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डिप्रेशन से बचने के लिए धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करें: नरेश मुनि
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बड़ौत। नगर के ऋषभदेव सभागार में रविवार को आयोजित धर्मसभा में जैन संत नरेश चंद्र मुनि ने अवसाद से बचने का उपाय बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक पुस्तकों का नियमित अध्ययन और धर्म का आचरण इस मानसिक बीमारी से मुक्ति दिला सकता है। संत मुनि ने बच्चों पर पढ़ाई के अत्यधिक बोझ को भी अवसाद का कारण बताया।
संत मुनि ने जोर देकर कहा कि यदि व्यक्ति प्रतिदिन थोड़ा धर्म करे और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करे, तो वह कभी अवसाद का शिकार नहीं होगा। उन्होंने बताया कि आज अवसाद के कारण दुनिया भर में कई भयानक बीमारियां बढ़ रही हैं, जो चिंता का विषय है। जैन संत ने यह भी सलाह दी कि बच्चों को उतनी ही पढ़ाई करनी चाहिए जितनी वे आसानी से समझ सकें। अत्यधिक पढ़ाई का दबाव बच्चों में अवसाद पैदा करता है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवसाद से पीड़ित मरीज यदि त्याग और तपस्या जैसे धार्मिक अनुष्ठान करे, तो उसे दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह आध्यात्मिक अभ्यास मन को शांत और स्थिर रखने में सहायक होता है। तपस्या का फल निश्चित रूप से मिलता है, जिसके लिए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करनी चाहिए। इस प्रकार, आध्यात्मिक मार्ग व्यक्ति को आंतरिक शांति और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। धर्मसभा में प्रधान घसीटूमल जैन, राजीव जैन, शिखर चंद जैन, संजय जैन, मुकुल, आरती, सिद्धम आदि उपस्थित रहे।
संत मुनि ने जोर देकर कहा कि यदि व्यक्ति प्रतिदिन थोड़ा धर्म करे और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करे, तो वह कभी अवसाद का शिकार नहीं होगा। उन्होंने बताया कि आज अवसाद के कारण दुनिया भर में कई भयानक बीमारियां बढ़ रही हैं, जो चिंता का विषय है। जैन संत ने यह भी सलाह दी कि बच्चों को उतनी ही पढ़ाई करनी चाहिए जितनी वे आसानी से समझ सकें। अत्यधिक पढ़ाई का दबाव बच्चों में अवसाद पैदा करता है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवसाद से पीड़ित मरीज यदि त्याग और तपस्या जैसे धार्मिक अनुष्ठान करे, तो उसे दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह आध्यात्मिक अभ्यास मन को शांत और स्थिर रखने में सहायक होता है। तपस्या का फल निश्चित रूप से मिलता है, जिसके लिए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करनी चाहिए। इस प्रकार, आध्यात्मिक मार्ग व्यक्ति को आंतरिक शांति और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। धर्मसभा में प्रधान घसीटूमल जैन, राजीव जैन, शिखर चंद जैन, संजय जैन, मुकुल, आरती, सिद्धम आदि उपस्थित रहे।
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