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Baghpat News: कथा में इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला सुनाई
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फोटो-15
संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली। सिनौली गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक भागवत भारद्वाज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्रदेव के अहंकार को समाप्त करने की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। गोवर्धन प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाने लगे।
कथा वाचक ने बताया कि गोकुल में जब इंद्रदेव की पूजा की तैयारी चल रही थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से इंद्र पूजा का कारण पूछा। गोकुलवासियों ने बताया कि इंद्रदेव वर्षा और वायु प्रदान करते हैं, जिससे खेती होती है और जीवन संभव है। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि पूजा उसी की होनी चाहिए, जो प्रत्यक्ष रूप से जीवन का आधार है। उन्होंने गोकुलवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया। इस पर गोकुलवासियों ने इंद्रदेव की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने गोकुल पर मूसलाधार वर्षा और आंधी चला दी, जिससे चारों ओर हाहाकार मच गया। कथा वाचक ने बताया कि तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी गोकुलवासियों को उसके नीचे सुरक्षित स्थान प्रदान किया। यह देखकर इंद्रदेव का अहंकार टूट गया और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। कथा में नरेश शर्मा, मोनू, कृष्णपाल, अनिल कुमार, दिनेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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छपरौली। सिनौली गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक भागवत भारद्वाज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्रदेव के अहंकार को समाप्त करने की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। गोवर्धन प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाने लगे।
कथा वाचक ने बताया कि गोकुल में जब इंद्रदेव की पूजा की तैयारी चल रही थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से इंद्र पूजा का कारण पूछा। गोकुलवासियों ने बताया कि इंद्रदेव वर्षा और वायु प्रदान करते हैं, जिससे खेती होती है और जीवन संभव है। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि पूजा उसी की होनी चाहिए, जो प्रत्यक्ष रूप से जीवन का आधार है। उन्होंने गोकुलवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया। इस पर गोकुलवासियों ने इंद्रदेव की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने गोकुल पर मूसलाधार वर्षा और आंधी चला दी, जिससे चारों ओर हाहाकार मच गया। कथा वाचक ने बताया कि तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी गोकुलवासियों को उसके नीचे सुरक्षित स्थान प्रदान किया। यह देखकर इंद्रदेव का अहंकार टूट गया और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। कथा में नरेश शर्मा, मोनू, कृष्णपाल, अनिल कुमार, दिनेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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