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Baghpat News: दो मार्च को होलिका दहन, चार मार्च को मनाया जाएगा रंगोत्सव
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-भद्रा के पुच्छ काल में रात 12.50 से रात दो बजे तक दहन का शुभ मुहूर्त
- सुबह 6.20 बजे से लगेगा सूतक, दोपहर 3.20 बजे से शुरू होगा चंद्रग्रहण
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। होेलिका पूजन और दहन का त्योहार दो मार्च व रंगोत्सव का त्योहार चार मार्च को मनाया जाएगा। इस बार तीन मार्च को चंद्र ग्रहण और शाम पांच बजकर सात मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। रंगोत्सव का त्योहार प्रतिपदा तिथि में मनाना ही शास्त्र संगत है। दो मार्च को शाम पांच बजकर 56 मिनट पर पूर्णिमा तिथि का प्रवेश होगा। रात्रि में 12 बजकर 50 मिनट से रात्रि में दो बजे तक भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है।
शहर के बाबा जानकीदास मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इस बार होली और रंगोत्सव के त्योहार को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि और रंगोत्सव का त्योहार प्रतिपदा तिथि में मनाने का विधान है। इस बार दो मार्च को शाम 5 बजकर 56 पर पूर्णिमा तिथि का प्रवेश होगा और तीन मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट तक पूर्णिमा समाप्त होगी। हालांकि दो मार्च को होलिका पूजन सुबह से ही शुरू होगा। महिलाएं सुबह के समय होलिका का पूजन कर सकती है।
दो मार्च को रात्रि में 12 बजकर 50 मिनट से रात दो बजे तक भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। तीन मार्च को चंद्र ग्रहण और प्रतिपदा तिथि शाम को आने से रंगोत्सव का त्योहार चार मार्च को मनाया जाएगा। तीन मार्च को सुबह छह बजकर 20 मिनट पर सूतक लग जाएगा। दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर चंद्र ग्रहण शुरू होगा। 5 बजकर 3 मिनट ग्रहण का मध्य और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। ऐसे में तीन मार्च को रंगोत्सव का त्योहार मनाना शास्त्र संगत नहीं है। चंद्र ग्रहण के कारण सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक लग जाएगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।
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बागपत। होेलिका पूजन और दहन का त्योहार दो मार्च व रंगोत्सव का त्योहार चार मार्च को मनाया जाएगा। इस बार तीन मार्च को चंद्र ग्रहण और शाम पांच बजकर सात मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। रंगोत्सव का त्योहार प्रतिपदा तिथि में मनाना ही शास्त्र संगत है। दो मार्च को शाम पांच बजकर 56 मिनट पर पूर्णिमा तिथि का प्रवेश होगा। रात्रि में 12 बजकर 50 मिनट से रात्रि में दो बजे तक भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है।
शहर के बाबा जानकीदास मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इस बार होली और रंगोत्सव के त्योहार को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि और रंगोत्सव का त्योहार प्रतिपदा तिथि में मनाने का विधान है। इस बार दो मार्च को शाम 5 बजकर 56 पर पूर्णिमा तिथि का प्रवेश होगा और तीन मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट तक पूर्णिमा समाप्त होगी। हालांकि दो मार्च को होलिका पूजन सुबह से ही शुरू होगा। महिलाएं सुबह के समय होलिका का पूजन कर सकती है।
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दो मार्च को रात्रि में 12 बजकर 50 मिनट से रात दो बजे तक भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। तीन मार्च को चंद्र ग्रहण और प्रतिपदा तिथि शाम को आने से रंगोत्सव का त्योहार चार मार्च को मनाया जाएगा। तीन मार्च को सुबह छह बजकर 20 मिनट पर सूतक लग जाएगा। दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर चंद्र ग्रहण शुरू होगा। 5 बजकर 3 मिनट ग्रहण का मध्य और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। ऐसे में तीन मार्च को रंगोत्सव का त्योहार मनाना शास्त्र संगत नहीं है। चंद्र ग्रहण के कारण सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक लग जाएगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।
