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Bahraich News: पिंजरे में कैद हुई पूंछ कटी मादा तेंदुआ, पर दहशत कायम, बुजुर्ग की जान लेने वाला अब भी आजाद
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ककरहा रेंज के अहिरनपुरवा में वन विभाग द्वारा पिंजरे में कैद तेंदुआ।
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग की ककरहा रेंज में बुजुर्ग की मौत के तीन दिन बाद वन विभाग के लगाए पिंजरे में सोमवार देर रात एक मादा तेंदुआ कैद हो गई। उसकी पूंछ कटी हुई है। वन विभाग दावा कर रहा है कि क्षेत्र में हमलावर तेंदुए को पकड़ लिया गया है, लेकिन ग्रामीण इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि जिस वन्यजीव ने बुजुर्ग की जान ली, वह अब भी खुले में घूम रहा है। ऐसे में गांव में दहशत कायम है।
अहिरनपुरवा गांव में 18 जुलाई को तेंदुए के हमले में 88 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद ग्रामीणों के विरोध और मांग पर संवेदनशील क्षेत्र में पिंजरा लगाया गया था। साथ ही कई टीमें गठित कर दिन-रात गश्त और निगरानी शुरू की गई। लगातार अभियान के बाद सोमवार रात करीब 11 बजे के आसपास मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गई।
प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि पशु चिकित्सकों की प्रारंभिक जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ मिली है। उसकी उम्र पांच वर्ष के आसपास है। हालांकि उसकी पूंछ कटी हुई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने और सक्षम अधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
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असुरक्षित महसूस कर रहे ग्रामीणमृतक के परिजन और जिला पंचायत सदस्य शैलेश यादव सहित कई ग्रामीणों का दावा है कि पिंजरे में कैद हुई मादा तेंदुआ वही वन्यजीव नहीं है जिसने बुजुर्ग पर हमला किया था। उनका कहना है कि हमलावर तेंदुए की पूछ पूरी थी, जबकि पिंजरे में कैद तेंदुआ की पूंछ कटी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हमलावर तेंदुआ नहीं पकड़ा जाता, ग्रामीण खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।
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अहिरनपुरवा गांव में 18 जुलाई को तेंदुए के हमले में 88 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद ग्रामीणों के विरोध और मांग पर संवेदनशील क्षेत्र में पिंजरा लगाया गया था। साथ ही कई टीमें गठित कर दिन-रात गश्त और निगरानी शुरू की गई। लगातार अभियान के बाद सोमवार रात करीब 11 बजे के आसपास मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गई।
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प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि पशु चिकित्सकों की प्रारंभिक जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ मिली है। उसकी उम्र पांच वर्ष के आसपास है। हालांकि उसकी पूंछ कटी हुई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने और सक्षम अधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
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असुरक्षित महसूस कर रहे ग्रामीणमृतक के परिजन और जिला पंचायत सदस्य शैलेश यादव सहित कई ग्रामीणों का दावा है कि पिंजरे में कैद हुई मादा तेंदुआ वही वन्यजीव नहीं है जिसने बुजुर्ग पर हमला किया था। उनका कहना है कि हमलावर तेंदुए की पूछ पूरी थी, जबकि पिंजरे में कैद तेंदुआ की पूंछ कटी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हमलावर तेंदुआ नहीं पकड़ा जाता, ग्रामीण खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।