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Bahraich News: मजदूरी से राष्ट्रपति सम्मान तक, वनग्राम की भानुमती बनीं मिसाल
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sun, 08 Mar 2026 12:06 AM IST
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बहराइच। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर बच्चों का पेट पालने वाली वनग्राम टेड़िया की भानुमती आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। निरक्षर होने के बावजूद, अपने दृढ़ संकल्प और सामाजिक सेवा के बल पर वह एक दशक पहले देश की सौ सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में स्थान बनाने में सफल रही थीं। टेड़िया जैसे छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली भानुमती की कहानी अब महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बन चुकी है।
भानुमती के जीवन में निर्णायक मोड़ करीब दस वर्ष पहले आया, जब उनकी भेंट समाजसेवी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी से हुई। डॉ. चतुर्वेदी ने जब वनग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन शुरू किया, तो भानुमती भी इससे प्रेरित होकर वनग्राम आजादी आंदोलन से जुड़ गईं। औपचारिक शिक्षा न होने के बाद भी उनकी बेबाक शैली और अद्भुत नेतृत्व क्षमता ने उन्हें जल्द ही महिलाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया और हजारों महिलाएं उनके नेतृत्व में संगठित होने लगीं। उन्होंने वनग्रामों के अधिकारों और उन्हें राजस्व ग्राम घोषित कराने के लिए कई पदयात्राएं, धरने और आंदोलन किए। मनरेगा में रोजगार दिलाना हो या ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, भानुमती हर मोर्चे पर सक्रिय रहीं। उन्होंने समाज में व्याप्त शराबखोरी और लिंगभेद जैसी बुराइयों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई। उनके इन्हीं निस्वार्थ और उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा 2016 में समाजसेवा के क्षेत्र में सम्मानित भी किया जा चुका है।
बाल विकास मंत्रालय की पहल पर हुई थी वोटिंग
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2016 में भानुमती जैसी महिलाओं को सम्मानित करने के लिए एक विशेष पहल शुरू की थी। इसके अंतर्गत फेसबुक के माध्यम से ऑनलाइन वोटिंग कराई गई, जिसमें देशभर की प्रतिभाशाली महिलाओं को नामांकित किया गया। इस चयन प्रक्रिया और जनसमर्थन के आधार पर देश की सौ सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची तैयार की गई। जिसमें भानुमती ने भी अपनी जगह बनाई।
गरीबी और निरक्षरता को कमजोरी नहीं, ताकत बनाएं महिलाएं
महिलाओं को प्रेरित करते हुए भानुमती ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि गरीबी या निरक्षरता कमजोरी नहीं है। यदि महिलाएं संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से शिक्षित होने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने पर जोर दिया। उनका कहना है कि मेहनत, हिम्मत और एकजुटता के बल पर हर महिला अपनी किस्मत खुद बदल सकती है।
थारू समाज को विकास की राह दिखा रहीं माधुरी
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित और जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर जनजातीय ग्राम पंचायत फकीरपुरी की प्रधान माधुरी देवी क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं। उनके नेतृत्व और जनसेवा के जज्बे ने उन्हें ग्रामीणों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। माधुरी देवी ने वर्ष 2000 में महज 21 वर्ष की आयु में पहली बार ग्राम प्रधान का चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था। वह लगातार दूसरी बार भी प्रधान चुनी गईं और 2010 तक गांव का नेतृत्व किया। हालांकि बीच के दो चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उनके कार्यों को देखते हुए वर्ष 2021 में ग्रामीणों ने एक बार फिर भारी बहुमत से उन्हें प्रधान चुना। दुर्गम क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद माधुरी देवी ने फकीरपुरी में शिक्षा के स्तर को सुधारने, स्वच्छता अभियान को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र ग्रामीणों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भानुमती और माधुरी देवी की ओर से 7 प्रेरक टिप्स
1. आत्मविश्वास सबसे बड़ी ताकत है
2. शिक्षा और जागरूकता जरूरी
3. संगठित होकर काम करें
4. सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाएं
5. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें
6. नेतृत्व करने से न हिचकें
7. धैर्य रखें और निरंतर प्रयास करें
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भानुमती के जीवन में निर्णायक मोड़ करीब दस वर्ष पहले आया, जब उनकी भेंट समाजसेवी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी से हुई। डॉ. चतुर्वेदी ने जब वनग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन शुरू किया, तो भानुमती भी इससे प्रेरित होकर वनग्राम आजादी आंदोलन से जुड़ गईं। औपचारिक शिक्षा न होने के बाद भी उनकी बेबाक शैली और अद्भुत नेतृत्व क्षमता ने उन्हें जल्द ही महिलाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया और हजारों महिलाएं उनके नेतृत्व में संगठित होने लगीं। उन्होंने वनग्रामों के अधिकारों और उन्हें राजस्व ग्राम घोषित कराने के लिए कई पदयात्राएं, धरने और आंदोलन किए। मनरेगा में रोजगार दिलाना हो या ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, भानुमती हर मोर्चे पर सक्रिय रहीं। उन्होंने समाज में व्याप्त शराबखोरी और लिंगभेद जैसी बुराइयों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई। उनके इन्हीं निस्वार्थ और उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा 2016 में समाजसेवा के क्षेत्र में सम्मानित भी किया जा चुका है।
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बाल विकास मंत्रालय की पहल पर हुई थी वोटिंग
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2016 में भानुमती जैसी महिलाओं को सम्मानित करने के लिए एक विशेष पहल शुरू की थी। इसके अंतर्गत फेसबुक के माध्यम से ऑनलाइन वोटिंग कराई गई, जिसमें देशभर की प्रतिभाशाली महिलाओं को नामांकित किया गया। इस चयन प्रक्रिया और जनसमर्थन के आधार पर देश की सौ सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची तैयार की गई। जिसमें भानुमती ने भी अपनी जगह बनाई।
गरीबी और निरक्षरता को कमजोरी नहीं, ताकत बनाएं महिलाएं
महिलाओं को प्रेरित करते हुए भानुमती ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि गरीबी या निरक्षरता कमजोरी नहीं है। यदि महिलाएं संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से शिक्षित होने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने पर जोर दिया। उनका कहना है कि मेहनत, हिम्मत और एकजुटता के बल पर हर महिला अपनी किस्मत खुद बदल सकती है।
थारू समाज को विकास की राह दिखा रहीं माधुरी
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित और जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर जनजातीय ग्राम पंचायत फकीरपुरी की प्रधान माधुरी देवी क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं। उनके नेतृत्व और जनसेवा के जज्बे ने उन्हें ग्रामीणों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। माधुरी देवी ने वर्ष 2000 में महज 21 वर्ष की आयु में पहली बार ग्राम प्रधान का चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था। वह लगातार दूसरी बार भी प्रधान चुनी गईं और 2010 तक गांव का नेतृत्व किया। हालांकि बीच के दो चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उनके कार्यों को देखते हुए वर्ष 2021 में ग्रामीणों ने एक बार फिर भारी बहुमत से उन्हें प्रधान चुना। दुर्गम क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद माधुरी देवी ने फकीरपुरी में शिक्षा के स्तर को सुधारने, स्वच्छता अभियान को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र ग्रामीणों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भानुमती और माधुरी देवी की ओर से 7 प्रेरक टिप्स
1. आत्मविश्वास सबसे बड़ी ताकत है
2. शिक्षा और जागरूकता जरूरी
3. संगठित होकर काम करें
4. सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाएं
5. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें
6. नेतृत्व करने से न हिचकें
7. धैर्य रखें और निरंतर प्रयास करें
