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Baghpat News: युद्ध ने तोड़ दी उद्योगों की कमर, 40 फीसदी रह गया उत्पादन
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युद्ध ने तोड़ दी उद्योगों की कमर, 40 फीसदी रह गया उत्पादन
-दोगुने दामों पर आ रहा कच्चा माल, युद्ध लंबा चला तो बंद हो जाएंगी कई फैक्टरियां
फोटो 9 की सीरिज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से जिले के उद्योग की कमर टूट गई है। फैक्टरियों में उत्पादन घटकर 40 फीसदी से भी कम हो गया, क्योंकि कच्चा माल दोगुनी कीमत पर मिल रहा है। ऐसे में जहां करोड़ों रुपये के ऑर्डर निरस्त हो गए, वहीं नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।
जिले में छोटी और बड़ी 200 से अधिक फैक्टरियां संचालित हैं, जहां हैंडलूम, घरेलू साज-सज्जा, पैकेजिंग, प्लास्टिक के उत्पाद, रिमधुरे तैयार किए जाते हैं। फैक्टरियों में उत्पादों को तैयार करने के लिए दूसरे देशों से कच्चा माल मंगाया जाता है। अब इस्राइल-अमेरिका और ईरान में युद्ध से कच्चे माल के दाम दोगुने हो गए हैं। फैक्टरियों में प्रयोग होने वाला प्लास्टिक दाना 85 रुपये किलो से बढ़कर 170 रुपये किलो हो गया, लोहे की शीट 47 रुपये किलो से बढ़कर 74 रुपये किलो हो गई। सरिये पर 15 रुपये किलो और पैकेजिंग में प्रयोग होने वाले कागज का दाम भी 30 रुपये से बढ़कर 45 रुपये किलो हो गया है। पैकेजिंग वाली पॉलीथिन भी 120 रुपये से बढ़कर 200 रुपये किलो तक पहुंच गई है। स्टील 240 से बढ़कर 260 रुपये किलो, एल्यूमिनियम 274 से 370 रुपये किलो, कॉपर 800 से 1300 रुपये किलो तक महंगा हो गया है। इन देशों के बीच एक महीने से चल रहा युद्ध अगर लंबा चला तो जिले में कई फैक्टरियां ऐसी हैं, जहां उत्पादन पूरी तरह बंद हो जाएगा।
-युद्ध की वजह से प्लास्टिक दाने समेत अन्य कच्चे माल के दाम दोगुने तक हो गए हैं। इनसे फैक्टरियों में तैयार होने वाले उत्पादों की कीमत भी बढ़ गई है। ऑर्डर देने वाली कंपनियां अब महंगे उत्पाद लेने से इंकार कर रही हैं। -प्रदीप गुप्ता, उद्यमी
-स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर के दाम बढ़ने से फैक्टरी में बनने वाली मशीनों की लागत बढ़ गई है। पहले जो ऑर्डर मिले थे, वो निरस्त हो गए हैं। कच्चा माल महंगा होने से नए ऑर्डर नहीं मिल रहे। -एसके कुंडू, उद्यमी
-पैकेजिंग के लिए आने वाले कागज के दाम भी बढ़ गए, जिससे उत्पाद महंगे हो गए हैं। नए ऑर्डर नहीं मिलने के कारण उत्पादन कम कर दिया गया है। इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोकेश कुमार, उद्यमी
-फैक्टरी में प्लास्टिक दाने से उत्पाद तैयार किए जाते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद प्लास्टिक दाने की कीमत दोगुनी हो गई हैं। नए ऑर्डर नहीं मिलने के कारण उत्पादन काफी प्रभावित हो रहा है। -प्रदीप गुप्ता, उद्यमी।
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-दोगुने दामों पर आ रहा कच्चा माल, युद्ध लंबा चला तो बंद हो जाएंगी कई फैक्टरियां
फोटो 9 की सीरिज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से जिले के उद्योग की कमर टूट गई है। फैक्टरियों में उत्पादन घटकर 40 फीसदी से भी कम हो गया, क्योंकि कच्चा माल दोगुनी कीमत पर मिल रहा है। ऐसे में जहां करोड़ों रुपये के ऑर्डर निरस्त हो गए, वहीं नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।
जिले में छोटी और बड़ी 200 से अधिक फैक्टरियां संचालित हैं, जहां हैंडलूम, घरेलू साज-सज्जा, पैकेजिंग, प्लास्टिक के उत्पाद, रिमधुरे तैयार किए जाते हैं। फैक्टरियों में उत्पादों को तैयार करने के लिए दूसरे देशों से कच्चा माल मंगाया जाता है। अब इस्राइल-अमेरिका और ईरान में युद्ध से कच्चे माल के दाम दोगुने हो गए हैं। फैक्टरियों में प्रयोग होने वाला प्लास्टिक दाना 85 रुपये किलो से बढ़कर 170 रुपये किलो हो गया, लोहे की शीट 47 रुपये किलो से बढ़कर 74 रुपये किलो हो गई। सरिये पर 15 रुपये किलो और पैकेजिंग में प्रयोग होने वाले कागज का दाम भी 30 रुपये से बढ़कर 45 रुपये किलो हो गया है। पैकेजिंग वाली पॉलीथिन भी 120 रुपये से बढ़कर 200 रुपये किलो तक पहुंच गई है। स्टील 240 से बढ़कर 260 रुपये किलो, एल्यूमिनियम 274 से 370 रुपये किलो, कॉपर 800 से 1300 रुपये किलो तक महंगा हो गया है। इन देशों के बीच एक महीने से चल रहा युद्ध अगर लंबा चला तो जिले में कई फैक्टरियां ऐसी हैं, जहां उत्पादन पूरी तरह बंद हो जाएगा।
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-युद्ध की वजह से प्लास्टिक दाने समेत अन्य कच्चे माल के दाम दोगुने तक हो गए हैं। इनसे फैक्टरियों में तैयार होने वाले उत्पादों की कीमत भी बढ़ गई है। ऑर्डर देने वाली कंपनियां अब महंगे उत्पाद लेने से इंकार कर रही हैं। -प्रदीप गुप्ता, उद्यमी
-स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर के दाम बढ़ने से फैक्टरी में बनने वाली मशीनों की लागत बढ़ गई है। पहले जो ऑर्डर मिले थे, वो निरस्त हो गए हैं। कच्चा माल महंगा होने से नए ऑर्डर नहीं मिल रहे। -एसके कुंडू, उद्यमी
-पैकेजिंग के लिए आने वाले कागज के दाम भी बढ़ गए, जिससे उत्पाद महंगे हो गए हैं। नए ऑर्डर नहीं मिलने के कारण उत्पादन कम कर दिया गया है। इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोकेश कुमार, उद्यमी
-फैक्टरी में प्लास्टिक दाने से उत्पाद तैयार किए जाते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद प्लास्टिक दाने की कीमत दोगुनी हो गई हैं। नए ऑर्डर नहीं मिलने के कारण उत्पादन काफी प्रभावित हो रहा है। -प्रदीप गुप्ता, उद्यमी।