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Bahraich News: एक लाख की आबादी पर मंडरा रहा बाढ़ व कटान का खतरा
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महसी के बौंडी में बिसवां गांव के पास जर्जर हालत में तटबंध पर लगाई गई बोरियां।
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बहराइच। कभी सरयू (घाघरा) की उफनती लहरें बहराइच के 250 से अधिक गांवों और करीब चार की लाख आबादी के लिए तबाही का पैगाम लेकर आती थीं। समय के साथ नदी की धारा तटबंध से दूर जरूर खिसकी, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब भी जिले के 65 गांव हर साल बाढ़ और कटान की चपेट में आते हैं और करीब एक लाख लोग मानसून के साथ आने वाली आपदा का सामना करने को मजबूर होते हैं।
सरयू नदी के किनारे स्थित बेलहा-बहरौली तटबंध का निर्माण वर्ष 1956 में किया गया था। नानपारा के बलहा से लेकर जरवल के बेहरौली तक बने 95.5 किमी लंबे तटबंध को महसी और आसपास के क्षेत्रों के लिए बाढ़ सुरक्षा की लाइफलाइन माना जाता है। नानपारा से जरवल तक बनाए गए बेलहा-बहरौली तटबंध ने जिले को बड़ी राहत दी थी। इस तटबंध ने सरयू की लहरों को आबादी की ओर बढ़ने से रोका, लेकिन वर्षों बाद भी इसके कई हिस्से कमजोर बने हुए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही कटान और रिसाव का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून की दस्तक के साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिंता बढ़ने लगी है।
पिपरी गांव निवासी सजीवन और दुलारे का कहना है कि तटबंध से कई किलोमीटर दूर चली गई नदी अब भी बरसात में अचानक रुख बदल लेती है। ऐसे में कटान और जलभराव से फसलें, मकान और सड़कें प्रभावित होती हैं। बाढ़ सुरक्षा की जिम्मेदारी सरयू नहर खंड प्रथम पर है, लेकिन कई संवेदनशील स्थानों पर अभी तक समुचित मरम्मत नहीं की गई है।
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हर साल रिसता है तटबंध, फिर भी तैयारी अधूरी
महसी तहसील के विसवा गांव स्थित पीपल के पास, शिवपुर में किलोमीटर 28.500 के निकट तथा बेहटा मोड़ के निकट तटबंध के हिस्सों में हर वर्ष जलस्तर बढ़ने पर रिसाव की स्थिति बनती है। ग्रामीणों के मुताबिक, इस बार भी कई स्थानों पर रैट होल और कमजोर हिस्से साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अभी तक व्यापक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है। बिसवा गांव के निकट जर्जर तटबंध पर बालू की बोरियां लगाई गई हैं, लेकिन गांव के लोगों का कहना है कि हर वर्ष ऐसी बोरियां लगाई जाती हैं और पहली बाढ़ में ही लहरों के थपेड़ों में बोरियां बह जाती हैं, फिर पूरा सीजन दहशत के बीच गुजरता है।
बाढ़ की जद में आने वाले प्रमुख गांव
केवलपुर, सेमरही, सीतारामपुरवा, मैकूपुरवा, चुरईपुरवा, सेमरही द्वितीय, शिवपुर, नरोत्तमपुर, संगवा, समदा, भौंरी, घूरदेवी, सिपहिया, छतरपुरवा, बेहटा, रानीबाग, सिलौटा नई बस्ती, गोलागंज नई बस्ती, पिपरा, पिपरी और किसानगंज समेत दर्जनों गांव बीते पांच वर्षों से लगातार बाढ़ और कटान का दंश झेल रहे हैं।
नाविकों को किया गया अलर्ट, हो रहा स्पर का निर्माण
महसी एसडीएम प्रकाश सिंह ने बताया कि बाढ़ और कटान से बचाव के लिए संवेदनशील गांवों में मॉकड्रिल कराई जा रही है। तटबंधों की सुरक्षा को लेकर सरयू नहर खंड प्रथम के अभियंताओं को पत्र भेजा गया है। किलोमीटर संख्या 49 पर स्पर निर्माण कार्य भी चल रहा है। नाविकों और संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है, ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति में नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।
सरयू नदी के किनारे स्थित बेलहा-बहरौली तटबंध का निर्माण वर्ष 1956 में किया गया था। नानपारा के बलहा से लेकर जरवल के बेहरौली तक बने 95.5 किमी लंबे तटबंध को महसी और आसपास के क्षेत्रों के लिए बाढ़ सुरक्षा की लाइफलाइन माना जाता है। नानपारा से जरवल तक बनाए गए बेलहा-बहरौली तटबंध ने जिले को बड़ी राहत दी थी। इस तटबंध ने सरयू की लहरों को आबादी की ओर बढ़ने से रोका, लेकिन वर्षों बाद भी इसके कई हिस्से कमजोर बने हुए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही कटान और रिसाव का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून की दस्तक के साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिंता बढ़ने लगी है।
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पिपरी गांव निवासी सजीवन और दुलारे का कहना है कि तटबंध से कई किलोमीटर दूर चली गई नदी अब भी बरसात में अचानक रुख बदल लेती है। ऐसे में कटान और जलभराव से फसलें, मकान और सड़कें प्रभावित होती हैं। बाढ़ सुरक्षा की जिम्मेदारी सरयू नहर खंड प्रथम पर है, लेकिन कई संवेदनशील स्थानों पर अभी तक समुचित मरम्मत नहीं की गई है।
हर साल रिसता है तटबंध, फिर भी तैयारी अधूरी
महसी तहसील के विसवा गांव स्थित पीपल के पास, शिवपुर में किलोमीटर 28.500 के निकट तथा बेहटा मोड़ के निकट तटबंध के हिस्सों में हर वर्ष जलस्तर बढ़ने पर रिसाव की स्थिति बनती है। ग्रामीणों के मुताबिक, इस बार भी कई स्थानों पर रैट होल और कमजोर हिस्से साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अभी तक व्यापक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है। बिसवा गांव के निकट जर्जर तटबंध पर बालू की बोरियां लगाई गई हैं, लेकिन गांव के लोगों का कहना है कि हर वर्ष ऐसी बोरियां लगाई जाती हैं और पहली बाढ़ में ही लहरों के थपेड़ों में बोरियां बह जाती हैं, फिर पूरा सीजन दहशत के बीच गुजरता है।
बाढ़ की जद में आने वाले प्रमुख गांव
केवलपुर, सेमरही, सीतारामपुरवा, मैकूपुरवा, चुरईपुरवा, सेमरही द्वितीय, शिवपुर, नरोत्तमपुर, संगवा, समदा, भौंरी, घूरदेवी, सिपहिया, छतरपुरवा, बेहटा, रानीबाग, सिलौटा नई बस्ती, गोलागंज नई बस्ती, पिपरा, पिपरी और किसानगंज समेत दर्जनों गांव बीते पांच वर्षों से लगातार बाढ़ और कटान का दंश झेल रहे हैं।
नाविकों को किया गया अलर्ट, हो रहा स्पर का निर्माण
महसी एसडीएम प्रकाश सिंह ने बताया कि बाढ़ और कटान से बचाव के लिए संवेदनशील गांवों में मॉकड्रिल कराई जा रही है। तटबंधों की सुरक्षा को लेकर सरयू नहर खंड प्रथम के अभियंताओं को पत्र भेजा गया है। किलोमीटर संख्या 49 पर स्पर निर्माण कार्य भी चल रहा है। नाविकों और संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है, ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति में नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।