{"_id":"69c2daa99657ea050a08dcf4","slug":"1360-crore-will-be-spent-to-save-11-villages-from-erosion-bahraich-news-c-98-1-bhr1024-146310-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: 11 गांवों को कटान से बचाने के लिए खर्च होंगे 13.60 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: 11 गांवों को कटान से बचाने के लिए खर्च होंगे 13.60 करोड़
विज्ञापन
मौरहवा में स्थित सरयू नदी में इसी जगह होगा कटान निरोधक कार्य।
- फोटो : मौरहवा में स्थित सरयू नदी में इसी जगह होगा कटान निरोधक कार्य।
विज्ञापन
बहराइच। जिले की मिहींपुरवा और नानपारा तहसील में सरयू नदी के मुहाने पर बसे गांवों के लिए राहत भरी खबर है। वर्षों से कटान और बाढ़ की मार झेल रहे करीब 11 गांवों को अब 13.60 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षित किया जाएगा। इसके लिए बजट को मंजूरी मिल चुकी है। मिहींपुरवा में गांवों को सुरक्षित करने का कार्य भी मंगलवार से शुरू हो गया है।
सरयू नदी के मुहाने पर बसे मिहींपुरवा और नानपारा तहसील के गांव हर वर्ष बाढ़ और कटान की चपेट में आते हैं। इससे ग्रामीणों को अपना घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर होना पड़ता है। मिहींपुरवा के ग्राम पंचायत सुजौली, जंगल गुलरिया, चहलवा और बरखड़िया में स्थिति काफी भयावह हो जाती है। अब तक सैकड़ों किसानों की उपजाऊ जमीन और घर नदी में समा चुके हैं।
लगभग यही हाल नानपारा तहसील में सरयू नदी के किनारे बसे गांवों का भी होता है। ऐसे मे नानपारा तहसील के पांच गांवों की सुरक्षा पर 3 करोड़ 51 लाख 44 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि मिहींपुरवा के छह गांवों को सुरक्षित करने के लिए 10 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये खर्च होंगे। गांवों को बचाने और कटान निरोधक कार्य कराने की जिम्मेदारी सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम को सौंपी गई है। मौरहवा क्षेत्र में नदी की कटान रोकने के लिए ड्रेजर मशीन, जेसीबी, पोकलेन मशीन और सिंचाई विभाग की बोट मौके पर पहुंच चुकी हैं। 90 दिनों के भीतर नदी की धारा मोड़कर कटान निरोधक कार्य पूरे किए जाएंगे। ताकि आगामी बाढ़ से पहले गांवों को सुरक्षित किया जा सके। (संवाद)
नदी के मुहाने पर हैं ये गांव
मिहींपुरवा : निषाद नगर, मोहरवा, आनंदनगर, बिहारीपुरवा, जयश्रीपुरवा और सतहवा गांव।
नानपारा : नारायणपुर कला, गुलालपुरवा, नई बस्ती, अहिरनपुरवा और टिपरी गांव
बरसात से पहले पूरा होगा काम
अधीक्षण अभियंता श्याम चौबे ने बताया कि नानपारा और मिहींपुरवा क्षेत्र में कटान रोकने के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। दोनों परियोजनाओं के जरिये सरयू के किनारे बसे 11 गांवों को सुरक्षित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि बरसात से पहले सभी कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएं, जिससे लोगों को राहत मिल सके।
इस तरह मोड़ी जाएगी नदी की धारा
जहां गांवों के सामने कटान होता है, वहां बल्ली पाइलिंग कर रेत से भरी बोरियां और जियो बैग डाले जाएंगे। इससे नदी की धारा टकराकर गांव की ओर नहीं आएगी। इसके अलावा बोल्डर का भी उपयोग किया जाएगा।
Trending Videos
सरयू नदी के मुहाने पर बसे मिहींपुरवा और नानपारा तहसील के गांव हर वर्ष बाढ़ और कटान की चपेट में आते हैं। इससे ग्रामीणों को अपना घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर होना पड़ता है। मिहींपुरवा के ग्राम पंचायत सुजौली, जंगल गुलरिया, चहलवा और बरखड़िया में स्थिति काफी भयावह हो जाती है। अब तक सैकड़ों किसानों की उपजाऊ जमीन और घर नदी में समा चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
लगभग यही हाल नानपारा तहसील में सरयू नदी के किनारे बसे गांवों का भी होता है। ऐसे मे नानपारा तहसील के पांच गांवों की सुरक्षा पर 3 करोड़ 51 लाख 44 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि मिहींपुरवा के छह गांवों को सुरक्षित करने के लिए 10 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये खर्च होंगे। गांवों को बचाने और कटान निरोधक कार्य कराने की जिम्मेदारी सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम को सौंपी गई है। मौरहवा क्षेत्र में नदी की कटान रोकने के लिए ड्रेजर मशीन, जेसीबी, पोकलेन मशीन और सिंचाई विभाग की बोट मौके पर पहुंच चुकी हैं। 90 दिनों के भीतर नदी की धारा मोड़कर कटान निरोधक कार्य पूरे किए जाएंगे। ताकि आगामी बाढ़ से पहले गांवों को सुरक्षित किया जा सके। (संवाद)
नदी के मुहाने पर हैं ये गांव
मिहींपुरवा : निषाद नगर, मोहरवा, आनंदनगर, बिहारीपुरवा, जयश्रीपुरवा और सतहवा गांव।
नानपारा : नारायणपुर कला, गुलालपुरवा, नई बस्ती, अहिरनपुरवा और टिपरी गांव
बरसात से पहले पूरा होगा काम
अधीक्षण अभियंता श्याम चौबे ने बताया कि नानपारा और मिहींपुरवा क्षेत्र में कटान रोकने के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। दोनों परियोजनाओं के जरिये सरयू के किनारे बसे 11 गांवों को सुरक्षित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि बरसात से पहले सभी कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएं, जिससे लोगों को राहत मिल सके।
इस तरह मोड़ी जाएगी नदी की धारा
जहां गांवों के सामने कटान होता है, वहां बल्ली पाइलिंग कर रेत से भरी बोरियां और जियो बैग डाले जाएंगे। इससे नदी की धारा टकराकर गांव की ओर नहीं आएगी। इसके अलावा बोल्डर का भी उपयोग किया जाएगा।