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Bahraich News: गन्ने के खेत में छिपे तेंदुए ने युवक पर किया हमला, ग्रामीणों ने बचाई जान
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तेंदुए के हमले में घायल अख्तर।
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे चंदनपुर गांव में बुधवार सुबह गन्ने खेत में छिपे तेंदुए ने खेत की निगरानी करने पहुंचे एक युवक पर हमला कर दिया। तेंदुए ने युवक को दबोचने की कोशिश की, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और शोर मचाते हुए करीब आठ मिनट तक संघर्ष करता रहा। इस बीच गांव के लोग लाठी-डंडे लेकर पहुंचे तो तेंदुआ युवक को छोड़कर झाड़ियों की ओर भाग गया।
मोतीपुर वन रेंज के चंदनपुर गांव निवासी अख्तर उर्फ झनकू (32) सुबह अपने खेत की ओर गए थे। गांव के बाहर गन्ने के खेत के पास पहुंचते ही वहां छिपे तेंदुए ने अचानक उन पर झपट्टा मार दिया। तेंदुए के हमले से अख्तर जमीन पर गिर पड़े, लेकिन उन्होंने शोर मचाते हुए खुद को बचाने का प्रयास जारी रखा। संघर्ष के दौरान तेंदुए ने उनके पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे जख्म कर दिए। उनकी चीख सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने उनकी जान बचाई।
इसके बाद उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोतीपुर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार किया। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से तेंदुए की गतिविधियां देखी जा रही थीं। कई बार पगचिह्न और हमले की आशंका की सूचना भी दी गई, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
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ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल क्षेत्र में पिंजरा लगाने, गश्त बढ़ाने और तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं।
गन्ने के खेत बन रहे तेंदुओं की शरणस्थली
वन अधिकारियों के अनुसार बरसात के मौसम में गन्ने के घने खेत तेंदुओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं। जंगल से निकलकर तेंदुए कई बार खेतों में छिप जाते हैं, जिससे किसानों और ग्रामीणों पर हमले का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग ने लोगों से अकेले खेतों में न जाने और समूह में काम करने की अपील की है।
मोतीपुर वन रेंज के चंदनपुर गांव निवासी अख्तर उर्फ झनकू (32) सुबह अपने खेत की ओर गए थे। गांव के बाहर गन्ने के खेत के पास पहुंचते ही वहां छिपे तेंदुए ने अचानक उन पर झपट्टा मार दिया। तेंदुए के हमले से अख्तर जमीन पर गिर पड़े, लेकिन उन्होंने शोर मचाते हुए खुद को बचाने का प्रयास जारी रखा। संघर्ष के दौरान तेंदुए ने उनके पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे जख्म कर दिए। उनकी चीख सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने उनकी जान बचाई।
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इसके बाद उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोतीपुर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार किया। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से तेंदुए की गतिविधियां देखी जा रही थीं। कई बार पगचिह्न और हमले की आशंका की सूचना भी दी गई, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल क्षेत्र में पिंजरा लगाने, गश्त बढ़ाने और तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं।
गन्ने के खेत बन रहे तेंदुओं की शरणस्थली
वन अधिकारियों के अनुसार बरसात के मौसम में गन्ने के घने खेत तेंदुओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं। जंगल से निकलकर तेंदुए कई बार खेतों में छिप जाते हैं, जिससे किसानों और ग्रामीणों पर हमले का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग ने लोगों से अकेले खेतों में न जाने और समूह में काम करने की अपील की है।