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कतर्नियाघाट : बढ़ेगा घड़ियालों का कुनबा, टापू पर बना रहे घोंसला
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:13 AM IST
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कतर्नियाघाट में गेरुआ नदी के टापू पर बैठा खड़ियाल। - स्रोत : वन विभाग
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बहराइच। कतर्नियाघाट में गेरुआ ओर कौड़ियाला नदी के टापू पर मादा घड़ियालों ने अपने अंडों को सुरक्षित रखने के लिए प्रारंभिक घोंसला बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वन विभाग की टीम इस प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रख रही है। घड़ियाल मार्च से अप्रैल के बीच बालू में घोंसला बनाकर अंडों को सुरक्षित करती हैं। शुरुआती दौर में टापू का निरीक्षण कर स्थान का चयन करती हैं, फिर वहीं अंडे देती हैं।
कौड़ियाला और गेरुआ नदी के टापू पर शुरू हुई घोंसला बनाने की प्रक्रिया लगभग 10 अप्रैल तक जारी रहेगी। इसके बाद चयनित स्थान पर मादा घड़ियाल अपने अंडों को सुरक्षित करेंगी। अप्रैल के शुरुआती सप्ताह से लेकर अंतिम सप्ताह तक अंडों की सुरक्षा की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जून में अंडों से बच्चे निकलेंगे, जिससे घड़ियालों का नया कुनबा सामने आएगा।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी केवल दुर्लभ वन्य जीवों के लिए ही नहीं, बल्कि जलीय जीवों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल है। यहां बहने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदी में गंगेटिक डॉल्फिन, मगरमच्छ, घड़ियाल व दुर्लभ प्रजाति की मछलियां और कछुए पाए जाते हैं। नदी जलीय जीवों का आश्रय स्थल होने के साथ ही घड़ियालों के कुनबे को बढ़ाने में भी सहायक है।
वन अधिकारियों के मुताबिक नदी के टापू पर प्रतिवर्ष मार्च से अप्रैल के मध्य मादा घड़ियाल घोंसला बनाकर अपने अंडों को सुरक्षित करती हैं। 15 जून के आसपास इन घोंसलों के अंडों से नए घड़ियालों का जन्म होता है। इस बार भी सीमेंट टावर के सामने स्थित टापू पर मादा घड़ियालों ने घोंसला बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वन विभाग ने उन्हें पहले ही चिह्वित कर वहां लगातार निगरानी रखी हुई है।
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जानिए क्या है प्रारंभिक घोंसला बनाने की प्रक्रिया
वन क्षेत्राधिकारी कतर्नियाघाट, आशीष गौड़ ने बताया कि गेरुआ और कौड़ियाला नदी में घड़ियाल की प्रारंभिक घोंसला बनाने की प्रक्रिया चल रही है। मादा घड़ियाल टापू पर लगभग एक सप्ताह से 10 दिन तक जमीन को अपने पंजों से खोदकर स्थान का चयन करती हैं। इसके बाद वहीं अंडे देती हैं। मादा घड़ियाल ऐसी जमीन चुनती हैं, जहां पानी न हो, बालू और भुरभुरी मिट्टी हो।
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30 से अधिक स्थानों पर बनाती हैं घोंसला
डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि हर बार लगभग 30 से अधिक स्थानों पर मादा घड़ियाल घोंसला बनाती हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचाने के लिए इस अवधि में टापू क्षेत्र में आम लोगों और पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। नाविकों और वनकर्मियों की टीम सुबह और शाम गश्त कर रही है, ताकि घोंसला बनाने की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
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पिछले साल सुरक्षित किए गए थे 200 नन्हे घड़ियाल
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जब घोंसले खुले थे, तब लगभग 200 नन्हे घड़ियालों को सुरक्षित बचाए गए थे, इनमें से कुछ अपनी-अपनी मां के साथ नदी में चले गए, जबकि जो टापू पर रह गए, उन्हें कतर्नियाघाट स्थित घड़ियाल संरक्षण केंद्र में रखा गया। इस बार भी उसी तरह की तैयारी की जा रही है।
