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Bahraich: सोहरवा मस्जिद मामले में हाईकोर्ट की दखल, प्रशासनिक कार्रवाई पर लगी न्यायिक शर्त
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 18 Jun 2026 07:56 PM IST
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सार
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार को मामले में 22 जुलाई को अपना पक्ष रखने को कहा। खंडपीठ ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि मामले में की जाने वाली किसी भी कार्रवाई पर न्यायालय के आगामी निर्देश लागू होंगे।
- फोटो : X/fazenda_dom_pedro
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विस्तार
बहराइच-नानपारा मार्ग स्थित सोहरवा वक्फ मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हस्तक्षेप करते हुए वक्फ पक्ष को अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मामले की प्रशासनिक कार्रवाई आगामी आदेशों के अधीन होगी। इसके साथ ही राज्य सरकार को मामले में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने का आदेश दिया गया है। अगली सुनवाई 22 जून को होगी।
सोहरवा स्थित वक्फ संख्या-1249 की मस्जिद को एनएचएआई ने अतिक्रमण की जद में बताया था। इस पर मस्जिद के केयरटेकर शाहिद अहमद समेत अन्य की ओर से प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की शरण ली।
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मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ में हुई। वक्फ पक्ष की ओर से अधिवक्ता सैयद फारूक अहमद, अकरम आजाद और फराज अहमद ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता उपस्थित हुए। अन्य पक्षों की ओर से अधिवक्ता फरहान हबीब और सर्वेश कुमार दुबे ने अपना पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार को मामले में 22 जुलाई को अपना पक्ष रखने को कहा। खंडपीठ ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि मामले में की जाने वाली किसी भी कार्रवाई पर न्यायालय के आगामी निर्देश लागू होंगे।
हाईवे अतिक्रमण विवाद से जुड़ा है मामला
यह विवाद बहराइच-नानपारा राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण और भूमि संबंधी मुद्दों से जुड़ा हुआ है। संबंधित मस्जिद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की चर्चा के बीच मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। अदालत के ताजा आदेश के बाद फिलहाल मस्जिद पक्ष को राहत मिली है और पूरा मामला न्यायिक निगरानी में आ गया है।
22 जून की सुनवाई होगी निर्णायक
अब सभी पक्षों की निगाहें 22 जून को होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं। उस दिन राज्य सरकार अदालत को अपना पक्ष और आवश्यक निर्देशों की जानकारी देगी। इसके बाद हाईकोर्ट यह तय कर सकता है कि मामले में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।