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विश्व कैंसर दिवस: कैंसर को मात दी और मिल गई नई जिंदगी
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बागपत। कैंसर का पता चलने पर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, बल्कि उपचार कराने के साथ खानपान का बेहतर ध्यान रखना चाहिए। इस तरह कैंसर को मात दी जा सकती है। जिले में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कैंसर को मात देकर नई जिंदगी शुरू की। अब वह सामान्य जीवन जीते हैं।
चिकित्सक ने एक साल में दी कैंसर को मात सीएमओ कार्यालय में तैनात डॉ. कपिल सरोहा को ब्लड कैंसर था। जब उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराया तो कैंसर होने का संदेह हुआ। इसके बाद कई जांच कराई और कैंसर की पुष्टि होने के बाद तुरंत नोएडा के एक अस्पताल में कैंसर का उपचार शुरू कराया। शुरू के तीन माह में 12 से अधिक कीमो हुईं और फिर दवाई लेते रहे। एक साल में कैंसर को मात देकर नई जिदंगी की शुरुआत की। उनका कहना है कि यदि समय से उपचार शुरू किया जाए तो मानसिक रूप से मजबूत रहकर खानपान बेहतर रखें तो कैंसर को खत्म किया जा सकता है।
-अस्पताल प्रबंधक ने हिम्मत नहीं हारी, कैंसर से लड़कर जीते
जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉ. चैतन्य जैन ने बताया कि उनकी आंतों में कैंसर था। जब आंतों में दर्द हुआ तो जांच कराई और इसके बाद पता चला कि कैंसर है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उपचार चला। शुरू में एक ऑपरेशन हुआ और कीमो कराई। इसके बाद तीन अन्य ऑपरेशन हुए और एक साल तक उपचार चलता रहा। एक साल में ही कैंसर को मात दी और नए जीवन की शुरुआत की। यदि नियमित उपचार कराया जाए तो कैंसर की बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। वह कहते हैं कि कैंसर के मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत होना पड़ता है और समय से उपचार करवाना चाहिए।
-सिर से बाल खत्म होने से अजीब लगा, मगर हिम्मत नहीं हारी
स्वास्थ्य विभाग में तैनात रजनी को ब्रेस्ट कैंसर था। इसका जांच कराने पर पता चला। इसके बाद दिल्ली एम्स में उपचार शुरू कराया। शुरू के एक माह में कई कीमो हुई। फिर चिकित्सकों ने ऑपरेशन किया और नौ माह में ब्रेस्ट कैंसर को ठीक कर दिया। कई बार रेडिएशन भी हुआ। आज वह बिल्कुल ठीक हैं और उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं है। वह कहती हैं कि उपचार के दौरान जब सिर से बाल खत्म हो गए तो शुरू में काफी अजीब लगा, मगर हिम्मत नहीं हारी और कैंसर को मात दी।
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जिले में एक हजार से ज्यादा मरीज
जिले में कैंसर के करीब एक हजार मरीज हैं। यह दिल्ली, नोएडा व मेरठ में अपना उपचार करा रहे हैं। पिछले दस साल से कैंसर बड़ों के साथ-साथ बच्चों व महिलाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। हर गांव में कैंसर के मरीज हैं, इसके बावजूद उपचार की बात तो दूर, जिले में कैंसर रोग विशेषज्ञ तक नहीं है। सुविधाओं के अभाव में कैंसर पीड़ित दूसरे राज्यों व जनपदों में जाकर उपचार कराते हैं। कई बार आर्थिक तंगी व जागरुकता के अभाव में कैंसर पीड़ित बीच में ही उपचार छोड़ रहे हैं, इस कारण कैंसर से मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं।
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जिले में इस प्रकार के कैंसर के मरीज
ब्लड कैंसर, मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर, गले का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर आदि
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कैंसर से इस तरह बचाव संभव
- शराब का सेवन न करें
- रेडिएशन के संपर्क में आने से बचें
- फाइबर युक्त डाइट लें
- धूम्रपान करने से बचें
- डाइट में अधिक फैट न लें
- शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें
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चिकित्सक ने एक साल में दी कैंसर को मात सीएमओ कार्यालय में तैनात डॉ. कपिल सरोहा को ब्लड कैंसर था। जब उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराया तो कैंसर होने का संदेह हुआ। इसके बाद कई जांच कराई और कैंसर की पुष्टि होने के बाद तुरंत नोएडा के एक अस्पताल में कैंसर का उपचार शुरू कराया। शुरू के तीन माह में 12 से अधिक कीमो हुईं और फिर दवाई लेते रहे। एक साल में कैंसर को मात देकर नई जिदंगी की शुरुआत की। उनका कहना है कि यदि समय से उपचार शुरू किया जाए तो मानसिक रूप से मजबूत रहकर खानपान बेहतर रखें तो कैंसर को खत्म किया जा सकता है।
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-अस्पताल प्रबंधक ने हिम्मत नहीं हारी, कैंसर से लड़कर जीते
जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉ. चैतन्य जैन ने बताया कि उनकी आंतों में कैंसर था। जब आंतों में दर्द हुआ तो जांच कराई और इसके बाद पता चला कि कैंसर है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उपचार चला। शुरू में एक ऑपरेशन हुआ और कीमो कराई। इसके बाद तीन अन्य ऑपरेशन हुए और एक साल तक उपचार चलता रहा। एक साल में ही कैंसर को मात दी और नए जीवन की शुरुआत की। यदि नियमित उपचार कराया जाए तो कैंसर की बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। वह कहते हैं कि कैंसर के मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत होना पड़ता है और समय से उपचार करवाना चाहिए।
-सिर से बाल खत्म होने से अजीब लगा, मगर हिम्मत नहीं हारी
स्वास्थ्य विभाग में तैनात रजनी को ब्रेस्ट कैंसर था। इसका जांच कराने पर पता चला। इसके बाद दिल्ली एम्स में उपचार शुरू कराया। शुरू के एक माह में कई कीमो हुई। फिर चिकित्सकों ने ऑपरेशन किया और नौ माह में ब्रेस्ट कैंसर को ठीक कर दिया। कई बार रेडिएशन भी हुआ। आज वह बिल्कुल ठीक हैं और उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं है। वह कहती हैं कि उपचार के दौरान जब सिर से बाल खत्म हो गए तो शुरू में काफी अजीब लगा, मगर हिम्मत नहीं हारी और कैंसर को मात दी।
जिले में एक हजार से ज्यादा मरीज
जिले में कैंसर के करीब एक हजार मरीज हैं। यह दिल्ली, नोएडा व मेरठ में अपना उपचार करा रहे हैं। पिछले दस साल से कैंसर बड़ों के साथ-साथ बच्चों व महिलाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। हर गांव में कैंसर के मरीज हैं, इसके बावजूद उपचार की बात तो दूर, जिले में कैंसर रोग विशेषज्ञ तक नहीं है। सुविधाओं के अभाव में कैंसर पीड़ित दूसरे राज्यों व जनपदों में जाकर उपचार कराते हैं। कई बार आर्थिक तंगी व जागरुकता के अभाव में कैंसर पीड़ित बीच में ही उपचार छोड़ रहे हैं, इस कारण कैंसर से मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं।
जिले में इस प्रकार के कैंसर के मरीज
ब्लड कैंसर, मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर, गले का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर आदि
कैंसर से इस तरह बचाव संभव
- शराब का सेवन न करें
- रेडिएशन के संपर्क में आने से बचें
- फाइबर युक्त डाइट लें
- धूम्रपान करने से बचें
- डाइट में अधिक फैट न लें
- शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें
