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Bahraich News: कतर्नियाघाट जंगल में जगह नहीं, गोरखपुर भेजा गया बाघ

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jan 2026 12:34 AM IST
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No space in Katarniaghat forest, tiger sent to Gorakhpur
महसी के बसौनामाफी में वन विभाग द्वारा पकड़ा गया बाघ। - फोटो : महसी के बसौनामाफी में वन विभाग द्वारा पकड़ा गया बाघ।
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बहराइच। कतर्नियाघाट जंगल फुल हो गया है। यहां पहले से ही क्षमता से अधिक बाघ हैं। ऐसे में दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर के इन्कार करने के बाद बाघ को गोरखपुर चिड़ियाघर भेजने का निर्देश उच्चाधिकारियों ने दिया है। रविवार देर शाम को कड़ी सुरक्षा के बीच बाघ को विशेष ट्रक से गोरखपुर चिड़ियाघर के लिए रवाना कर दिया गया।
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महसी तहसील के बसौना माफी गांव के निकट शनिवार को पकड़े गए बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण रविवार को दुधवा टाइगर रिजर्व से आए वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर, कतर्नियाघाट के डॉ. दीपक तथा एक स्थानीय पशु चिकित्सक की संयुक्त टीम ने किया। बाघ की शारीरिक जांच के दौरान उसकी उम्र, वजन, दांत, पंजों, त्वचा और व्यवहार का परीक्षण किया गया।
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जांच में बाघ के शरीर पर किसी तरह की गंभीर चोट, बीमारी या कमजोरी नहीं पाई गई। वन विभाग ने स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने बाघ को कतर्नियाघाट के कोर जोन में छोड़ने का निर्देश दिया, लेकिन कतर्नियाघाट में पहले से ही क्षमता से अधिक बाघ होने की बात फील्ड डायरेक्टर दुधवा एच. राजामोहन ने उच्चाधिकारियों को बताई।
इसके बाद बाघ को गोरखपुर चिड़ियाघर ले जाने का आदेश दिया गया है। इस मामले में डीएफओ सुंदरेशा से बात की गई तो उन्होंने पहले एक घटे बाद मामले में जानकारी देने की बात कही, लेकिन शाम 5 बजे से उन्होंने मीडियाकर्मियों का फोन उठाना ही बंद कर दिया। सूत्रों के मुताबिक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच देर शाम को बाघ को विशेष ट्रक से गोरखपुर चिड़ियाघर के लिए रवाना किया गया।
कितनी होती है बाघ की टेरीटरी
बाघ की टेरिटरी (क्षेत्र) उसे कहते हैं, जिसे एक बाघ अपना घर मानता है और उसकी रक्षा करता है। इसमें भोजन, पानी और प्रजनन के लिए जरूरी संसाधन होते हैं और वह दूसरे नर बाघों को इसमें दखल नहीं करने देता। यह इलाका जंगल की स्थिति और शिकार की उपलब्धता के आधार पर कम से कम 20 वर्ग किलोमीटर होता है। अपने इलाके को नर बाघ पेड़ खरोंचकर या मूत्र से चिह्नित करता है।

कतर्नियाघाट की क्या है स्थिति
कतर्नियाघाट 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। फील्ड डायरेक्टर एच. राजामोहन ने बताया कि कतर्नियाघाट में 59 बाघ प्रवास करते हैं। बाघों के रहन-सहन वाला मुख्य जंगल 406 वर्गकिलोमीटर में फैला है। ऐसे में प्रति बाघ के हिस्से में औसतन लगभग 6.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आ रहा है। यह क्षेत्रफल पहले से ही बहुत कम है।
15 नवंबर को एक बाघ भेजा गया था कानपुर
कतर्नियाघाट के मुर्तिहा रेंज के अमृतपुर गांव में 15 नवंबर को एक नर बाघ पिंजरे में कैद हुआ था। उस बाघ को भी उसी दिन रात में कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया था।
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