{"_id":"6a7e28668792f7de9b0d8362","slug":"crime-news-baghpat-news-c-28-1-bag1001-156991-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से साम्राज्य बढ़ा रहा था साधु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से साम्राज्य बढ़ा रहा था साधु
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रटौल। सिंगौली तगा गांव के अंकित और इसरार की हत्या करने का आरोपी साधु नरेश नाथ सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से अपना साम्राज्य बढ़ा रहा था। सट्टे के नंबरों को लेकर साधु के पास अक्सर दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों से लोग आते रहते थे, जिनके साथ सट्टे की रकम को लेकर विवाद भी हुआ।
सिंगौली तगा के रहने वाले अंकुश, विकास आदि ने बताया कि दिसंबर 2025 में साधु नरेशनाथ बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर आया था। नरेशनाथ ने डेरे में आने के बाद वहां सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे, एसी और एलईडी, वाशिंग मशीन समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की। साधु के डेरे में आने का पता चलने पर उसके परिचित भी वहां आने लगे। दिनभर बाहरी लोगों का आना और रात में महिलाओं को बुलाना ग्रामीणों को अखरने लगा था। इसके अलावा गांव के कई वीरपाल समेत कई लोगों से तंत्र क्रिया के नाम पर रुपये भी लिए। रुपये वापस मांगने पर लोगों के साथ झगड़ा भी हुआ।
चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था नरेशनाथ
सिंगौली तगा गांव के विकास ने बताया कि साधु कहां का रहने वाला है, इसके बारे में किसी भी ग्रामीण को नहीं पता। कुछ दिन बाद गांव के एक जनप्रतिनिधि के साथ मिलकर साधु नरेशनाथ ने अपने आधार कार्ड में पता बदलवाकर सिंगौली तगा का करवा लिया था। बातचीत के दौरान नरेशनाथ सिंगौली तगा गांव से चुनाव लड़ने की बात भी कहता था और गांव के लोगों से मिलकर तैयारी करने की बात भी करता था।
विज्ञापन
पूजा की जोत और रुई भी उठाकर ले गया
विकास ने बताया कि नरेशनाथ को मंदिर से भगा दिया गया। इसके कई दिन बाद अपने कुछ साथियों के साथ गाड़ी लेकर वहां आया और डेरे में घुसकर अपना सामान लेकर चला गया। बताया कि अपने सामान के साथ डेरे में पहले से लगे पंखे, लोहे के सामान, बर्तन, भंडारे से कई लाख रुपये का सामान भी ले गया और कोठरी की चौखट उखाड़ने का प्रयास भी किया। ग्रामीणों के विरोध करने पर चौखट उखाड़ नहीं पाया और वहां से चला गया।
झूठ बोलकर जीत रहा था भरोसा
ग्रामीण विकास ने बताया कि सिंगौली तगा और लहचौड़ा गांव ब्राह्मण बाहुल्य है, इसलिए नरेशनाथ ने खुद को ब्राह्मण कुल का होना बताकर लोगों का भरोसा जीतना शुरू कर दिया। इसके बाद लोगों के सामने खुद को दूसरी जाति का बताने लगा था। लेकिन सही जानकारी किसी को नहीं दी। नरेशनाथ खुद को अविवाहिता बताता था, जबकि उसकी पत्नी और बेटा भी उसके आसपास ही रहते थे। आठ-दस दिन तक साधु की पत्नी डेरे में ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में रही, जिसे लोगों के आने से पहले ही कमरे में भेज देता था। साधु की पत्नी के कपड़े देखकर ग्रामीणों ने आपत्ति भी जताई थी। इसके बाद पास के किसी गांव में कमरा किराये पर लेकर दोनों को वहां भेज दिया।
विज्ञापन
सिंगौली तगा के रहने वाले अंकुश, विकास आदि ने बताया कि दिसंबर 2025 में साधु नरेशनाथ बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर आया था। नरेशनाथ ने डेरे में आने के बाद वहां सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे, एसी और एलईडी, वाशिंग मशीन समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की। साधु के डेरे में आने का पता चलने पर उसके परिचित भी वहां आने लगे। दिनभर बाहरी लोगों का आना और रात में महिलाओं को बुलाना ग्रामीणों को अखरने लगा था। इसके अलावा गांव के कई वीरपाल समेत कई लोगों से तंत्र क्रिया के नाम पर रुपये भी लिए। रुपये वापस मांगने पर लोगों के साथ झगड़ा भी हुआ।
विज्ञापन
चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था नरेशनाथ
सिंगौली तगा गांव के विकास ने बताया कि साधु कहां का रहने वाला है, इसके बारे में किसी भी ग्रामीण को नहीं पता। कुछ दिन बाद गांव के एक जनप्रतिनिधि के साथ मिलकर साधु नरेशनाथ ने अपने आधार कार्ड में पता बदलवाकर सिंगौली तगा का करवा लिया था। बातचीत के दौरान नरेशनाथ सिंगौली तगा गांव से चुनाव लड़ने की बात भी कहता था और गांव के लोगों से मिलकर तैयारी करने की बात भी करता था।
विज्ञापन
पूजा की जोत और रुई भी उठाकर ले गया
विकास ने बताया कि नरेशनाथ को मंदिर से भगा दिया गया। इसके कई दिन बाद अपने कुछ साथियों के साथ गाड़ी लेकर वहां आया और डेरे में घुसकर अपना सामान लेकर चला गया। बताया कि अपने सामान के साथ डेरे में पहले से लगे पंखे, लोहे के सामान, बर्तन, भंडारे से कई लाख रुपये का सामान भी ले गया और कोठरी की चौखट उखाड़ने का प्रयास भी किया। ग्रामीणों के विरोध करने पर चौखट उखाड़ नहीं पाया और वहां से चला गया।
झूठ बोलकर जीत रहा था भरोसा
ग्रामीण विकास ने बताया कि सिंगौली तगा और लहचौड़ा गांव ब्राह्मण बाहुल्य है, इसलिए नरेशनाथ ने खुद को ब्राह्मण कुल का होना बताकर लोगों का भरोसा जीतना शुरू कर दिया। इसके बाद लोगों के सामने खुद को दूसरी जाति का बताने लगा था। लेकिन सही जानकारी किसी को नहीं दी। नरेशनाथ खुद को अविवाहिता बताता था, जबकि उसकी पत्नी और बेटा भी उसके आसपास ही रहते थे। आठ-दस दिन तक साधु की पत्नी डेरे में ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में रही, जिसे लोगों के आने से पहले ही कमरे में भेज देता था। साधु की पत्नी के कपड़े देखकर ग्रामीणों ने आपत्ति भी जताई थी। इसके बाद पास के किसी गांव में कमरा किराये पर लेकर दोनों को वहां भेज दिया।