{"_id":"6a25c05cc3f919376a0cafe4","slug":"rti-reveals-the-secret-that-the-railway-line-proposal-did-not-reach-the-land-acquisition-officer-bahraich-news-c-98-1-bhr1003-150826-2026-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: आरटीआई से खुला राज, भूमि अध्याप्ति अधिकारी तक नहीं पहुंचा रेल लाइन का प्रस्ताव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: आरटीआई से खुला राज, भूमि अध्याप्ति अधिकारी तक नहीं पहुंचा रेल लाइन का प्रस्ताव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बहराइच। बहराइच से जरवलरोड तक रेलमार्ग बिछाने की वर्षों पुरानी मांग फिलहाल फाइलों में ही उलझी नजर आ रही है। जिले की जनता जिस परियोजना को क्षेत्र के विकास की नई पटरी मान रही थी, उस पर आरटीआई से मिले जवाब ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित रेलमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण का कोई प्रस्ताव उनके कार्यालय को अब तक प्राप्त ही नहीं हुआ है।
यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब इस परियोजना को लेकर 15 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी की उपस्थिति में रेल मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। बैठक के साढ़े पांच माह बीत जाने के बावजूद भूमि अधिग्रहण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से परियोजना की रफ्तार पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
बहराइच-जरवलरोड रेल जोड़ो अभियान के संयोजक डॉ. सत्यभूषण सिंह द्वारा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में यह तथ्य सामने आया है। डॉ. सिंह ने बताया कि लगभग 65 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रेलमार्ग के लोकेशन सर्वे के लिए रेल मंत्रालय ने 162.50 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। सर्वेक्षण का कार्य मेसर्स स्काईलार्क डिजाइनर एंड इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड, पटना को सौंपा गया था और सर्वे का कार्य पूरा भी हो चुका है।
विज्ञापन
इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू न होना परियोजना के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण किसी भी रेल परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है और इसके बिना निर्माण कार्य की दिशा में आगे बढ़ना संभव नहीं है। फिलहाल आरटीआई के खुलासे ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि बहुप्रतीक्षित परियोजना को धरातल पर उतरने में अभी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
65 किलोमीटर लंबाई में प्रस्तावित है बहराइच-जरवलरोड रेलमार्ग।
लोकेशन सर्वे के लिए 162.50 लाख रुपये हो चुके हैं स्वीकृत।
15 दिसंबर 2025 को रेल मंत्रालय के साथ बैठक हुई।
साढ़े पांच माह बाद भी भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव नहीं पहुंचा।
यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब इस परियोजना को लेकर 15 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी की उपस्थिति में रेल मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। बैठक के साढ़े पांच माह बीत जाने के बावजूद भूमि अधिग्रहण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से परियोजना की रफ्तार पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच-जरवलरोड रेल जोड़ो अभियान के संयोजक डॉ. सत्यभूषण सिंह द्वारा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में यह तथ्य सामने आया है। डॉ. सिंह ने बताया कि लगभग 65 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रेलमार्ग के लोकेशन सर्वे के लिए रेल मंत्रालय ने 162.50 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। सर्वेक्षण का कार्य मेसर्स स्काईलार्क डिजाइनर एंड इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड, पटना को सौंपा गया था और सर्वे का कार्य पूरा भी हो चुका है।
Trending Videos
इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू न होना परियोजना के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण किसी भी रेल परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है और इसके बिना निर्माण कार्य की दिशा में आगे बढ़ना संभव नहीं है। फिलहाल आरटीआई के खुलासे ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि बहुप्रतीक्षित परियोजना को धरातल पर उतरने में अभी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
65 किलोमीटर लंबाई में प्रस्तावित है बहराइच-जरवलरोड रेलमार्ग।
लोकेशन सर्वे के लिए 162.50 लाख रुपये हो चुके हैं स्वीकृत।
15 दिसंबर 2025 को रेल मंत्रालय के साथ बैठक हुई।
साढ़े पांच माह बाद भी भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव नहीं पहुंचा।