नरेशनाथ को मंदिर से भगा दिया। इसके बाद साधु गाजियाबाद जिले के गनौली गांव में अपने परिचित के यहां रहा।
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दिसंबर 2025 में ग्रामीणों से सिफारिश कराकर बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर आकर रहने लगा। डेरे पर रहने वाले सुरेंद्र कुमार ने बताया कि साधु नरेशनाथ ने यहां पर भी वही करतूत शुरू कर दी। सबसे पहले डेरे की धर्मशाला में ईंट लगवाकर बंद करा दी और हवनकुंड तुड़वाकर त्रिकुंड बनवाकर तांत्रिक क्रिया शुरू कर दी। यहां पर भी रात में गांव की महिलाओं को बुलाने लगा और देर रात तक डेरे में गाने बजाने शुरू कर दिए। कुछ दिन बाद डेरे में गुप्त कमरा बनवाने का काम शुरू करा दिया और फिर बाबा हरनामदास महाराज की कोठरी से जोड़कर शौचालय का निर्माण कराने लगा। इसको लेकर ग्रामीण विरोध में आ गए। गांव के लोगों ने सहमति करके दो माह पहले साधु को डेरे से भगा दिया था।
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