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एक घोंसले में हो सकते हैं 20 से 50 अंडे
वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि मादा घड़ियाल के एक घोंसले (नेस्ट) में आमतौर पर 20 से 50 अंडे पाए जाते हैं। यह संख्या मादा की उम्र, स्वास्थ्य और स्थान की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। अंडों का इनक्यूबेशन (अंडों से बच्चे निकलने का समय) लगभग 60 दिन होता है।
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कौड़ियाला और गेरुआ नदी के टापू पर शुरू हुई घोंसला बनाने की प्रक्रिया लगभग 10 अप्रैल तक जारी रहेगी। इसके बाद चयनित स्थान पर मादा घड़ियाल अपने अंडों को सुरक्षित करेंगी। अप्रैल के शुरुआती सप्ताह से लेकर अंतिम सप्ताह तक अंडों की सुरक्षा की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जून में अंडों से बच्चे निकलेंगे, जिससे घड़ियालों का नया कुनबा सामने आएगा।
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कतर्नियाघाट सेंक्चुरी केवल दुर्लभ वन्य जीवों के लिए ही नहीं, बल्कि जलीय जीवों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल है। यहां बहने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदी में गंगेटिक डॉल्फिन, मगरमच्छ, घड़ियाल व दुर्लभ प्रजाति की मछलियां और कछुए पाए जाते हैं। नदी जलीय जीवों का आश्रय स्थल होने के साथ ही घड़ियालों के कुनबे को बढ़ाने में भी सहायक है।
वन अधिकारियों के मुताबिक नदी के टापू पर प्रतिवर्ष मार्च से अप्रैल के मध्य मादा घड़ियाल घोंसला बनाकर अपने अंडों को सुरक्षित करती हैं। 15 जून के आसपास इन घोंसलों के अंडों से नए घड़ियालों का जन्म होता है। इस बार भी सीमेंट टावर के सामने स्थित टापू पर मादा घड़ियालों ने घोंसला बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वन विभाग ने उन्हें पहले ही चिह्वित कर वहां लगातार निगरानी रखी हुई है।
जानिए क्या है प्रारंभिक घोंसला बनाने की प्रक्रिया
वन क्षेत्राधिकारी कतर्नियाघाट, आशीष गौड़ ने बताया कि गेरुआ और कौड़ियाला नदी में घड़ियाल की प्रारंभिक घोंसला बनाने की प्रक्रिया चल रही है। मादा घड़ियाल टापू पर लगभग एक सप्ताह से 10 दिन तक जमीन को अपने पंजों से खोदकर स्थान का चयन करती हैं। इसके बाद वहीं अंडे देती हैं। मादा घड़ियाल ऐसी जमीन चुनती हैं, जहां पानी न हो, बालू और भुरभुरी मिट्टी हो।
30 से अधिक स्थानों पर बनाती हैं घोंसला
डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि हर बार लगभग 30 से अधिक स्थानों पर मादा घड़ियाल घोंसला बनाती हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचाने के लिए इस अवधि में टापू क्षेत्र में आम लोगों और पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। नाविकों और वनकर्मियों की टीम सुबह और शाम गश्त कर रही है, ताकि घोंसला बनाने की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
पिछले साल सुरक्षित किए गए थे 200 नन्हे घड़ियाल
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जब घोंसले खुले थे, तब लगभग 200 नन्हे घड़ियालों को सुरक्षित बचाए गए थे, इनमें से कुछ अपनी-अपनी मां के साथ नदी में चले गए, जबकि जो टापू पर रह गए, उन्हें कतर्नियाघाट स्थित घड़ियाल संरक्षण केंद्र में रखा गया। इस बार भी उसी तरह की तैयारी की जा रही है।
एक घोंसले में हो सकते हैं 20 से 50 अंडे
वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि मादा घड़ियाल के एक घोंसले (नेस्ट) में आमतौर पर 20 से 50 अंडे पाए जाते हैं। यह संख्या मादा की उम्र, स्वास्थ्य और स्थान की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। अंडों का इनक्यूबेशन (अंडों से बच्चे निकलने का समय) लगभग 60 दिन होता है।